बुक लॉन्च / इवेंट में सवाल का जवाब देते हुए जॉन ने बताया, केरल अबतक मोदीमय क्यों नहीं हुआ?

किताब लॉन्च के मौके पर जॉन अब्राहम। किताब लॉन्च के मौके पर जॉन अब्राहम।
'द गॉड हू लव्ड मोटरबाइक्स इन मुंबई' के लेखक मुरली के. मेनन (बाएं) के साथ जॉन अब्राहम। 'द गॉड हू लव्ड मोटरबाइक्स इन मुंबई' के लेखक मुरली के. मेनन (बाएं) के साथ जॉन अब्राहम।
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किताब लॉन्च के मौके पर जॉन अब्राहम।किताब लॉन्च के मौके पर जॉन अब्राहम।
'द गॉड हू लव्ड मोटरबाइक्स इन मुंबई' के लेखक मुरली के. मेनन (बाएं) के साथ जॉन अब्राहम।'द गॉड हू लव्ड मोटरबाइक्स इन मुंबई' के लेखक मुरली के. मेनन (बाएं) के साथ जॉन अब्राहम।

दैनिक भास्कर

Sep 27, 2019, 12:48 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. देश से जुड़े संजीदा विषयों को लेकर कई फिल्में बना चुके बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम गुरुवार को मुंबई में एक बुक लॉन्च इवेंट में थे। जहां उनसे पूछा गया कि केरल अबतक मोदीफाइड (मोदीमय) क्यों नहीं हुआ है। इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केरल में सभी धर्मों के लोग बेहद शांति के साथ एक-दूसरे के साथ रहते हैं और यही केरल की खूबसूरती है जो उसे सबसे अलग बनाती है। देशभक्ति जॉन का पसंदीदा टॉपिक है और इसे लेकर वे अबतक मद्रास कैफे, परमाणु, सत्यमेव जयते और बाटला हाउस जैसी फिल्में बना चुके हैं।

 

जॉन गुरुवार को लेखक मुरली के. मेनन की किताब 'द गॉड हू लव्ड मोटरबाइक्स इन मुंबई' के लॉन्चिंग इवेंट में पहुंचे थे। जहां एक जर्नलिस्ट ने उनसे पूछा, 'आपको क्या लगता है केरल अबतक मोदीफाइड क्यों नहीं हुआ है, और ऐसा क्या है जो केरल के लोगों को बाकियों से अलग करता है?' जॉन से ये सवाल इसलिए किया गया था क्योंकि केरल उनका गृहराज्य है और वहां से भाजपा का कोई सांसद नहीं है। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में केरल की 20 लोकसभा सीटों में से 19 सीटें कांग्रेसनीत गठबंधन यूडीएफ और 1 सीट अन्य गठबंधन एलडीएफ ने जीती थी।

 

जवाब में जॉन ने बताई केरल की खूबसूरती

 

सवाल का जवाब देते हुए जॉन ने कहा, 'केरल की सुंदरता ये है कि आप वहां 10 मीटर के दायरे में बिना किसी समस्या के मंदिर, मस्जिद और चर्च को एक साथ देख सकते हैं। वहां कोई समस्या नहीं है। जबकि पूरी दुनिया में ध्रुवीकरण हो रहा है, केरल एक ऐसी जगह का उदाहरण है जहां अलग-अलग धर्म और समुदाय एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्वक रह सकते हैं।' 

 

शेयर किया तीन साल पुराना किस्सा

 

आगे उन्होंने कहा, 'मुझे याद है जब फिदेल कास्त्रो (क्यूबा के कम्युनिस्ट नेता) का निधन हुआ था, उस वक्त मैं केरल में था और उनकी मृत्यु पर शोक प्रकट करने के लिए सभी जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगाने वाला वो एकमात्र राज्य था। तो एक तरह से केरल सचमुच कम्युनिस्ट है। मेरे पिता ने पढ़ने के लिए मुझे बहुत सा मार्क्सवाद से जुड़ा साहित्य दिया था। कई सारे मल्लुज (केरल के रहवासी) का एक कम्युनिस्ट पक्ष भी होता है। हम सभी एकसमान जीवन और धन के समान वितरण में विश्वास रखते हैं और केरल इसका चमकता हुआ उदाहरण है।'

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