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महज 12 मिनट की शॉर्ट फिल्म बाॅमगे को मिला है बॉलीवुड की पहली LGBTQ बेस्ड फिल्म का दर्जा, आज तक नहीं हुई रिलीज

फिल्म का डायरेक्शन रियाद विन्सी वाडिया और जांगु सेठना ने किया था।

Danik Bhaskar | Sep 06, 2018, 03:39 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 6 सितम्बर के दिन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के एक हिस्से को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। आईपीसी में 1861 में शामिल की गई धारा 377 समलैंगिकों के बीच शारीरिक संबंधों को अपराध मानती थी। इसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। इस फैसले से बॉलीवुड के स्टार्स भी इत्तेफाक रखते हैं, कई सेलेब्स ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है।

- हालांकि बॉलीवुड में भी इस LGBTQ सब्जेक्ट पर फिल्में बनती रही हैं। लेकिन पहली फिल्म का दर्जा 1996 में बनी फिल्म बॉमगे को मिला है।

विवादों में आ गई थी शॉर्ट फिल्म : बॉमगे को 6 सेग्मेंट्स में बनाया गया था। फिल्म में आर राज राव की 6 कविताओं का प्रयोग किया गया था। इन पोयम्स को ओपिनियन्स, अंडरग्राउंड, लेफ्टी, एनिमा, बॉमगे और फ्रैंड्स का टाइटल दिया गया। फिल्म के मुख्य किरदारों में राहुल बोस, कुशाल पंजाबी और तरुण साहनी भी शामिल थे।

- फिल्म के लाइब्रेरी में होमोसेक्सुअल सीन को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस सीन को शूट करने के लिए क्रू ने झूठ बोला था कि वे रैगिंग पर एक फिल्म बना रहे हैं।

5 लाख में बनी थी बॉमगे : रियाद ने राव की कविताएं पढ़कर उन्हें लो बजट फिल्म बनाने का ऑफर दिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर महज 5 लाख के बजट में फिल्म बनाई। वाडिया इस फिल्म में गे कम्युनिटी के कुछ लोगों को कास्ट करना चाहते थे, लेकिन उन्हें लगा कि यह बहुत मुश्किल है। फिल्म में काम करने से उन्हें कम्युनिटी बाहर कर देगी।

- यह फिल्म आज तक भारत में रिलीज नहीं हुई है क्योंकि वाडिया ने सेंसर बोर्ड को फिल्म की कॉपी नहीं भेजी। उन्हें लगा था कि बोर्ड फिल्म को ए सर्टिफिकेट दे देगा।

ये है फैसले की बाकी चीजें : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दो बालिग एकांत में आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं तो वह अपराध नहीं माना जाएगा। लेकिन बच्चों या पशुओं से ऐसे रिश्ते अपराध की श्रेणी में बरकरार रहेंगे।2009 में हाईकोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था, लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया था।