विज्ञापन

ऐसा था मो. रफी का आखिरी दिन: मुंबई ने पहले कभी नहीं देखा था ऐसा जनाजा, नहीं रुक रही थी आसमां से बारिश और आंखाें से आंसू / ऐसा था मो. रफी का आखिरी दिन: मुंबई ने पहले कभी नहीं देखा था ऐसा जनाजा, नहीं रुक रही थी आसमां से बारिश और आंखाें से आंसू

DainikBhaskar.com

Jul 31, 2018, 04:18 PM IST

भारत की आजादी की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मो. रफी को सिल्वर मेडल दिया था।

funeral day memoirs of legendary singer mo rafi from rafi villa to cemetery
  • comment

बॉलीवुड डेस्क. खुदा की आवाज कहे जाने वाले मोहम्मद रफी की आज 39वीं पुण्यतिथि (31 जुलाई 1980 )है। रफी का निधन 55 साल की उम्र में हार्ट अटैक के कारण हुआ था। तब तक उन्होंने कई भाषाओं में 26 हजार से ज्यादा गानों की रिकॉर्डिंग का रिकॉर्ड बना लिया था। निधन से चार दिन पहले ही रफी साहब ने जे. आेमप्रकाश की फिल्म 'आस-पास' के लिए एक गाना रिकाॅर्ड किया था। जो उनका गाया आखिरी गीत साबित हुआ। कहा जाता है कि मो. रफी की अंतिम यात्रा दूसरा मौका थी, जहां हजारों की तादाद में लोग पहुंचे थे। इसके पहले इतनी बड़ी संख्या में लोग महात्मा गांधी की शवयात्रा में पहुंचे थे।

ऐसे हुई थी रफी साहब की अंतिम विदाई

- सुबह 10.30 बजे का वक्त था। मुंबई की मूसलाधार बारिश के बावजूद मो. रफी के निधन की खबर आग की तरह फैल चुकी थी।

- मुंबई के कई स्कूलों में छुट्‌टी घोषित कर दी गई थी। सरकार ने भी दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की।

- जिसने जिस हाल में मो. रफी के इंतकाल की खबर सुनी, वह उसी हाल में बांद्रा स्थित उनके घर रफी विला की ओर चल पड़ा। कुछ ही देर में रफी विला के सामने हजारों की तादाद में लाेग इकट्‌ठा हो गए।

- भारी बारिश के कारण चारों ओर सिर्फ छाते ही छाते नजर आ रहे थे। घर का हॉल जहां रफी साहब का शव रखा था, वह फिल्मी दुनिया के लोगों से खचा-खच भर गया था।

- रफी साहब की पत्नी बिलकिस को सायरा बानो, नसीम बानो, शम्मी, नासिर हुसैन की पत्नी सांत्वना देने की नाकाम कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनके आंसुआें को रोक पाना मुश्किल था।

- मो. रफी के साले जहीर, जो उनका मैनेजमेंट और विदेशों के टूर देखते थे, बच्चों की तरह रो रहे थे। वह एक ही बात दोहरा रहे थे - साहब, आप मुझे अपने साथ क्याें नहीं ले गए।

- जहीर रवीन्द्र जैन की ओर देखकर बार-बार कहते कि दादा अब आपको तानसेन कौन कहेगा।

- चार दिन पहले ही घर लौटे मो. रफी के छोटे बेटे शाहिद रफी, पिता काे बेजान देखकर कई बार बेहोश हुए।

- घर की बारादरी में रफी साहब को लिटाया गया। बेजान शरीर के बावजूद उनके चेहरे की चिर-परिचित मुस्कान ज्यों की त्यों थी। अंतिम दर्शन को अाने वाले लोग पलट-पलटकर उनकी मुस्कान को यादों में बसाने की कोशिश में लगे थे।

- किशोर कुमार मो. रफी के पैरों को पकड़कर जार-जार रो रहे थे। तलत महमूद, राखी, हेमलता, सुलक्षणा पंडित हर एक की आंख से आंसू रुक नहीं रहे थे।

- रफी साहब के बेटे और बेटी-दामाद, जो लंदन में रहते थे, उन्हें खबर कर दी गई थी, लेकिन फिर भी उन्हें आने में शनिवार तक का वक्त लगना था।

- दोपहर 12.15 बजे, अंतिम क्रियाएं शुरू हुईं। पहले जुमे की नमाज पढ़ी गई। उसके बाद जनाजे की नमाज पढ़ी गई। बांद्रा की मस्जिद में पहुंची भीड़ को संभालना असंभव होता जा रहा था।

- दोपहर 2 बजे, जनाजा कब्रिस्तान की ओर रवाना हुआ।

- बांद्रा और आस-पास की सारी सड़कें लोगों की भीड़ से जाम हो चुकी थीं। जिस शव वाहन में रफी साहब का जनाजा रखा था, लोग उसके पीछे-पीछे चल रहे थे।

- राज कपूर, रफी विला नहीं पहुंच पाए थे, इसलिए वे सीधे बांद्रा मस्जिद से कब्रिस्तान तक पहुंचे। दिलीप कुमार भी जनाजे के साथ ही कब्रिस्तान तक पहुंचे।

- शाम 4.45 बजे रफी साहब को सांताक्रूज पश्चिम स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। रफी साहब की कब्र के पास लगा नारियल का पेड़ लगा है, जो उनकी कब्र की पहचान है।

X
funeral day memoirs of legendary singer mo rafi from rafi villa to cemetery
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन