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25 साल पहले एक रिपोर्टर की खबर के बाद गिरफ्तार हुए थे संजय दत्त, खुद फोन करके पूछा था- अब क्या करूं?

मीडिया में आई जिस खबर के आधार पर 25 साल पहले संजय दत्त गिरफ्तार हुए भास्कर ने खबर लिखने वाले रिपोर्टर से पूरी कहानी जानी

Dainik Bhaskar

Jun 29, 2018, 06:00 AM IST
most important Story of sanjay dutt life break by Reporter Baljeet Parmar
  • बलजीत परमार ने ब्रेक की थी संजय दत्त के पास एके-56 राइफल होने की खबर
  • पुलिस ने हिंट देकर परमार को बताया था कि उन्हें एक सांसद के बेटे पर शक है

बॉलीवुड डेस्क. 12 मार्च 1993 को मुंबई 12 बम धमाकों से दहल उठी थी। इसमें 257 लोगों की मौत हुई थी। लगभग एक हजार लोग घायल हुए थे। इन धमाकों की जांच के बाद टाडा के केस में संजय दत्त भी आरोपी थे। वे दोषी करार दिए गए और उन्हें सजा हुई। संजय दत्त पुलिस की जांच के घेरे में कैसे आए, इससे जुड़ी दिलचस्प कहानी है।

दरअसल, मीडिया में आई जिस पहली खबर के आधार पर 25 साल पहले संजय दत्त गिरफ्तार हुए, भास्कर उस रिपोर्टर तक पहुंचा और गिरफ्तारी से पहले की पूरी कहानी जानी। ये रिपोर्टर हैं बलजीत परमार जो 30 साल तक मुंबई अंडरवर्ल्ड पर रिपोर्टिंग कर चुके हैं। शुक्रवार को बायोपिक ‘संजू’ की रिलीज के मौके पर जानिए संजय दत्त की जिंदगी से जुड़ा सबसे अहम वाकया...।

कौन हैं बलजीत परमार: परमार 1976 में फिल्मों में काम करने चंडीगढ़ से मुंबई आए थे। लेकिन काम नहीं मिला और 1980 में पत्रकार बन गए। बलजीत का दावा है कि मुंबई ब्लास्ट से पहले 1988 से 1992 तक वे दाउद इब्राहिम से 20 बार मिले। 1997 में परमार को गैंगस्टर छोटा राजन ने मारने की कोशिश भी की थी।

संजय दत्त की गिरफ्तारी की कहानी बलजीत परमार की जुबानी...

1) एक सांसद के बेटे पर शक था : परमार कहते हैं, ‘‘धमाकों के ठीक एक महीने बाद, वो 12 अप्रैल 1993 का दिन था जब मैं एक स्टोरी की तलाश में माहिम पुलिस स्टेशन पहुंचा। मैंने वहां मौजूद इन्वेस्टिगेशन टीम के हेड और सीनियर आईपीएस अफसर वाईसी पवार से पूछा कि केस में क्या प्रोग्रेस है? अफसर ने सिर्फ इतना बताया कि एक सांसद के बेटे का नाम सामने आया है। हिंट देकर पवार चले गए। 24 घंटे के बाद घटनाक्रम बदला तो मैंने एक और अफसर से पूछा कि - मुंबई ब्लास्ट केस में आपने एक सांसद के बेटे को उठाया है, वह कौन है? अफसर ने बताया कि अभी किसी को उठाया नहीं है। जिस पर शक है, वह फॉरेन में शूटिंग कर रहा है। जब आएगा, फिर देखेंगे।’’

2) वो सांसद सुनील दत्त थे और जिस पर शक था वो संजय दत्त थे : परमार के मुताबिक, ‘‘अफसर के बताने के बाद मेरा शक पुख्ता हो गया कि ये सांसद सुनील दत्त हैं और निश्चित रूप से उनके इकलौते बेटे संजय के तार इस केस से जुड़े हो सकते हैं, जो उन दिनों मॉरीशस में ‘आतिश’ की शूटिंग कर रहे थे। मुझे सुनील दत्त पर्सनली जानते थे। इसलिए खबर लिखने से पहले उनका स्टेटमेंट लेने सुनील दत्त को फोन लगाने की सोची। पता चला कि वे जर्मनी गए हैं।

जर्मनी में दत्त और अपने कॉमन फ्रैंड और सीनियर फोटोग्राफर जय उल्लाल के घर फोन किया, लेकिन सामने होने के बाद भी सुनील ने इशारे से मना कर दिया था कि बलजीत को मत बताना कि मैं यहां हूं। सुनील दत्त मुझे टालना चाह रहे थे। काफी कोशिशों के बाद जब सुनील और संजय से बात नहीं हो पाई तब मैंने दत्त फैमिली के करीबी सुरेश शेट्‌टी को फोन करके कहा कि अगर कल तक सुनील या संजय ने फोन नहीं किया तो परसों मैं खबर पब्लिश कर दूंगा। 15 अप्रैल 1993 को संजय की खबर ‘द डेली' अखबार में पब्लिश कर दी। खबर आग की तरह फैल गई। संजय दत्त ने मॉरीशस से मुझे फोन करके कहा- आप मेरे दोस्त हैं। आपने मेरे खिलाफ क्यों लिखा? मैंने संजय से कहा- मेरे पास जानकारी थी। तब संजय ने कहा ऐसी कोई बात नहीं है। मैं पुलिस कमिश्नर से बात करुंगा। मुझे नंबर दीजिए।’’

