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प्राण को देखते ही डर के मारे भाग गई थी दोस्त की बहन कुछ ऐसा था उनकी इमेज का खौफ

निगेटिव छवि की वजह से लोगों ने बंद कर दिया था बच्चों का नाम प्राण रखना

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 04:14 PM IST

बॉलीवुड डेस्क -अपने जमाने के पॉपुलर विलेन प्राण सिकंद को गुजरे हुए 5 साल बीत गए हैं। 12 जुलाई 2013 को 93 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। प्राण साहब उन लीजेंड्री विलेन में से एक थे, जिनके एक्टिंग कौशल ने ऑडियंस के जेहन पर ऐसा प्रभाव डाला कि उन्हें असल विलेन समझा जाने लगा था ।

-एक किस्सा खुद प्राण ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में सुनाया था। उनके मुताबिक, जब वे अपने एक दोस्त से मिलने दिल्ली उसके घर गए तो उसकी छोटी बहन उनसे डरकर भाग गई थी। बाद में उसने अपने भाई को कहा था कि उसे गुंडे बदमाशों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए।

यहां तक कि बॉलीवुड में उनके साथ काम कर रहीं एक्ट्रेसेस भी उनसे डर जाती थीं। एक्ट्रेस अरुणा ईरानी ने एक बार ऐसा ही किस्सा शेयर किया था।

जब एक ही होटल में प्राण के साथ रुकना पड़ा तो लग रहा था रेप होने का डर...

- प्राण की ऑफिशियल वेबसाइट pransikand.com पर एक वेबसाइट की कटिंग शेयर की गई है, जिसमें अरुणा ईरानी ने बताया है कि जब एक बार प्राण के साथ कोलकाता के एक ही होटल में रुकना पड़ा, तो उन्हें डर लगा था कि प्राण उनका रेप कर देंगे। किस्सा फिल्म 'जोहर महमूद इन हांगकांग' (1971) की शूटिंग के दौरान का है।

- अरुणा ईरानी के हवाले से लिखा गया है, "एक इंसान, जिससे मुझे बहुत डर लगा था, वो प्राणजी थे। क्योंकि मैंने स्क्रीन पर हमेशा उन्हें विलेन के किरदार में देखा था। हम फिल्म 'जोहर महमूद इन हांगकांग' की शूटिंग साथ कर रहे थे। उस वक्त मेरी उम्र बहुत कम थी। शूटिंग हांगकांग में हो रही थी और मुझे बाहर निकले काफी लंबा वक्त हो गया था। मैं मुंबई अपने घर वापस जाना चाहती थी। मेरा और प्राणजी का शूटिंग शेड्यूल बाकी लोगों से पहले पूरा हो गया। इसके बाद प्राणजी ने मुझसे उनके साथ मुंबई लौटने की पेशकश की। हांगकांग में हमारी फ्लाइट डिले हो गई और इस वजह से कोलकाता से मुंबई वाली कनेक्टिंग फ्लाइट चूक गई। हमारे पास सुबह की फ्लाइट पकड़ने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं था। पूरी रात हमें एक ही होटल में गुजारनी थी। उस वक्त मुझे बहुत डर लगा। मेरे मन में बस यही ख्याल आ रहा था कि आज प्राणजी मेरा रेप कर देंगे। हम होटल पहुंचे तो उन्होंने मुझे मेरे कमरे तक छोड़ा और कहा- 'दरवाजा अंदर से बंद कर लो। मैं बगल वाले कमरे में रुका हूं। अगर कोई दस्तक दे तो दरवाजा मत खोलना। मुझे फोन पर बताना। उनकी इस बात ने मेरे दिल को छू लिया। उस दिन मुझे पता चला कि पर्दे का खूंखार विलेन असल में कितना अच्छा इंसान है।"

पहली फिल्म में ही बने थे विलेन

- प्राण ने 1940 की फिल्म 'यमला जट' से डेब्यू किया था। यह बहुत ही दिलचस्प है कि उन्हें पहला किरदार ही विलेन का मिला था। इसके बाद उन्होंने 'आह (1953), 'आजाद' (1955), 'जब प्यार किसी से होता है' (1961), 'जिस देश में गंगा बहती है' (1963),'कश्मीर की कली' (1964), 'मजबूर' (1974), अमर अकबर एंथोनी (1977) और 'डॉन' (1978) जैसी कई फिल्मों में विलेन का रोल करते नजर आए। डायरेक्टर शौकत हुसैन की फिल्म 'खानदान' (1942) में वे नूरजहां के हीरो बनकर आए। यह फिल्म सुपरहिट हुई, लेकिन प्राण को रोमांटिक हीरो बनना पसंद नहीं आया। वे कहते थे कि पेड़ों के पीछे चक्कर लगाना अपने को जमता नहीं था। इसी वजह से वे हीरो बनना पसंद नहीं करते थे।

2004 में चला था प्राण नाम के लोगों को ढूंढने का अभियान

- अगस्त 2004 में 84 साल की उम्र में प्राण और उनकी फैमिली ने इस नाम के दूसरे लोगों को ढूंढने के लिए एक अनोखा अभियान चलाया। इसके लिए उनकी बहू ज्योतिका सिकंद ने एक अभियान चलाया था। दो अवॉर्ड की घोषणा भी उन्होंने की थी। इनके तहत सबसे छोटे और सबसे उम्रदराज प्राण को उनकी मांओं के साथ मुंबई में दो दिन का हॉलिडे फ्री रखा गया था। सितंबर 2004 में एक न्यूज चैनल से बातचीत में प्राण ने बताया था कि बाद में लोगों ने प्राण नाम रखना शुरू कर दिया था। 2004 में जब उन्होंने अभियान चलाया तो उनके पास कई लेटर आए थे, जिनमें मांओं ने बताया था कि उन्होंने उनके बेटे का नाम प्राण रखा है। इतना ही नहीं, दिल्ली के एक परिवार ने तो प्राण को अपने हाथों से उनके बेटे का नाम 'प्राण' रखने के लिए भी इनवाइट किया था।