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पावर, चालाकी और षड़यंत्र की कमजोर कहानी है 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3' / पावर, चालाकी और षड़यंत्र की कमजोर कहानी है 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3'

Dainikbhaskar.com

Jul 27, 2018, 10:53 AM IST

इस फिल्म में डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया स्टोरी और स्क्रीनप्ले दोनों में फेल हुए हैं।

Movie review: Saheb Biwi Aur gangster 3
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क्रिटिक रेटिंग 1.5
स्टार कास्ट संजय दत्त ,माही गिल,जिमी शेरगिल और चित्रागंदा सिंह
डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया
प्रोड्यूसर राहुल मित्रा
जोनर ड्रामा

बॉलीवुड डेस्क. तिग्मांशु धूलिया ने 'साहेब बीवी और गैंगस्टर 3' में सत्ता का पावर, चालाकी और षड़यंत्र को जारी रखा है। माधवी देवी (माही गिल) और साहेब (जिमी शेरगिल) लड़ते नजर आए हैं। इस बार ऐसा लगता है कि माधवी साहेब से आगे निकल गईं हैं साहेब के जेल जाने के बाद वे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बन गईं हैं।

कहानी: इस बार गैंगस्टर (संजय दत्त) लंदन रिटर्न हैं जो बूंदीगढ़ की रॉयल फैमिली से संबंध रखता है। माधवी साहेब से वापस आने से खुश नहीं है और उसे हवेली से निकलवाने की हर संभव कोशिश करती है इसके लिए वो उदय की मदद भी लेती है।

उदय इस काम के लिए परफेक्ट हैं। उदय अपनी फैमिली में भी कई परेशानियों से जूझ रहा है। उसके पिता (कबीर बेदी) और भाई (दीपक तिजोरी )सोचते हैं कि वो उनके बिजनेस को बर्बाद कर रहा है और उन्हें मारना चाहता है। उदय वेश्या का किरदार निभा रहीं चित्रांगदा (सुहानी) से प्यार करता है। जो उदय की फैमिली को बिलकुल पसंद नहीं है। माधवी के अलावा साहेब के दुश्मनों की लिस्ट में साहेब के ससुर (जाकिर हुसैन) भी हैं जिन्हें लगता है कि साहेब ने उनकी बेटी रंजना सोहा अली खान को शराबी बना दिया है।

डायरेक्शन: इस फिल्म में तिग्मांशु स्टोरी और स्क्रीन प्ले दोनों में फेल हुए हैं। उन्होंने स्टोरी पर काम करने की जगह रोमांचक क्लाइमैक्स दिखाया है। आपको कई जोड़े सुन सीन मिलेंगे जिनको लेकर आपको पता ही नहीं लगेगा कि ये कहां से आ गए। फिल्म का बेस्ट पार्ट साहेब और माधवी के बीच की लड़ाई है। फिल्म का डायरेक्शन भी अच्छा नहीं है यह कंफ्यूजिंग लगता है। फिल्म में कुछ सीन ऐसे भी हैं जो कि सीरियस होने चाहिए थे कि लेकिन सही एक्जीक्यूशन नहीं होने के कारण मजाकिया बन गए।

एक्टिंग: संजय को उम्रदराज गैंगस्टर का रोल सूट किया है। उन्होंने अपने रोल को शानदार तरीके से निभाया है। हालांकि चित्रांगदा के साथ उनके रोमांटिक सीन बेढंगे लगते हैं। वे चित्रागंदा के साथ कंफर्टेबल नहीं दिखते। इस फिल्म का बेस्ट पार्ट जिमी शेरगिल हैं। उन्होंने साहेब के रोल को जबर्दस्त तरीके से निभाया है। माही ने बदला लेने वाली बीवी के किरदार में जान डाली है।

चित्रांगदा सिंह, जिन्होंने यूपी बैकग्राउंड में राजस्थानी ड्रेसेस पहनी हैं, निराश करती हैं। हालांकि उनका कैरेक्टर भी ऐसा था लेकिन फिर भी मेहनत की जा सकती थी। कबीर बेदी और नफीसा अली कुछ खास नहीं हैं।

म्यूजिक: फिल्म का म्यूजिक औसत है। अगर आपके पास टाइम है तो धूलिया की दूसरी अच्छी फिल्में जैसे पान सिंह तौमर, हासिल आदि देखिए। यहां आपके तीन घंटे बर्बाद हो सकते हैं।

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