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कैंसर से लड़ते इरफान ने लिखा इमोशनल लेटर, कहा- अब जिंदगी को करीब से महसूस कर पा रहा हूं

इरफान ने लिखा, जब दर्द बढ़ता है तो कोई मोटिवेशन, सहानुभूति काम नहीं आती।

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2018, 10:38 AM IST
Irrfan Khan pens down an emotional letter on his battle with Neuroendocrine cancer

बॉलीवुड डेस्क. कैंसर से जूझ रहे अभिनेता इरफान खान ने एक बार फिर से अपने संघर्ष की कहानी फैन्स के साथ शेयर की है। लंदन में इलाज करवा रहे इरफान ने इस बार एक इमोशनल चिट्‌ठी लिखकर दर्द बयां किया है। चिट्‌ठी में इरफान ने लिखा है- मेरे बारे में जानकर सभी मेरे लिए दुआ कर रहे हैं और उन सबकी दुआएं एक ताकत बनकर मेरी स्पाइनल कॉर्ड के जरिए मस्तिष्क तक जा रही है। मैं अब जिंदगी को और करीब से महसूस कर रहा हूं। इरफान ने इसी साल मार्च में बताया था कि वे न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से पीड़ित हैं।

मेरे कुछ सपने थे, तभी किसी ने मुझे जगा दिया

- इरफान ने इस चिट्‌ठी में लिखा 'कुछ महीनों पहले ही मुझे पता चला कि मुझे न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर नाम की बीमारी है। ये शब्द मेरे लिए नया था और मैंने इसके बारे में पहली बार सुना था। जब मैंने इसके बारे में इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है।'
- 'अभी तक मैं तेज रफ्तार वाली ट्रेन में सफर कर रहा था। मेरे कुछ सपने थे, कुछ प्लान थे, इच्छाएं थीं, लक्ष्य थे। तभी किसी ने मुझे हिलाकर जगा दिया। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो टिकट चेक था। उसने कहा आप नीचे उतर जाइए, आपका स्टेशन आ गया है। मैं कंफ्यूज था। मैंने कहा- नहीं, अभी मेरा स्टेशन नहीं आया है। तो उसने कहा- नहीं आपको अगले किसी भी स्टॉप पर उतरना ही होगा।'

मुझे किसी भी हालत में ठीक होना है

- इरफान नेआगे लिखा 'मुझे जब इस बीमारी के बारे में पता चला तो मैं पूरी तरह से हिल गया। मैं बस यही चाहता था कि मुझे किसी गंभीर परेशानी से गुजरना न पड़े। इस डर और दर्द के बीच मैंने अपने बेटे से कहा कि मैं किसी भी हालत में ठीक होना चाहता हूं। मुझे अपने पैरों पर फिर से खड़े होना है। मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए।'
- उन्होंने लिखा 'इन सब बातों के बीच जब दर्द बढ़ता है तो कुछ काम नहीं आता। न ही कोई मोटिवेशन काम आता है। सब बेकार हो जाता है। बस दर्द ही होता और वो दर्द ऐसा होता है कि वो थोड़ी ही देर में आपको खुदा से बड़ा लगने लगता है।'


एक सड़क थी, जो मुझे जिंदगी और मौत के बीच का रास्ता लगी

- उन्होंने लिखा 'जब मैं पहली बार दर्द के साथ अस्पताल पहुंचा तो मुझे इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि मेरे बचपन का सपना लॉर्ड्स स्टेडियम मेरे अस्पताल के पास ही बना है। जब मैं अस्पताल की बालकनी पर खड़ा होता था तो एक तरफ स्टेडियम में लगी विवियन रिचर्ड्स की मुस्कुराती फोटो देखता।'
- 'एक तरफ मेरा अस्पताल था और दूसरी तरफ स्टेडियम। इन दोनों के बीच एक सड़क थी, जो मुझे जिंदगी और मौत के बीच का रास्ता जैसा लग रही थी।'
- उन्होंने कहा 'मेरे कमरे के पास ही कोमा वार्ड बना है और ये सारी बातें मुझे अहसास करा रहीं थीं कि सिर्फ अनिश्चितता ही निश्चित है। मुझे पहली बार ये अहसास हुआ कि आजादी का असली मतलब क्या है?'
- 'इस सफर में सभी लोग मेरे ठीक होने की दुआ कर रहे हैं। जिन्हें मैं जानता हूं और जिन्हें मैं नहीं जानता, वे भी सब मेरे लिए दुआ कर रहे हैं। सबकी दुआएं एक ताकत बनकर मेरी स्पाइनल कॉड के जरिए सिर तक जा रही हैं। मैं जिंदगी को अब करीब से महसूस कर पा रहा हूं।'

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Irrfan Khan pens down an emotional letter on his battle with Neuroendocrine cancer
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