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बर्थडे स्पेशल: हीरो बनने की ख्वाहिश के साथ मुंबई आए थे अमरीश पुरी, पर प्रोड्यूसर ने कहा था- इनका चेहरा ही नहीं है ऐसा

फिल्मों में विलेन के अलावा उन्होंने सकारात्मक और हास्य भूमिकाएं भी निभाईं हैं।

Dainik Bhaskar

Jun 22, 2018, 10:26 AM IST
birthday special amrish puri wanted to play hero roll but his become villain

  • 1954 में पहली बार अमरीश पुरी का स्क्रीन टेस्ट हुआ था।
  • प्रोड्यूसर्स का कहना था कि उनका चेहरा हीरो बनने लायक नहीं है।

बॉलीवुड डेस्क। बॉलीवुड के मशहूर 'खलनायक' रहे अमरीश पुरी का शुक्रवार को जन्मदिन है। अमरीश पुरी आज जिंदा नहीं हैं, लेकिन अगर जिंदा होते तो आज 85 साल के होते। 12 जनवरी 2005 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। अमरीश पुरी बाकी एक्टर्स की तरह ही मुंबई हीरो बनने की ख्वाहिश लेकर आए थे, लेकिन प्रोड्यूसर्स ने ये कहकर मना कर दिया था कि उनका चेहरा हीरो बनने लायक नहीं है। जिसके बाद उन्होंने फिल्मों में विलेन का किरदार ही निभाया और बॉलीवुड के महान 'खलनायकों' में उन्हें गिना जाता है।

1954 में हुआ था अमरीश का स्क्रीन टेस्ट: अमरीश पुरी के बड़े भाई मदन पुरी पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री में थे और उन्होंने ही अमरीश को मुंबई को बुलाया था। पहली बार एक एक्टर के लिए अमरीश पुरी का स्क्रीन टेस्ट 1954 में हुआ, हालांकि प्रोड्यूसर्स को वे पसंद नहीं आए।
- अमरीश पुरी के बेटे राजीव पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'पापा जवानी के दौर में हीरो बनने के लिए मुंबई पहुंचे थे। लेकिन प्रोड्यूसर्स ने उनसे कहा कि तुम्हारा चेहरा हीरो बनने लायक नहीं है। उससे वे बहुत निराश हुए और आखिर में उन्हें विलेन के रोल मिलने लगे।'

प्रोड्यूसर्स ने ठुकराया तो थिएटर पहुंचे अमरीश: उन्हें एक्टिंग करने का काफी जुनून था और यही कारण था कि प्रोड्यूसर्स के ठुकराने के बाद भी उन्होंने एक्टिंग को नहीं छोड़ा और थिएटर की तरफ रुख किया।
- 1971 में डायरेक्टर सुखदेव ने उन्हें 'रेशमा' और 'शेरा' के लिए साइन किया, लेकिन उस वक्त तक उनकी उम्र 40 साल के करीब हो चुकी थी। हालांकि फिल्म में अमरीश को ज्यादा रोल नहीं दिया गया, जिस वजह से उन्हें अपनी पहचान बनाने में और समय लगा।
- इसके बाद श्याम बेनेगल की फिल्म 'निशांत', 'मंथन' और 'भूमिका' जैसी फिल्मों में काम मिला।

1980 में जाकर मिली असली पहचान: अमरीश पुरी को असली पहचान 1980 में आई 'हम पांच' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने दुर्योधन का किरदार निभाया था, जो काफी चर्चित रहा। इसके बाद 'विधाता' और 'हीरो' जैसी फिल्मों ने अमरीश पुरी को खलनायक के तौर पर सुपरहीट कर दिया।
- साल 1987 में आई 'मिस्टर इंडिया' में अमरीश पुरी ने 'मौगेंबो' का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनका डायलॉग 'मौगेंबो खुश हुआ' काफी फेमस हुआ। इन फिल्मों में विलेन का किरदार निभाने के बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा और 'राम लखन', 'सौदागर', 'करण-अर्जुन' और 'कोयला' जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया।

सकारात्मक और हास्य भूमिकाएं भी निभाईं: फिल्मों में विलेन का किरदार निभाने के अलावा अमरीश पुरी ने कई सकारात्मक और हास्य भूमिकाएं भी निभाईं। उन्होंने 'गर्दिश' में पुरुषोत्तम साठे, 'घातक' में शंभूनाथ और 'विरासत' में राजा ठाकुर का किरदार निभाया।
- इनके साथ ही 'मुस्कुराहट', 'चाची 420' और 'हलचल' जैसी फिल्मों में हास्य भूमिकाएं भी अदा कीं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें अमरीश पुरी के 5 बेहतरीन डायलॉग्स...

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