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Movie Review: इंसान उम्र से नहीं सोच से बूढ़ा होता है, यही बताती है '102 नॉट आउट'

डायरेक्टर उमेश शुक्ला की फिल्म '102 नॉट आउट' ह्यूमन इंट्रेस्ट और सोशल मैसेज देने वाली फिल्म है।

Danik Bhaskar | May 04, 2018, 08:57 PM IST

क्रिटिक रेटिंग 3/5
स्टार कास्ट स्टार कास्ट अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, जिमित त्रिवेदी
डायरेक्टर उमेश शुक्ला
प्रोड्यूसर ट्रीटॉप एंटरटेनमेंट, बेंचमार्क पिक्चर्स, सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट फिल्म्स इंडिया
म्यूजिक सलीम-सुलेमान, जॉर्ज जोसेफ
जॉनर कॉमेडी ड्रामा
ड्यूरेशन 1 घंटा 41 मिनट

'102 नॉट आउट' की कहानी : यह कहानी है दत्तात्रेय वखारिया (अमिताभ बच्चन) नाम के एक बुजुर्ग की, जो चीन के एक 118 वर्षीय ओंग चोंग तुंग से ज्यादा जीने का रिकॉर्ड बनाना चाहता है। दरअसल, ओंग के पास 118 साल तक जीने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है और दत्तात्रेय तय करता है कि वह इस रिकॉर्ड को तोड़ेगा। दत्तात्रेय का एक बेटा है बाबूलाल (ऋषि कपूर) जिसकी उम्र 75 साल है। वह अपने पिता से बिल्कुल अलग है। दत्तात्रेय हमेशा खुश रहता है, वह निगेटिविटी को खुद से दूर रखता है और बाबूलाल की जिंदगी में कोई खुशी नहीं है। इसी बीच एक दिन दत्तात्रेय तय करता है कि यदि उसका बेटा अपना लाइफस्टाइल नहीं बदलेगा तो वह उसे वृद्धाश्रम भेज देगा। कहानी इन्हीं दो बाप-बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। इन दोनों के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश करता है धीरू (जिमित त्रिवेदी)।

'102 नॉट आउट' का रिव्यू :

ये फिल्म एक गुजराती प्ले पर बेस्ड है, जो बताती है कि एज सिर्फ एक नंबर है। इंसान उम्र से नहीं बल्कि अपनी सोच से बूढ़ा होता है, निर्देशक उमेश शुक्ला ने बड़ी ही होशियारी से फिल्म के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है। बाप और बेटे के बीच मजेदार रस्साकशी होती है, जिसका ताना-बाना सौम्या जोशी ने बुना है। सौम्य जोशी आमिर खान स्टारर 'पीके', '3 इडियट्स' और संजय दत्त की बायोपिक लिखने वाले अभिजात जोशी के भाई हैं। कहानी सेंसेटिव और दिल को छूने वाली है। बूढ़ापे के डर को कैसे भगाया जाता है, इसमें यह भी बताया गया है।


निर्देशक शुक्ला ने फिल्म के लिए मुंबई सिटी में एक आकर्षक घर का सेट तैयार किया था। स्टोरी लाइन के हिसाब से फिल्म की लंबाई 101 मिनट है फिल्म शुरू होने के कुछ समय बाद पता चल जाता है कि लीड कैरेक्टर का रोल क्या है। डायलॉग्स फनी है। गुदगुदाती तो है ही यह फिल्म, तो कहीं आंखों से आंसू भी बरस जाते हैं।


अमिताभ बच्चन ने अपने किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया है। वहीं, ऋषि कपूर ने भी अपनी अदाकारी से दिल जीता है। दो दिग्गज आमने सामने हों तो जाहिर है... जो होगा, उम्मीद से बढ़कर ही होगा। ऋषि, बेटे के रोल में ज्यादा जमे हैं। धीरू के रोल में जिमित त्रिवेदी ने भी अच्छा काम किया है। वे बाप-बेटे के बीच कड़ी बने हैं। हालांकि फिल्म का क्लाइमेक्स फिल्म के नेचर से मैच नहीं करता है।

म्यूजिक स्लो और मेलोडियस है, लेकिन फिल्म के फ्लो से मैच नहीं करता है। सोनू निगम का गाना 'कुल्फी..' अच्छा है। कुछ ट्रैक जैसे 'वक्त ने किया क्या..' और 'जिंदगी मेरे घर आना..' भी ठीक हैं। फिल्म को आप इसलिए देख सकते हैं क्योंकि इसमें एक मैसेज है। वो यह कि जिंदगी जिंदादिली का नाम है। फिल्म यह भी बताती है कि जिंदगी में किसी के होने या ना होने से आप अपनी खुशियों से समझौता ना करें। ...लेकिन हां, फिल्म से बहुत ज्यादा एंटरटेनमेंट की उम्मीद ना कीजिएगा।

फिल्म '102 नॉट आउट' में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर। फिल्म '102 नॉट आउट' में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर।