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'हम जब ना होंगे तो रो रो के दुनिया ढूंढेगी मेरे निशां'... महाकवि गोपालदास नीरज के 11 सुपरहिट गाने

महाकवि और पद्मभूषण से सम्मानित गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे।

Dainik Bhaskar

Jul 20, 2018, 07:52 PM IST
1971 में आई फिल्म 'गैम्बलर' का मशहूर गीत 1971 में आई फिल्म 'गैम्बलर' का मशहूर गीत

नई दिल्ली. महाकवि और पद्मभूषण से सम्मानित गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया था। परिजनों ने बताया कि उन्हें बार-बार सीने में संक्रमण की शिकायत हो रही थी। नीरज सोमवार को अपनी बेटी से मिलने आगरा पहुंचे थे। अगले ही दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई।

4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरवली गांव में जन्मे गोपालदास नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला। कवि सम्मेलनों में अपार लोकप्रियता के चलते नीरज को मुंबई से गीतकार के रूप में नई उमर की नई फसल के गीत लिखने का निमन्त्रण मिला जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

पहली ही फ़िल्म 'नई उमर की नई फसल' में उनके लिखा और मोहम्मद रफी का गाया गीत 'कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे' और मुकेश का गया 'देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जायेगा' बेहद लोकप्रिय हुए। फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला 'मेरा नाम जोकर', 'शर्मीली' और 'प्रेम पुजारी' जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में कई वर्षों तक जारी रहा। मायानगरी मुंबई की ज़िन्दगी से भी उनका जी बहुत जल्द उचट गया और वे फिल्म नगरी को अलविदा कहकर फिर उत्तर प्रदेश वापस लौट आये और फिर अपनी माटी के होकर रह गए।

फिल्म फेयर पुरस्कार: नीरज जी को फ़िल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये सत्तर के दशक में लगातार तीन बार यह पुरस्कार दिया गया। उनके द्वारा लिखे गये पुरुस्कृत गीत हैं-

1970: काल का पहिया घूमे रे भइया! (फिल्म: चन्दा और बिजली)

1971: बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ (फिल्म: पहचान)
1972: ए भाई! ज़रा देख के चलो (फिल्म: मेरा नाम जोकर)

1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत 1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत

फूलो के रंग से, दिल की कलम से तुझको लिखी रोज पाती. .
कैसे बताऊँ किस-किस तरह से पल-पल मुझे तू सताती. .

तेरे ही सपने ले कर के सोया. . तेरी ही यादो मे जागा. 
तेरे खयालो मे उलझा रहा यूं जैसे कि माला मे धागा. .

बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार. .
लेना होगा, जनम हमे कई-कई बार. .

इतना मदिर इतना मधुर तेरा-मेरा प्यार. .
लेना होगा जनम हमे कई-कई बार. .

साँसो की सरगम. . धड़कन की वीणा. . सपनों की गीतांजली तुम
मन की गली मे महके जो हरदम ऐसी जूही की कली तुम. .
छोटा सफर हो . . लम्बा सफर हो सूनी डगर हो या मेला. .
याद तू आये मन हो जाये भीड़ के बीच अकेला. .

बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार. .

पूरब हो. . पश्चिम उत्तर हो दक्खिन तू हर जगह मुस्कुराये. . 
जितना ही जाऊँ मैं दूर तुझसे 
उतनी ही तू पास आये. .
आंधी ने रोका पानी ने टोका दुनिया ने हँसकर पुकारा
तस्वीर तेरी लेकिन लिये मैं कर आया सबसे किनारा. . 

हाँ बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार 
लेना होगा जनम हमे कई-कई बार. .