3) संजय ने रिपोर्टर को फोन किया : बलजीत कहते हैं, ‘‘मैं रोजाना ब्लास्ट केस की प्रोग्रेस जानने सुबह 8.30 बजे कमिश्नर अमरजीत सिंह सामरा को फोन करता था। खबर लगाने के बाद मैंने उन्हें फोन किया और संजय के बारे में बताया। तब कमिश्नर ने कहा कि संजय की मुझसे बात हो गई है। संजय ने कमिश्नर सामरा के पास फोन करके केस और भारत आने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है। आप अपना काम करो। जब खत्म हो जाए, तब आना। कमिश्नर ने सोचा कि अगर संजय को पता चला कि उनके खिलाफ केस है तो हो सकता है वह भाग जाए!’’

4) संजय को हथियार पुलिस को सौंपने की सलाह दी : परमार बताते हैं, ‘‘संजय ने फिर से मुझे फोन किया और बताया कि पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि कोई केस नहीं है। आपकी खबर में दम नहीं है। आप मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। तब मैंने संजय से कहा- मैं आपका फैमिली फ्रेंड हूं, धोखे में मत आओ। मेरी सलाह है कि जो हथियार हैं उन्हें पुलिस के हवाले कर दो। ऐसा करोगे तो आर्म्स एक्ट का केस बनेगा, 2-4 साल में छूट जाओगे। अगर पुलिस घर से हथियार खोजती है तो टाडा के तहत लंबे केस में फंस जाओगे। यह सुनकर संजय ने फोन बंद कर दिया। कुछ देर बाद संजय ने दोबारा मुझे फोन किया और पूछा कि क्या करना है। मैंने उससे कहा किसी को भेजकर हथियार (एके 56) बांद्रा पुलिस स्टेशन भिजवा दो। बाद में खुद आकर पुलिस के सामने पेश हो जाना। संजय ने सलाह मानने की बजाय अपने दोस्त यूसुफ नलवाला को हथियार नष्ट करने के लिए कहा। यूसुफ ने हथियार एक लोहा फैक्ट्री में फेंक दिया था।’’

5) सुनील दत्त यही कहते थे कि मैंने संजय को बर्बाद कर दिया : परमार ने बताया, ‘‘19 अप्रैल 1993 को संजय भारत लौट आया, लेकिन इस दौरान सुनील दत्त ने संजय की वापसी की खबर पुलिस को दे दी। पुलिस की टीम ने संजय को सहारा एयरपोर्ट से ही अरेस्ट कर लिया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद लोग मेरे ऑफिस में फोन करके गालियां देते थे। खुद सुनील दत्त ने मरते दम तक यही बात कही कि बलजीत ने मेरे बेटे को बर्बाद कर दिया। आज भी संजय और उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति मुझे कहीं मिल जाता है तो मिलने पर भी मुझसे बात नहीं करता है।’’

एक्स्ट्रा शॉट्स
- संजय के वकील राम जेठमलानी ने बलजीत को संजय की खबर छापने के लिए एक करोड़ रुपए का लीगल नोटिस भेजा। इसमें लिखा था कि वे या तो खबर के बारे में सबूत पेश करें या परिणाम भुगतने तैयार रहें। बलजीत ने इस नोटिस को लेकर राम जेठमलानी को फोन किया और कहा मेरे पास डेढ़ रूपए नहीं और आपने डेढ़ करोड़ का नोटिस भेजा है। तब जेठमलानी ने जबाव दिया कि नोटिस पर देखो किसके साइन हैं, अगर मेरे नहीं तो उसे फाड़कर फेंक दो। बलजीत के अलावा उनकी प्रेस के नाम भी 1.5 करोड़ का नोटिस आया था।
- दूसरे दिन बलजीत ने उन सभी के नाम के साथ एक और खबर पब्लिश कर दी, जिनसे उन्होंने संजय के बारे में जानकारी मांगी थी। दूसरी खबर के बाद उनके पास 2.5 करोड़ का नोटिस फिर से आया। इस तरह संजय की खबरें लगाने के बाद कुल 3 नोटिस उनके पास आए।

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'संजू' में 1993 में हुए मुंबई बम ब्लास्ट केस के बारे में दिखाया जाएगा। ये वही मामला है जिसकी वजह से संजय दत्त को जेल जाना पड़ा और उनकी ये लड़ाई 23 साल तक चली। संजय को पहली बार 19 अप्रैल 1993 में एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उनको अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया था और करीब 20 साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि उनके अच्छे व्यवहार के चलते उन्हें सजा पूरी होने से पहले ही 25 फरवरी 2016 को रिहा कर दिया गया था। 

 

क्या था मुंबई बम ब्लास्ट केस: 12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक लगातार 12 बम धमाके हुए। इन धमाकों में 257 लोग मारे गए, जबकि 713 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पहला बम ब्लास्ट 1 बजकर 29 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के बाहर हुआ था, जिसमें 84 लोग मारे गए थे। इसके बाद अगले एक घंटे तक लगातार बम ब्लास्ट होते रहे।

 

- इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों को सजा सुनाई गई थी, जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया था। इस मामले में याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे 2015 में फांसी दी गई है। इस बम ब्लास्ट का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम है, जो 1995 से ही फरार है। 

 

बाल ठाकरे की वजह से जमानत पर छूटे थे संजय: 1993 में संजय दत्त को पहली बार जेल भेजा गया। इस वजह से उनके पिता सुनील दत्त काफी परेशान हुए और किसी भी तरह से संजय की रिहाई करने में जुटे रहे। सुनील थे तो कांग्रेसी नेता, लेकिन महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक किसी भी कांग्रेसी नेता ने इस मामले में दखल नहीं दी। 

 

- इसके बाद मुंबई लौटे सुनील दत्त को उनके समधि और मशहूर एक्टर राजेंद्र कुमार ने बाला साहेब से मिलने की सलाह दी। अपने समधि की बात मानकर सुनील दत्त मिलने पहुंचे और संजय की रिहाई की बात की। इस पर ठाकरे ने जवाब दिया कि 'ठीक है देखते हैं क्या हो सकता है। लेकिन ये सब मैं तुम्हारे लिए कर रहा हूं, संजय के लिए नहीं।' इसके बाद संजय को भी बुलाकर ठाकरे ने फटकार लगाई और कहा कि 'अब से जो तुम्हारे पिता बोलें, वही करना।' 


- इसके बाद संजय जब दोबारा गिरफ्तार हुए तो बाला साहेब ने ही मध्यस्थता की और संजय को जमानत पर रिहा करवाया। संजय को रिहा कराने के बाद विरोधी बाला साहेब पर जमकर बरसे, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। जेल से रिहाई के बाद संजय दत्त उनके पिता के साथ सीधे मातोश्री पहुंचे और बाल ठाकरे के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगे थे।

 

- जब तक बाल ठाकरे जिंदा रहे तब तक शिवसेना ने संजय दत्त का विरोध नहीं किया। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद शिवसेना ने संजय की दया याचिका का विरोध किया। 

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टाइमलाइन में देखें संजय दत्त के केस में कब-कब क्या हुआ?

19 अप्रैल 1993

मुंबई पुलिस ने संजय दत्त के घर से तलाशी के दौरान एके 56 बरामद की। उन्हें गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

26 अप्रैल 1993

संजय ने अदालत में जुर्म कबूला

3 मई 1993

जमानत पर रिहा हुए।

4 मई 1993

जमानत रद्द हुई और दोबारा गिरफ्तार

16 अक्टूबर 1995

16 महीने की सजा के बाद जमानत मंजूर ।

दिसंबर 1995: 

दोबारा गिरफ्तार   

अप्रैल 1997

जमानत पर रिहा हुए।

28 नवंबर 2006: 

आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया, लेकिन टाडा एक्ट से जुड़े सभी मामलों में बरी ।

31 जुलाई 2007

टाडा कोर्ट ने संजय दत्त को गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप में 6 साल की सजा सुनाई ।

2 अगस्त 2007

उन्हें पुणे की यरवदा जेल भेजा गया

20 अगस्त 2007

उन्हें जमानत पर छोड़ा गया लेकिन दो दिन बाद ही यानी 22 अगस्त को फिर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

27 अगस्त 2007

सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उन्हें रिहा कर दिया।

 

21 मार्च 2013 

सुप्रीम कोर्ट ने टाडा कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए संजय दत्त को सजा सुनाई, लेकिन 6 साल की सजा को कम करते हुए 5 साल कर दिया। उन्हें 4 हफ्तों के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया गया।

17 अप्रैल 2013 

संजय ने अपनी फिल्में पूरी करने के लिए समय मांगा और कोर्ट ने उन्हें 4 हफ्ते का समय दिया।

22 मई 2013 

उन्हें फिर यरवदा जेल ले जाया गया, जहां उन्हें अपनी सजा के बाकी 3 साल और 6 महीने बिताने थे, क्योंकि वे 16 महीने की सजा पहले ही काट चुके थे।

25 फरवरी 2016 

उनकी सजा मई 2016 में खत्म होनी थी, लेकिन जेल में उनके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उन्हें 25 फरवरी 2016 को ही रिहा कर दिया गया।

 

 
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