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अक्षय की ‘गोल्ड’ ध्यानचंद या बलबीर पर नहीं, हॉकी के फॉरवर्ड प्लेयर मुखर्जी पर आधारित है

एक मैच में हबुल दा ने लाहौर टीम के खिलाफ लगभग जीरो एंगल से गोल किया था। इस टीम में कुछ ओलंपियन भी शामिल थे।

Danik Bhaskar | Jun 16, 2018, 05:21 PM IST
बंगाल यंगमैन एसोसिएशन की टीम में एनएन मुखर्जी कैप्टन के रूप में हॉकी खेलते थे। बंगाल यंगमैन एसोसिएशन की टीम में एनएन मुखर्जी कैप्टन के रूप में हॉकी खेलते थे।

बॉलीवुड डेस्क। हाॅकी पर बन रही अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड के दो टीजर और कई सारे पोस्टर रिलीज हो चुके हैं। अक्षय ने जिस किरदार को निभाया है वह ध्यानचंद या बलबीर सिंह का नहीं बल्कि बंगाल यंगमैन एसोसिएशन टीम के कैप्टन के तौर खेलने वाले एनएन मुखर्जी का है। मुखर्जी 1948 में ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाली हॉकी टीम के हेड कोच थे।

गोल्ड वाले अक्षय कुमार यानी असली हबुल दा की 5 खास बातें।

#1 गोल नहीं रोक सकता था काेई
- हबुल दा के बारे में यह फेमस था कि एक बार यदि वे विरोधी टीम के डी के अंदर पहुंच गए और बॉल उनके पास है तो गोल करने से कोई नहीं रोक सकता।
- ध्यानचंद ने अपनी बायोग्राफी ‘गोल’ में लिखा है कि उन्होंने हबुल दा के खेल से ही कई सारी चीजें सीखी हैं।
- एनएन मुखर्जी 1928 में एम्सटरडम ओलंपिक में खेलने गई ब्रिटिश इंडिया हाॅकी टीम में फॉरवर्ड के तौर पर खेले थे।

#2 लाॅन्ग हिट एंड रन आज भी प्रचलित
- हबुल मुखर्जी ने 1948 की हाॅकी टीम को लॉन्ग हिट एंड रन की रणनीति सिखाई थी। यही रणनीति आज भी हॉकी टीमों में प्रचलित है।
- फिल्म में अक्षय का किरदार हबुल दा से प्रेरित है, इसके बारे में उस सीन से पता चलता है जहां अक्षय बोर्ड पर लॉन्ग् हिट एंड रन बनाते दिखाई देते हैं।

#3 ग्राउंड के साथ शब्दों से सिखाई हॉकी
- 1948, 1952 और 1964 में नेशनल मेन्स हॉकी टीम के हेड कोच रहे हबुल दा ने हॉकी में रुचि रखने वाले नए खिलाड़ियों के लिए ‘हाउ टू प्ले हॉकी’ किताब लिखी थी।
- 1947 में जब लंदन ओलंपिक के लिए टीम सलेक्शन बॉम्बे में हो रहा था, तब जॉनी कार और एनएन मुखर्जी कैम्प इंचार्ज थे। उस दौरान एसी चैटर्जी इंडियन हॉकी फेडरेशन के सेक्रेटरी थे।

#4 टर्निंग पॉइंट बना 1936 का जर्मनी ओलंपिक

- बात फिल्म गोल्ड के टीजर की करें ताे भले फिल्म 1948 की है। लेकिन इसमें 1936 ओलंपिक के बारे में भी दिखाया जाएगा। भारत तब अंग्रेजों का गुलाम था।
- ब्रिटिश इंडिया टीम के कैप्टन के रूप में ध्यानचंद का किरदार जब मेडल लेने जाता है तब बाकी खिलाड़ी साइमन जैक यानी ब्रिटिश ध्वज को सलामी देते हैं। अक्षय उस सीन में दूसरे नंबर पर खड़े दिखाई देते हैं।
- इसी मैच के बाद अक्षय ड्रेसिंग रूम में चरखे वाला तिरंगा लिए नजर आते हैं। जबकि रियल कैरेक्टर हबुल दा के साथ मिलकर बाकी भारतीय खिलाड़ियों ने तिरंगे को सलामी दी थी।
- चरखे वाला यह तिरंगा 1931 से देश आजाद होने तक राष्ट्रध्वज के रूप में प्रयोग हुआ था।

#5 फाइनल मैच में खेले नंगे पैर
- एनएन मुखर्जी के बारे में एक बात प्रचलित थी कि वे नंगे पैर धोती को लंगोट की तरह बांधकर भी सबसे तेज दौड़ते थे। उनकी इसी खूबी से बंगाल यंग एेसोसिएशन ने कई मैच जीते थे।
- बलवीर सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 1936 के ओलंपिक फाइनल मैच में ग्रांउड के स्लिपरी हो जाने के कारण टीम के कैप्टन और वाइस कैप्टन नंगे पैर खेले थे।

एक्स्ट्रा शॉट्स
- फिल्म गोल्ड में हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का किरदार कुणाल कपूर निभा रहे हैं। वहीं अमित साध टीम के कैप्टन रहे किशनलाल का रोल प्ले करेंगे।
- एनएन मुखर्जी की मृत्यु आर्थिक तंगी के चलते 1996 में हुई। उस दौर तक राज्य और केन्द्र सरकार ने उन्हें किसी तरह की मदद मुहैया नहीं करायी थी।

1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में बलबीर सिंह वाइज कैप्टन और हबुल दा हेड कोच रहे। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में बलबीर सिंह वाइज कैप्टन और हबुल दा हेड कोच रहे।
1928 में एम्सटरडम ओलंपिक में (लाल घेरे में हबुल दा) गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के सदस्य। 1928 में एम्सटरडम ओलंपिक में (लाल घेरे में हबुल दा) गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के सदस्य।