1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत 1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत

शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार
हाँ...
होगा यूँ नशा जो तैयार, वो प्यार है

शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब, 
होगा यूँ नशा जो तैयार, वो प्यार है
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब

हँसता हुआ बचपन वो, बहका हुआ मौसम है
छेड़ो तो इक शोला है, छूलो तो बस शबनम है
हँसता हुआ बचपन वो, बहका हुआ मौसम है
छेड़ो तो इक शोला है, छूलो तो बस शबनम है
गाओं में, मेले में, राह में, अकेले में
आता जो याद बार बार वो, प्यार है
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
अरे, होगा यूँ नशा जो तैयार, वो प्यार है
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 


रंग में पिघले सोना, अंग से यूँ रस झलके
जैसे बजे धुन कोई, रात में हलके हलके
रंग में पिघले सोना, अंग से यूँ रस झलके
जैसे बजे धुन कोई, रात में हल्के हल्के
धूप में, छाओं में, झूमती हवाओं में
हर दम करे जो इन्तज़ार वो, प्यार है
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
ओ... होगा यूँ नशा जो तैयार
वो प्यार है

याद अगर वो आये
याद अगर वो आये, कैसे कटे तनहाई 
सूने शहर में जैसे, बजने लगे शहनाई 
याद अगर वो आये, कैसे कटे तनहाई 
सूने शहर में जैसे, बजने लगे शहनाई 
आना हो, जाना हो, कैसा भी ज़माना हो
उतरे कभी ना जो खुमार वो, प्यार है

शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब
अरे, होगा यूँ नशा जो तैयार
वो प्यार है

1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत 1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत

मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया 
बता दे मैं क्या करूँ 
मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया 

सब के आंगन दिया जले रे, मोरे आंगन जिया 
हवा लागे शूल जैसी, ताना मारे चुनरिया 
कैसे कहूँ मैं मन की बात, बैरन बन गयीं निंदिया 
बता दे मैं क्या करूँ 
मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया 

टूट गये रे सपने सारे, छूट गयी रे आशा 
नैन बहे रे गंगा मोरे, फिर भी मन है प्यासा 
आई है आँसू की बारात, बैरन बन गयी निंदिया 
बता दे मैं क्या करूँ 
मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया

1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत 1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत


खिलते हैं गुल यहाँ, खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ, मिलके बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ...

कल रहे ना रहे, मौसम ये प्यार का 
कल रुके न रुके, डोला बहार का 
चार पल मिले जो आज, प्यार में गुज़ार दे
खिलते हैं गुल यहाँ...

झीलों के होंठों पर, मेघों का राग है
फूलों के सीने में, ठंडी ठंडी आग है
दिल के आइने में तू, ये समा उतार दे
खिलते हैं गुल यहाँ...

प्यासा है दिल सनम, प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी दबी, कोई मीठी बात है
इन लम्हों पे आज तू, हर खुशी निसार दे
खिलते हैं गुल यहाँ ...

1970 में आई फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का मशहूर गीत 1970 में आई फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का मशहूर गीत
ऐ भाई! जरा देख के चलो, आगे ही नहीं पीछे भी
 दायें ही नहीं बायें भी, ऊपर ही नहीं नीचे भी
ऐ भाई! 
 
तू जहाँ आया है वो तेरा- घर नहीं, गाँव नहीं
गली नहीं, कूचा नहीं, रस्ता नहीं, बस्ती नहीं
 
दुनिया है, और प्यारे, दुनिया यह एक सरकस है
और इस सरकस में- बड़े को भी, चोटे को भी
खरे को भी, खोटे को भी, मोटे को भी, पतले को भी
नीचे से ऊपर को, ऊपर से नीचे को 
बराबर आना-जाना पड़ता है 
 
और रिंग मास्टर के कोड़े पर- कोड़ा जो भूख है
 कोड़ा जो पैसा है, कोड़ा जो क़िस्मत है
 तरह-तरह नाच कर दिखाना यहाँ पड़ता है
 बार-बार रोना और गाना यहाँ पड़ता है
 हीरो से जोकर बन जाना पड़ता है
 
