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यह था अमिताभ बच्चन का पहला डायलॉग, फिर कहा था - 'लाहौल बिला कुव्वत...'

Dainik Bhaskar

Apr 23, 2018, 05:07 PM IST

क्या आप जानते हैं कि फ़िल्मी करियर में अमिताभ बच्चन ने कौन-सा डायलॉग सबसे पहले बोला था।

First Ever Dialogue Of Amitabh Bachchan

मुंबई. अमिताभ बच्चन को फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हुए 49 साल हो गए हैं। वे 1969 से 2018 तक 200 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। उनके कई डायलॉग्स लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ़िल्मी करियर में अमिताभ बच्चन ने कौन-सा डायलॉग सबसे पहले बोला था। नहीं, तो आइए हम बताते हैं अमिताभ के उस डायलॉग के बारे में। यह था अमिताभ का पहला फ़िल्मी डायलॉग...

- अमिताभ बच्चन ने डायरेक्टर के. ए. अब्बास की फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' (1969) से बॉलीवुड में एंट्री ली थी। जाहिर सी बात है कि उनके फ़िल्मी करियर का पहला डायलॉग इसी फिल्म से होगा। फिल्म में अमिताभ का नाम अनवर अली है और उनका पहला सीन ऐसा है कि वे अपने कलीग (जिसे वे सिन्हा भाई कहकर बुलाते हैं) लेटर पढ़ने के लिए कहते हैं। यह लेटर हिंदी में होता है और अनवर को यह भाषा पढ़नी नहीं आती। सिन्हा जब अनवर को कहता है कि अब तक वह हिंदी नहीं पढ़ पाता तो वह कहता है, "तौबा करो जी, ये अरन्तु-परन्तु की भाषा अपने वश की नहीं..."। यही अमिताभ के फ़िल्मी करियर का पहला डायलॉग है। सीन में सिन्हा और अनवर की बातचीत कुछ ऐसी है:-

अनवर : अरे यार...सिन्हा भाई...ज़रा ये तो पढ़िए...साहबजादे साब का खत आया है
सिन्हा : क्यों अनवर मियां...अभी तक आप हिंदी नहीं पढ़ते
अनवर : तौबा करो जी, ये अरन्तु-परन्तु की भाषा अपने वश की नहीं...हां तो क्या लिखते हैं महमूद मियां
(इसी बीच सिन्हा लेटर पढ़ना शुरू कर देता है और अनवर इसमें इस्तेमाल हुई सटीक हिंदी सुनने के बाद कहता है, "लाहौल बिला कुव्वत...क्या जबड़ा तोड़ जबान लिखी है...लड़के को मसूरी के कॉन्वेंट स्कूल में अंग्रेजी सीखने के लिए भेजा और वहां उसे पढ़ा रहे हैं हिंदी...")

अमिताभ को फिल्म के लिए मिले थे 1000 रुपए, पढ़ें आगे की स्लाइड्स...

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अमिताभ को फिल्म के लिए मिले थे 1000 रुपए


- 'सात हिंदुस्तानी' के लिए अमिताभ बच्चन को बतौर मेहनताना 1000 रुपए दिए गए थे। यह खुलासा खुद बिग बी ने भावना सोमाया की बुक 'बच्चनालिया' में किया है। कहा जाता है कि यह फिल्म करने के लिए अमिताभ कोलकाता में 1600 रुपए महीने की नौकरी छोड़ मुंबई आ गए थे। खास बात यह है कि वे फिल्म के लिए साइन नहीं किए गए थे। लेकिन इसमें काम करने के एक्साइटमेंट में बिग बी ने इस्तीफ़ा दे दिया था। जब डायरेक्टर के. ए. अब्बास ने उनसे पूछा कि अगर उन्हें फिल्म न मिलती तो वे क्या करते? जवाब में अमिताभ ने कहा कि कभी-कभी करियर में ऐसे जोखिम उठाने पड़ते हैं। बस यही बात शायद अब्बास के दिल को छू गई और उन्होंने अमिताभ को फिल्म में साइन कर लिया। 

अमिताभ ने खुद चुना था मुस्लिम किरदार, पढ़ें आगे की स्लाइड्स...

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अमिताभ ने खुद चुना था मुस्लिम किरदार 

 

- जब अब्बास ने अमिताभ को फिल्म में साइन किया तो उनके आगे दो किरदारों के ऑप्शन रखे गए। इनमें से एक पंजाबी शख्स का था और दूसरा मुस्लिम का। कहा जाता है कि खुद अमिताभ ने अपने लिए मुस्लिम शायर अनवर का किरदार चुना था, जो रांची बिहार से आजादी की लड़ाई में शामिल होता है। 

फिल्म के लिए ली गई थी अमिताभ के पिता से इजाजत , पढ़ें आगे की स्लाइड्स...

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फिल्म के लिए ली गई थी अमिताभ के पिता से इजाजत 

 

- डायरेक्टर के. ए. अब्बास अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन को अच्छे से जानते थे। लेकिन अमिताभ ने उन्हें तब तक यह बात नहीं बताई कि जब तक कि बताना जरूरी नहीं हो गया। लेकिन जब अब्बास को यह पता चल गया तो उन्होंने हरिवंश राय बच्चन को पत्र लिखा और अमिताभ को फिल्म में साइन करने के लिए इजाजत मांगी।

फिल्म के लिए ली गई थी अमिताभ के पिता से इजाजत , पढ़ें आगे की स्लाइड्स... 

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फिल्म के लिए अमिताभ को मिला था नेशनल अवॉर्ड

 

- 'सात हिंदुस्तानी' बॉक्सऑफिस पर फ्लॉप रही। लेकिन इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट डेब्यू का नेशनल अवॉर्ड मिला था। 

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