इंटरव्यू / अमरीश पुरी के पोते वर्धन ने बताया- दादू से सीखा कि बड़ा एक्टर बनना है तो किसी की कॉपी मत करो



interview with vardhan puri grandson of amrish puri.
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Dainik Bhaskar

Aug 20, 2019, 03:54 PM IST

उमेश कुमार उपाध्याय. पांच साल की उम्र में अमरीश पुरी ने पोते वर्धन पुरी को पंडित सत्यजीत दुबे से इंट्रोड्यूज कराया था। उनके साथ जुड़कर वह छोटे-छोटे किरदार अदा करने से लेकर बैक स्टेज तक संभालने लगे। जल्द ही फिल्म 'पागल' से डेब्यू करने जा रहे वर्धन पुरी ने अपने दादाजी  अमरीश पुरी के बारे में कुछ बातें दैनिक भास्कर से शेयर कीं। 

दादा ने एक्टिंग में कॅरिअर बनाने को लेकर कोई टिप्स दी थी?

  1. जी हां, वे अक्सर बोलते थे कि जिंदगी में अगर बड़ा इंसान या बड़ा एक्टर बनना है, तो किसी की नकल मत उतारना। वे कहते थे, हमारी कंट्री में लोग तैयारी पर जोर नहीं देते, जो बहुत जरूरी है। अगर तैयारी करके सेट पर जाओगे, तब अच्छे से एक्ट कर सकते हो। वे बहुत परफेक्शनिस्ट थे, हमें भी बहुत डिसिप्लिन में रखते थे। वे डायरेक्टर के विजन को समझकर काम करते थे और उनसे कम ही सवाल करते थे।
     

  2. उनकी सबसे बड़ी सीख क्या रही?

    उनसे सबसे बड़ी बात जो सीखा हूं, वह गुरू-शिष्य का रिश्ता है। दादू एक प्वाइंट पर सुपर स्टार बन गए, लेकिन सत्यजीत दुबे जी से ऐसे मिलते थे कि जैसे 5-10 साल का स्टूडेंट मिल रहा हो। उनकी आंखों में इतना आदर होता था कि अगर दुबे साहब कुछ कह देते थे, तब दादू सिर्फ सिर हिला देते थे। उनका कहना था कि अगर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में हो, तब पार्टी-फंक्शन छोड़कर, अपने काम पर ध्यान दो।

  3. आपके दादू का घर पर व्यवहार कैसा था?

    बड़े हम्बल थे। घर पर होते थे, तब कोई बोल ही नहीं सकता था कि इतने बड़े कलाकार हैं। बड़े स्ट्रेट फॉरवर्ड थे। फैमिली मेंबर ही नहीं, दोस्तों के साथ भी बखूबी रिश्ता निभाते थे। अपने दोस्तों को सामने से फोन करके संडे को चाय-नाश्ते पर बुलाकर मुलाकात करते थे। सक्सेसफुल होने पर कैसे झुकना चाहिए, उनसे यह कमाल की बात सीखी है।

  4. एक्टिंग में उनका स्ट्रॉन्ग प्वॉइंट क्या था?

    उनका ऑर्ब्जवेशन पॉवर बहुत स्ट्रांग था। अगर उन्हें पुलिस कमिश्नर का रोल प्ले करना होता था, तब पुलिस कमिश्नर से टाइम लेकर उनसे मिलते थे। उनके यूनिफॉर्म, हेयर स्टाइल, उठने-बैठने, चलने-फिरने के तौर-तरीके, स्टाफ से बात करने के अलावा फैमिली का फोन कैसे उठाते और बात करते हैं...उनकी छोटी-सी-छोटी बात को ऑब्जर्व करते थे। घर पर आकर वही रोब जमाते थे। फिर डायरेक्टर और राइटर के साथ मीटिंग करके और उनकी हू-ब-हू नकल उतारते थे। क्रिएटिव टीम के साथ मिलकर मूंछ की डिजाइन, हाथ की अंगूठियां, कॉस्ट्यूम का मटैरियल वगैरह सिलेक्ट करते थे। दादू से सीखा कि कलाकार बनना है, तो कमाल का ऑब्जर्वर बनना होगा।

  5. कभी उनके साथ सेट पर गए थे?

    वे चाहते थे कि जितना हो सके, मैं सेट से दूर रहूं। क्योंकि एक-दो बार सेट पर गया, तब ऐसा ट्रीटमेंट मिला कि, मानो कहीं का राजा हूं। यह देखकर दादू डर गए कि लड़का बहुत छोटा है, इसे लगेगा यह कोई स्पेशल बच्चा है। बच्चों को जितना हो सके, उतना नॉर्मल जीवन बढ़िया होता है। एक बार दादू, सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा स्टारर चोरी-चोरी चुपके-चुपके की शूटिंग कर रहे थे, तब दादी भी दादू के साथ थीं। सेट पर उनसे मिलने मैं बहन और बुआ के बच्चों के साथ गया। जब पहुंचे, तब इतना ग्रैंड वेलकम दिया गया कि हमारे साथ पुलिस, बॉडीगार्ड, तीन-चार स्पॉट बॉय आदि आ गए। हमें पांच-पांच मिनट में नाश्ता दिया जा रहा था। हम बच्चों को खूब मजा आ रहा था। लेकिन दादू ने देखा, तो चलकर आए और प्रोड्यूसर से बोले कि यह क्या चल रहा है? ये बच्चे हैं, इन्हें नॉर्मल जिंदगी जीने दीजिए। अगर अभी से इन्हें लगने लगेगा कि ये महान हैं, तब जीवन में कुछ भी नहीं करेंगे। हम छोटे थे, पर हम भी समझ गए।

  6. दादू खाने-पीने के कितने शौकीन थे?

    वे बाहर का खाना नहीं खाते थे। नॉनवेज कम ही पसंद करते थे। उनकी फेवरिट डिश माछोले की दाल, रोटी और सब्जी थी। यह दे दो, बहुत खुश हो जाते थे। सलमान खान तो उनके खाने का बहुत मजाक उड़ाते थे। वे कहते थे- पंडित जी! आप इतने बड़े आदमी, इतना सिंपल खाना खा रहे हो! मेरे घर से इतनी बिरयानी आई है, इसे खाइए। तब वे जवाब में कहते थे कि नहीं-नहीं, मुझे सेहत पर ध्यान देना है।

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