कंफेशन / करन ने माना 'कुछ कुछ होता है' पॉलिटिकली सबसे गलत फिल्म थी, शबाना आजमी ने उठाया था सवाल



करन जौहर। दाईं ओर 'कुछ कुछ होता है' के पोस्टर में रानी मुखर्जी, शाहरुख खान और काजोल। करन जौहर। दाईं ओर 'कुछ कुछ होता है' के पोस्टर में रानी मुखर्जी, शाहरुख खान और काजोल।
शाहरुख खान और काजोल 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में। शाहरुख खान और काजोल 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।
काजोल और शाहरुख खान 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में। काजोल और शाहरुख खान 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।
शाहरुख खान और रानी मुखर्जी 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में। शाहरुख खान और रानी मुखर्जी 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।
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करन जौहर। दाईं ओर 'कुछ कुछ होता है' के पोस्टर में रानी मुखर्जी, शाहरुख खान और काजोल।करन जौहर। दाईं ओर 'कुछ कुछ होता है' के पोस्टर में रानी मुखर्जी, शाहरुख खान और काजोल।
शाहरुख खान और काजोल 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।शाहरुख खान और काजोल 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।
काजोल और शाहरुख खान 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।काजोल और शाहरुख खान 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।
शाहरुख खान और रानी मुखर्जी 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।शाहरुख खान और रानी मुखर्जी 'कुछ कुछ होता है' के एक सीन में।

Dainik Bhaskar

Aug 20, 2019, 09:09 AM IST

बॉलीवुड डेस्क. स्पष्टवादिता के लिए पहचाने जाने वाले करन जौहर उन फिल्म निर्माताओं में से एक हैं, जिन्हें अपनी गलती स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होती।  मेलबर्न के भारतीय फिल्म महोत्सव में करन ने बतौर डायरेक्टर अपनी डेब्यू फिल्म 'कुछ कुछ होता है' (केकेएचएच) के बारे में माना कि उन्होंने इस बात का ध्यान नहीं रखा था कि फिल्म में महिलाओं का चित्रण नैतिक रूप से सही है कि नहीं।

पॉलिटिकली गलत थी 'कुछ कुछ...': करन

  1. बकौल करन जौहर, "केकेएचएच राजनीतिक रूप से सबसे गलत फिल्म थी। मुझे याद है कि शबाना आजमी ने यूके में कहीं फिल्म देखी और फिर मुझे फोन किया। वो हक्की-बक्की थीं। उन्होंने कहा- 'तुमने ये क्या दिखाया है? उस लड़की के छोटे बाल हैं, इसलिए वह आकर्षक नहीं है और जब  उसके बाल लंबे हैं तो वो सुंदर है।' मैंने कहा कि मुझे खेद है तो उन्होंने कहा- 'क्या! तुम्हें बस इतना ही कहना है।' मैंने कहा- हां, क्योंकि मुझे पता है कि आप जो कह रही हैं, वह सही है।"

  2. गलती का अहसास बाद में हुआ

    करन को अपनी गलती का असली अहसास बहुत बाद में हुआ और तब से अपनी फिल्मों के लिए उन्होंने काफी मजबूत पात्र लिखे हैं, जिनमें भावनात्मक गहराई होती है, सहानुभूति होती है और जिनका चित्रण कोई गलत संदेश नहीं देता। 

  3. जौहर पर मुख्यधारा का लेबल लग चुका है। एक निर्माता के रूप में एक लंबा सफर तय करते हुए उनके प्रदर्शनों की सूची में अलग-अलग तरह का सिनेमा जुड़ा है, जो वे बना रहे हैं।  पिछले साल की उनकी शॉर्ट फिल्म 'लस्ट स्टोरीज' से लेकर मेघना गुलजार की 'राज़ी' और उनकी आने वाली फिल्म 'गुड न्यूज' तक। 
     

  4. करन कहते हैं, ''जिस तरह की फिल्में हम बनाते हैं या प्रोड्यूस करते हैं, उसका क्रेडिट हमें बहुत कम मिलता है। हमें अभी भी मुख्य धारा के रूप में टैग किया जा रहा है जो कि सही नहीं है।" 

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