गिरने से डरता है क्यों, मरने से डरता है क्यों
ठोकर तू जब न खाएगा, पास किसी ग़म को न जब तक बुलाएगा
ज़िंदगी है चीज़ क्या नहीं जान पायेगा
रोता हुआ आया है चला जाएगा
कैसा है करिश्मा, कैसा खिलवाड़ है
जानवर आदमी से ज़्यादा वफ़ादार है
खाता है कोड़ा भी रहता है भूखा भी
फिर भी वो मालिक पर करता नहीं वार है
 
और इन्साण यह- माल जिस का खाता है
प्यार जिस से पाता है, गीत जिस के गाता है
उसी के ही सीने में भोकता कटार है
 
हाँ बाबू, यह सरकस है शो तीन घंटे का
पहला घंटा बचपन है, दूसरा जवानी है
तीसरा बुढ़ापा है 
 
और उसके बाद- माँ नहीं, बाप नहीं
बेटा नहीं, बेटी नहीं, तू नहीं,
मैं नहीं, कुछ भी नहीं रहता है
रहता है जो कुछ वो- ख़ाली-ख़ाली कुर्सियाँ हैं
ख़ाली-ख़ाली ताम्बू है, ख़ाली-ख़ाली घेरा है
बिना चिड़िया का बसेरा है, न तेरा है, न मेरा है
1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत 1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत

लिखे जो ख़त तुझे
वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के
नज़ारे बन गए

सवेरा जब हुआ
तो फूल बन गए
जो रात आई तो
सितारे बन गए

कोई नगमा कहीं गूँजा, कहा दिल ने के तू आई
कहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाई
कोई ख़ुशबू कहीं बिख़री, लगा ये ज़ुल्फ़ लहराई

फ़िज़ा रंगीं अदा रंगीं, ये इठलाना ये शरमाना
ये अंगड़ाई ये तनहाई, ये तरसा कर चले जाना
बना दे ना कहीं मुझको, जवां जादू ये दीवाना

जहाँ तू है वहाँ मैं हूँ, मेरे दिल की तू धड़कन है
मुसाफ़िर मैं तू मंज़िल है, मैं प्यासा हूँ तू सावन है
मेरी दुनिया ये नज़रें हैं, मेरी जन्नत ये दामन है

1966 में आई फिल्म 'नई उमर की नई फसल' का मशहूर गीत 1966 में आई फिल्म 'नई उमर की नई फसल' का मशहूर गीत

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई
पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई
पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई
चाह तो निकल सकी न पर उमर निकल गई

गीत अश्क बन गए छंद हो दफन गए
साथ के सभी दिऐ धुआँ पहन पहन गए
और हम झुके-झुके मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा
क्या जमाल था कि देख आइना मचल उठा
इस तरफ़ जमीन और आसमाँ उधर उठा
थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा

एक दिन मगर यहाँ ऐसी कुछ हवा चली
लुट गई कली-कली कि घुट गई गली-गली
और हम लुटे-लुटे वक्त से पिटे-पिटे
साँस की शराब का खुमार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ
होठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ

हो सका न कुछ मगर शाम बन गई सहर
वह उठी लहर कि ढह गये किले बिखर-बिखर
और हम डरे-डरे नीर नैन में भरे
ओढ़कर कफ़न पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

माँग भर चली कि एक जब नई-नई किरन
ढोलकें धुमुक उठीं ठुमक उठे चरन-चरन
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन चली दुल्हन
गाँव सब उमड़ पड़ा बहक उठे नयन-नयन

पर तभी ज़हर भरी गाज़ एक वह गिरी
पुँछ गया सिंदूर तार-तार हुई चूनरी
और हम अजान से दूर के मकान से
पालकी लिये हुए कहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत 1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत

आज मदहोश हुआ जाए रे...
आज मदहोश हुआ जाए रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन


