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आजादी से पहले बेहद खराब दौर से गुजरा था इंडियन सिनेमा, वेश्यावृत्ति से भी नीचा समझा जाता था काम

हर साल 3000 से ज्यादा फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड की फिल्में 90 देशों में दिखाई जाती हैं।

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2018, 07:17 PM IST
अछूत कन्या में अशोक कुमार के साथ देविका रानी अछूत कन्या में अशोक कुमार के साथ देविका रानी

बॉलीवुड डेस्क. भारत की आजादी को 71 साल पूरे हो चुके हैं। आज़ादी से पहले की बात करें या आज़ादी के बाद, सिनेमा का भारत के इतिहास से गहरा नाता हमेशा रहा है। 105 साल के लंबे सफर में बॉलीवुड ने देश-दुनिया के कई महान कलाकार दिए। हर साल 3000 से ज्यादा फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड की फिल्में 90 देशों में दिखाई जाती हैं। इन फिल्मों में अभिनेत्रियों का भी अहम स्थान लेकिन आज़ादी से पहले के ईरा की बात करें तो स्थिति बेहद खराब थी। 1913 में औरतें फिल्मों में काम करने को वेश्यावृत्ति से भी नीचा काम समझती थीं। इस पेशे को इतना बुरा समझा जाता था कि कोई भी महिला इसमें काम ही नहीं करना चाहती थी।


पुरुष था सिनेमा की पहली हीरोइन: राजा हरिश्चंद्र बना रहे दादा साहेब फालके तारामती के रोल के लिए वेश्याओं के पास गए, लेकिन उनसे तक ‘न’ सुनने को मिली। बेहद परेशान फाल्के की नजर तब कैंटीन में काम करने वाले वेटर पर पड़ी जो कि महिला नहीं था बल्कि एक पुरुष था जिसका नाम सालुंखे था। वह चाल-ढाल में बिलकुल महिलाओं की तरह था और पैसे के लालच में उसने फिल्म में काम करने को तैयार हो गया।


कमला बाई बनी पहली हीरोइन: दादा साहेब को उसी साल अपनी फिल्म ‘मोहिनी भस्मासुर’ में पार्वती के रोल के लिए किसी पुरुष एक्टर को तलाशने की जरूरत नहीं पड़ी। इस बार उन्हें मिली कमला बाई गोखले। घरेलू हालात से परेशान। पैसे के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार। फिल्मों के जरिए कमला बाई की अमीरी और लोकप्रियता ने वेश्याओं को फिल्मों की ओर खूब आकर्षित किया। कमला ने 1913 से 1980 तक के अपने फ़िल्मी करियर में तकरीबन 35 फिल्मों में काम किया।

एंग्लो इंडियन लड़कियों को लुभाने लगा बॉलीवुड: जल्दी ही खुले माहौल में पली-बढ़ी एंग्लो इंडियन लड़कियां भी हीरोइन बनने के लिए कतार लगाने लगीं। पेशेंस कूपर, सुसान सोलोमा आदि के अलावा कई एंग्लो इंडियन लड़कियां तो नाम बदलकर फिल्मों में हीरोइन बनीं। जैसे कि रशेल चोहेन फिल्मों में रामला देवी हो गईं तो एस्थर अब्राहम, प्रमिला बन गईं। धीरे-धीरे दूसरे तबकों से भी औरतें फिल्मों में आने लगीं। तारक बाला, सीता देवी, सुल्ताना, जुबैदा आदि उस साइलेंट ईरा की स्टार थीं


सुपरस्टार थीं रूबी मायर्स यानी सुलोचना: 1926 में 'सिनेमा क्वीन' से डेब्यू करने वाली सुलोचना देखा जाए तो उस जमाने की कैटरीना कैफ थीं। हिंदी नहीं आती थी, खूबसूरत बहुत थीं, उनकी खूबसूरती के दम पर फिल्में चलती थीं। दुर्भाग्य से 1931 में फिल्म ‘आलम आरा’ के जरिए सिनेमा ने आवाज पा ली और साइलेंट सिनेमा की ज्यादातर हीरोइनें डायलॉग ठीक से न बोल पाने के कारण हाशिए पर चली गईं, फिर भी सुलोचना के भाग्य ने साथ न छोड़ा। कैटरीना की तरह सुलोचना के मुंह से खराब हिंदी सुनकर भी दर्शक एक्स्ट्रा एन्जॉय करते थे।

-सुलोचना ने साइलेंट ईरा की उन सुपरस्टार गौहर तक की दुकान बंद कर दी, जिन गौहर का फोटो माचिस पर छापने से बंद होती माचिस फैक्ट्री न सिर्फ चल निकली थी, बल्कि टॉप पर पहुंची थी। वह उस ज़माने में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस थीं। उन्हें एक फिल्म में काम करने के 5000 रुपये मिलते थे। 1928 - 29 के दौरान साइलेंट फिल्मों में उनका करियर चोटी पर था।माधुरी(1928), अनारकली (1928) और इंदिरा बीए (1929)उनकी चर्चित मूक फिल्में थीं।इसके अलावा भी तकरीबन 10 से ज्यादा बोलती फिल्मों में वह नजर आई थीं।1947 में दिलीप कुमार और नूर जहां स्टारर जुगनू के अलावा 1953 में आई अनारकली में उन्होंने सलीम की मां का किरदार निभाया था।

'फर्स्ट लेडी ऑफ़ इंडियन स्क्रीन' ने बदला सिनेमा: ‘मैं बन की चिडिय़ा बनके...’ यह गाना फिल्म ‘अछूत कन्या’ का है जिसे देविका रानी पर फिल्माया गया था। इन्हें फर्स्ट लेडी ऑफ़ इंडियन स्क्रीन कहा जाता है। बेहद मॉडर्न और पढ़ी-लिखी देविका एक ऊंचे घराने की थीं जिन्होंने उस ज़माने में हीरोइनों के प्रति देश की सोच ही बदलकर रख दी।उनके बाद ही अभिनय को सम्मानित परिवारों में एक अच्छे पेशे के तौर पर देखा जाने लगा था।

-देविका की पॉपुलैरिटी का आलम ये था कि पंडित जवाहर लाल नेहरू उनके इस कदर कायल हो गए थे कि उन्हें लव लेटर तक लिखने लगे थे। देविका ने 1933 में अपने पति हिमांशु राय द्वारा बनाई गई फिल्म कर्मा से 1933 में डेब्यू किया था जिसमें चार मिनट का किसिंग सीन देकर उन्होंने सबके होश उड़ा दिए थे हालांकि यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी। 1958 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।

राजा हरिश्चंद्र में सालुंखे(दाएं से पहले) राजा हरिश्चंद्र में सालुंखे(दाएं से पहले)
कमली बाई कमली बाई
पेशेंस कूपर पेशेंस कूपर
रूबी मायर्स यानी सुलोचना रूबी मायर्स यानी सुलोचना
देविका रानी देविका रानी
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अछूत कन्या में अशोक कुमार के साथ देविका रानीअछूत कन्या में अशोक कुमार के साथ देविका रानी
राजा हरिश्चंद्र में सालुंखे(दाएं से पहले)राजा हरिश्चंद्र में सालुंखे(दाएं से पहले)
कमली बाईकमली बाई
पेशेंस कूपरपेशेंस कूपर
रूबी मायर्स यानी सुलोचनारूबी मायर्स यानी सुलोचना
देविका रानीदेविका रानी
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