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जब अटलजी ने लता मंगेशकर के अस्पताल का उद्घाटन करने से कर दिया था इनकार

अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त को निधन हो गया।

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2018, 05:48 PM IST
Lata Mangeshkar on demise of Atal Bihari Vajpayee: I have lost my father all over again

बॉलीवुड डेस्क. 'वह मेरे पिता समान थे, मैं उन्हें दद्दा कहती थी और वो मुझे बेटी। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैंने फिर से अपने पिता को खो दिया है।' ये कहना है लता मंगेशकर का जो कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन पर दुखी हो गईं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अटलजी के साथ अपनी बॉन्डिंग पर बातचीत की।

वीर सावरकर से की तुलना: उन्होंने बताया, 'मैं जब भी उन्हें देखती तो उनके चेहरे का तेज देखने को मिलता था, उनमें गजब की बोलने की ताकत थी, साथ ही कला के प्रति उनका प्यार भी उन्हें मुझे अपने पिताजी (हृदयनाथ मंगेशकर) की याद दिलाता था। जब मैं बच्ची थी तो मेरे घर पर कई नेशनल लीडर्स आया करते थे। उनमें से एक वीर सावरकर भी थे। अटलजी मुझे वीर सावरकर की याद दिलाते थे। वह बहुत ही बेहतरीन इंसान थे। उनकी तारीफ करने में शब्द कम पड़ जाते हैं लेकिन अटलजी इतने अच्छे वक्ता थे कि उन्हें कभी शब्दों की कमी नहीं पड़ी।

लताजी ने आगे कहा-'अटलजी मेरे काफी करीब थे और मैं उनके करीब थी। जब मेरे परिवार ने मेरे नाम पर पुणे में एक अस्पताल खोला तो उसके उद्घाटन के लिए मैंने अटलजी को कहा।

वह मान तो गए लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि वह असमंजस में हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मेरे नाम पर अस्पताल खोलने का डिसीजन सही नहीं। उनका मानना था कि लता के नाम पर म्यूजिक अकादमी होनी चाहिए न कि कोई अस्पताल क्योंकि अस्पताल में लोग बीमारी लेकर आते हैं तो वह मेरी बेटी के नाम पर कैसे हो सकता है? उनके इस तर्क से मैं निशब्द रह गई।

देश अनाथ हो गया: उनके जैसा बोलने वाला नेता, इंडिया में शायद ही कोई दूसरा होगा। लताजी ने आगे कहा,देश ने एक भारत रत्न खो दिया। दद्दा दूरदर्शक थे। वह भविष्य देख सकते थे। वह जब बोलते थे तो देश सुनता था। उनके भाषण मेरे मोबाइल में आज भी हैं जिन्हें मैं घंटों सुन सकती हूं। उनके जाने से देश अनाथ हो गया।'

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