बिना ही बात मुस्कुराये रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन

ओ री कली, सजा तू डोली
ओ री लहर, पहना तू पायल
ओ री नदी, दिखा तू दर्पण
ओ री किरण, ओढा तू आँचल
इक जोगन है बनी आज दुल्हन
आओ उड़ जाए कही बनके पवन
आज मदहोश हुआ जाए रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन
शरारत करने को ललचाये रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन

ए, यहाँ हमे ज़माना देखे,
आओ चलो कही छूप जाए
भीगा भीगा नशीला दिन है,
कैसे कहो प्यासे रह पाए
तू मेरी मैं हूँ तेरा, तेरी कसम
मैं तेरी तू हैं मेरा, मेरी कसम
आज मदहोश हुआ जाए रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन
शरारत करने को ललचाये रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन

रोम रोम बहे सुर धारा,
अंग अंग बजे शहनाई
जीवन सारा मिला एक पल में,
जाने कैसी घड़ी ये आई
छू लिया आज मैंने सारा गगन
नाचे मन आज मोरा छूम छनन
आज मदहोश हुआ जाए रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन
शरारत करने को ललचाये रे,
मेरा मन, मेरा मन, मेरा मन

1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत 1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत

रंगीला रे, तेरे रँग में
यूँ रँगा है मेरा मन
छलिया रे, न बुझे है
किसी जल से यह जलन - २
ओ रंगीला रे

पलकों के झूले से सपनों की डोरी
प्यार ने बाँधी जो तूने वो तोडी
खेल यह कैसा रे, कैसा रे साथी
दिया तो झूमें हैं रोये हैं बाकी
कहीं भी जाये रे, रोये या गाये रे
चैन न पाये रे हिया
वाह रे प्यार वाह रे वाह
रंगीला रे ...

दुःख मेरा दुल्हा है बिरहा है डोली
आँसू की सड़ी है आहों की चोली
आग मैं पियूँ रे जैसे हो पानी
नारी दिवानी हूँ पीड़ा की रानी
मनवा यूँ जले है, जग सारा छले है
साँस क्यों चले है पिया
वाह रे प्यार वाह रे वाह
रँगीला रे ...

रंगीला ओ रंगीला

मैंने तो सींची रे तेरी ये राहें - २
बाहों में तेरी क्यों औरों की बाहें
कैसे तू भूला वो फूलों सी रातें
समझी जब आँखों ने आँखों की बातें
आँव भर झूठा रे, सपना हर टूटा रे
फिर भी तू रूठा रे पिया
वाह रे प्यार वाह रे वाह

रंगीला रे, रंगीला रे

1970 में आई फिल्म 'पहचान' का मशहूर गीत 1970 में आई फिल्म 'पहचान' का मशहूर गीत

बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ

एक खिलौना बन गया दुनिया के मेले में
कोई खेले भीड़ में कोई अकेले में
मुस्कुरा कर भेंट हर स्वीकार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

मैं बसाना चाहता हूँ स्वर्ग धरती पर
आदमी जिस में रहे बस आदमी बनकर
उस नगर की हर गली तैय्यार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी
बेच कर खुशियाँ खरीदूँ आँख का पानी
हाथ खाली हैं मगर व्यापार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

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1971 में आई फिल्म 'गैम्बलर' का मशहूर गीत1971 में आई फिल्म 'गैम्बलर' का मशहूर गीत
1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत
1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत
1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत
1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत
1970 में आई फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का मशहूर गीत1970 में आई फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का मशहूर गीत
1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत1968 में आई फिल्म 'कन्यादान' का मशहूर गीत
1966 में आई फिल्म 'नई उमर की नई फसल' का मशहूर गीत1966 में आई फिल्म 'नई उमर की नई फसल' का मशहूर गीत
1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' का मशहूर गीत
1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत1970 में आई फिल्म 'प्रेम पुजारी' का मशहूर गीत
1970 में आई फिल्म 'पहचान' का मशहूर गीत1970 में आई फिल्म 'पहचान' का मशहूर गीत
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