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हिंदी फिल्मों के सबसे महंगे विलेन थे अमरीश पुरी, मुंहमांगी फीस न मिलने पर छोड़ देते थे फिल्म, स्टीवन स्पीलबर्ग ने ऑडिशन के लिए अमेरिका बुलाया तो बोले थे- ऑडिशन लेना है तो इंडिया आओ

अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते वक्त अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे अमरीश पुरी

Dainik Bhaskar

Jun 22, 2018, 04:01 PM IST
अमरीश पुरी। अमरीश पुरी।

मुंबई। अमरीश पुरी का (22 जून) को बर्थडे है। इस मौके पर कई वेबसाइट्स खबर चला रही हैं कि अमरीश पुरी उस दौर में बतौर फीस 1 करोड़ रुपए लेते थे, जो सरासर गलत लगता है। फिल्म इतिहासकार और वितरक जयप्रकाश चौकसे ने भी अमरीश पुरी की फीस 1 करोड़ होने के दावे को पूरी तरह से गलत ठहराया है। उन्होंने कहा, ‘यह बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया फिगर है। ‘बॉबी’, ‘प्रेमरोग’ के जमाने में पूरी फिल्म ही 50 से 60 लाख में बन जाती थी। लिहाजा एक करोड़ फीस मिलना तो नामुमकिन है।


चौकसे के मुताबिक- 'फिल्म ‘प्रेमरोग’ के लिए अमरीश पुरी ने मेरे सामने ही राज कपूर से कहा था कि वो दूसरों से 10 लाख लेते हैं, पर उनसे 5-7 लाख ही ले लेंगे। इस पर राज कपूर ने अपने प्रोडक्शन वाले को बुला कर कहा था- मुराद के बेटे रजा मुराद को बोर्ड पर लाओ। वो 50 हजार में विलने का रोल करेगा। हालांकि 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (1995) के आने तक अमरीश पुरी का कद काफी बढ़ चुका था। ऐसे में उनकी फीस भी जरूर बढ़ी होगी। लेकिन तब भी अमरीश को 1 करोड़ फीस मिली हो, ये मुमकिन नहीं..क्योंकि पूरी फिल्म का बजट ही 4 करोड़ था।

प्राण ने कभी नहीं की 11 लाख से ज्यादा की डिमांड, डैनी को मिलते थे 10 लाख...
जयप्रकाश चौकसे के मुताबिक, प्राण साहब ने भी अपनी जिंदगी में कभी 11 लाख रुपए से ज्यादा नहीं मांगे। इस पर भी उन्हें 5 से 7 लाख ही मिलते थे। डैनी एकमात्र विलेन थे, जो 10 लाख लेते थे। रहा सवाल अमजद खान का तो शोले के बाद उन्होंने विलेन के रोल कम ही किए। उनको भी तब 10 लाख से ज्यादा नहीं मिलते थे। राजेंद्र कुमार जैसे हिट हीरो को 5 लाख रुपए मिलते थे, वह भी एक लाइन से 16 हिट फिल्में देने के बाद। हां अमिताभ बच्चन जरूर 'शोले' के बाद हर फिल्म के लिए 1 करोड़ लिया करते थे। नटवर लाल के लिए उन्हें 1 करोड़ मिले थे। उससे पहले जंजीर के लिए उन्हें 40 हजार मिले थे।

वीडियो और ऑडियो इंटरव्यू नहीं देते थे अमरीश पुरी...
अमरीश पुरी की आदत थी कि वो वीडियो या ऑडियो इंटरव्यू नहीं देते थे। कई मौकों पर उनकी फुटेज दिखती भी है तो वो शूटिंग के दौरान की होती है। अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते वक्त भी वो अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे। वो ऐसा इसलिए करते थे ताकि लोग उनकी आवाज को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में ही सुनें। इंटरव्यू लेने वाले से वो साफ कह देते थे कि प्लीज, अपना रिकॉर्डर बंद कर लीजिए। जब मैगजीन से उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन आता था, तो वो कहते थे कि अगर कवर स्टोरी में जगह मिलेगी तभी इंटरव्यू दूंगा।


आए थे हीरो बनने, बन गए विलेन...
अमरीश पुरी 1954 में जब 22 साल के थे तो उन्होंने किसी फिल्म में हीरो के लिए ऑडिशन दिया था। प्रोड्यूसर ने उन्हें यह कहते हुए निकाल दिया था कि उनका चेहरा बेहद पथरीला सा है। इसके बाद अमरीश का झुकाव थिएटर की ओर हो गया। रंगकर्मी इब्राहिम अल्काजी 1961 में उन्हें थिएटर में लाए। उस दौरान अमरीश पुरी LIC में नौकरी कर रहे थे। नाटकों में एक्टिंग करते-करते अमरीश पुरी की अलग ही पहचान बन गई थी।


इन प्रमुख फिल्मों में नजर आए अमरीश पुरी...
अपने करियर में अमरीश पुरी ने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में रेशमा और शेरा (1970), ईमान धरम (1976), जानी दुश्मन (1979), हम पांच (1980), अंधा कानून (1983), कूली (1983), मेरी जंग (1984), नगीना (1986), मिस्टर इंडिया (1987), शहंशाह (1987), त्रिदेव (1988), राम लखन (1989), आज का अर्जुन (1990), विश्वात्मा (1992), करन-अर्जुन (1994), दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995), घातक (1996), परदेस (1997), विरासत (1997), बादशाह (1999), गदर (2001), मुझसे शादी करोगी (2004), किसना (2005)

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अमरीश पुरी।अमरीश पुरी।
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