मुंबई / जॉन अब्राहम चले अजय देवगन और नाना पाटेकर की राह पर, 'पागलपंती' में की है सिर्फ कॉमेडी

John Abraham walks on the path of Ajay Devgan and Nana Patekar, he did sole comedy in 'Pagalpanti'
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John Abraham walks on the path of Ajay Devgan and Nana Patekar, he did sole comedy in 'Pagalpanti'

दैनिक भास्कर

Nov 05, 2019, 10:25 AM IST

बॉलीवुड डेस्क. 'रॉ' और 'बाटला हाउस' जैसी इंटेंस फिल्में करने के बाद जॉन अब्राहम के कदम कॉमेडी की तरफ मुड़े हैं। अनीस बजमी के साथ वेलकम बैक जैसी हिट कॉमेडी देने के बाद अब दोनों की जोड़ी पागलपंती में एक साथ है। वेलकम बैक में जॉन अब्राहम की कॉमेडी के साथ साथ उनका चिर परिचित अंदाज यानी एक्शन भी था, लेकिन पागलपंती में ऐसा नहीं है, यहां अनीस बज्मी ने उनसे सिर्फ कॉमेडी करवाई है। एक्शन इस फिल्म में बहुत कम है। इस तरह देखा जाए तो जॉन अब्राहम ने पागलपंती से कैलकुलेटेड रिस्क लिया है। इस बात की ताईद अनीस बजमी भी करते हैं।

अनीस बाजमी ने किया इमेज के साथ एक्सपेरिमेंट

अनीस बजमी का कहना है कि जॉन अब्राहम फिल्म दर फिल्म अपनी अदाकारी में बहुत ज्यादा निखार ला रहे हैं, इसलिए इस फिल्म में मैंने उनसे वह करवाया है, जो अब तक उन्होंने नहीं किया है। मैंने उनके एक्शन वगैरह उनके डायलॉग में दिलवाए हैं। उनसे फिजिकल एक्शन कम करवाया है। जॉन अब्राहम भी यह सब करने को राजी हो गए। फिल्म में उन्हें बेचारा और डरपोक तक दिखाया गया है, क्योंकि उनके किरदार पर साढ़े साती चल रही है। पहले इस फिल्म का नाम साढे़ साती था, जो काफी नेगेटिव साउंड कर रहा था, इसलिए फिल्म का टाइटल बदलकर पागलपंती किया गया

बाजमी ने बताया कि यह फिल्म पहले अजय देवगन के साथ होनी थी, लेकिन 'डेट्स की वजह से उनके साथ हम इसे सूट नहीं कर सके। ऐसे में जॉन बोर्ड पर आए। जॉन ने इस फिल्म में कमाल की कॉमेडी की है। दरअसल मैं लगातार क्लीशे तोड़ने में यकीन रखता हूं। वेलकम से पहले नाना पाटेकर को किसी ने कॉमेडी के अवतार में कंसीव नहीं किया था। ठीक ऐसी ही छवि जॉन अब्राहम के साथ भी काफी दिनों तक थी। इसके बावजूद कि जॉन अब्राहम ने समय-समय पर गरम मसाला, देसी बॉयज और दोस्ताना में कॉमेडी की थी। फिर भी उन्हें फुल फ्लेज्ड कॉमेडी फिल्में लोगों ने कम ऑफर की। मैंने उसे तोड़ने के लिहाज से जॉन अब्राहम को पहले वेलकम बैक में और अब पागलपंती फिल्म में कास्ट किया। जॉन उस पैमाने पर खड़े उतरे हैं। 

उन्होंने बताया कि पागलपंती में उनका एक्शन बहुत कम है। इस तरह देखा जाए तो उन्होंने ठीक उसी तरह का कैलकुलेटेड रिस्क लिया है, जैसा अजय देवगन ने प्यार तो होना ही था के टाइम पर रिस्क लिया था। या फिर हम कहें तो नाना पाटेकर ने वेलकम के टाइम पर वैसा रिस्क लिया था। आज आलम यह है कि नाना पाटेकर मेरा शुक्रिया अदा किया करते हैं। 

नाना कहते रहते हैं कि वेलकम वाले रोल के चलते अब बच्चे भी उन से नहीं डरते और वह उनके पास आकर गोद में बैठ जाते हैं। जॉन अब्राहम ने भी इस फिल्म में एक्शन बिल्कुल नहीं किया है इसको लेकर उनके चाहने वालों की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है वह देखना दिलचस्प होगा। अजय देवगन ने प्यार तो होना ही था से अपने एक्शन हीरो की इमेज बदली थी। उस फिल्म से पहले तक वह ज्यादातर एक्शन फिल्में करते थे। बाइकों पर सवार या खड़े होकर ही उनकी एंट्री हुआ करते थे। प्यार तो होना ही था से उन्होंने रॉमकॉम के जॉनर में कदम रखा। उसे भी उन्होंने सही साबित किया। उम्मीद करता हूं कि जॉन भी इससे अपनी एक अलग इमेज बनाने में  सफल साबित होंगे।

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