बर्थडे / लता दीदी के जन्मदिन पर बहन मीना, ऊषा और आशा ने बताए इमोशनल किस्से, बोलीं- वे हमारी मां जैसी हैं



मंगेशकर बहन-भाई: बाएं से आशा, ऊषा, हृदयनाथ, लता और मीना मंगेशकर। मंगेशकर बहन-भाई: बाएं से आशा, ऊषा, हृदयनाथ, लता और मीना मंगेशकर।
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मंगेशकर बहन-भाई: बाएं से आशा, ऊषा, हृदयनाथ, लता और मीना मंगेशकर।मंगेशकर बहन-भाई: बाएं से आशा, ऊषा, हृदयनाथ, लता और मीना मंगेशकर।

Dainik Bhaskar

Sep 28, 2019, 01:17 PM IST

बॉलीवुड डेस्क (उमेश कुमार उपाध्याय). स्वर कोकिला लता मंगेशकर 90 साल की हो गई हैं। 28 सितंबर 1929 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्मी लता पांच भाई-बहनों में (लता, मीना, आशा, ऊषा और हृदयनाथ) में सबसे बड़ी हैं। जब लता 12 साल की थीं, तब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। उसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके ही कंधों पर थी। दीदी के जन्मदिन पर उनकी बहनों मीना, उषा और आशा ने उनसे जुड़े इमोशनल किस्से दैनिक भास्कर के साथ शेयर किए। 

बहनों की नजर में लताजी

  1. मुसीबत में संभाला, पर जताया नहीं : मीना

    पिताजी हम भाई-बहनों को बहुत कम उम्र में छोड़कर चले गए। दीदी 12 साल की थी, मैं 10 साल की, मुझसे छोटी आशा, उषा फिर हृदयनाथ थे। दीदी के ऊपर पूरे घर का बोझ आ गया, तब दीदी ने मास्टर विनायकराव कर्नाटकी की कंपनी 'नवयुग' से जुड़कर काम किया। दीदी किस हालत में हमें लेकर आगे बढ़ीं, यह मां ही जानती थीं। बहुत मुसीबत हुई, पर हमें कभी पता नहीं चलने दिया और जताया भी नहीं।

     

    लता मंगेशकर और मीना मंगेशकर।

     

  2. दीदी ने कभी अपनी मर्जी नहीं थोपीं

    बचपन में दीदी बहुत ज्यादा चंचल थीं। हम लकड़ी की गुड़िया लाते और उसे कलर करते थे। सहगल साहब की पिक्चर 'देवदास' के कैरेक्टर पर नाटक खेलते। हमारा बचपन बहुत अच्छा बीता। दीदी हम लोगों के खिलाफ कभी नहीं गई। उन्होंने कभी मर्जी थोपकर नहीं कहा कि यह करो।

  3. बहुत दिलेर हैं दीदी

    मीना कहती हैं कि, एक रात दीदी को धमकी भरा फोन आया कि, तुम्हें देख लूंगा। दीदी ने यह बात किसी को नहीं बताई। उस जगह पर अकेली गईं। लेकिन कोई आया ही नहीं। यह फिल्म 'आवारा' के समय की बात है। उनको केक काटना, बर्थडे मनाना पसंद नहीं है। वे हम लोगों से कुछ लेती नहीं हैं, इसलिए मैंने  उनकी जिंदगी पर 'दीदी और मैं' नाम की किताब लिखी है।

  4. दीदी का बचपन में नाम हृदया था: आशा

    दीदी मुझसे 4 साल बड़ी हैं।दीदी मुझसे शुरू से बहुत प्यार करती हैं। जब मैं बड़ी हो रही थी तब उनको आई बोलती थी। उनके साथ-साथ रहती थी। बहनों में सबसे ज्यादा मुझे साथ रखती थीं। वे जब स्कूल गईं, तब उनका हाथ पकड़कर मैं भी स्कूल गई। हम चार-पांच दिन साथ साथ स्कूल गए। दीदी का बचपन में नाम हेमा नहीं हृदया था, भाई के जन्म पर बदलकर लता रख दिया गया ।

     

    आशा भोसले के साथ लता मंगेशकर।

     

  5. मेरी वजह से दीदी का स्कूल छूटा

    एक दिन मास्टर की नजर मुझ पर पड़ गई। वे बोले कि यह लड़की कौन है? दीदी ने बताया मेरी छोटी बहन है। तब मास्टर बोले- एक पैसे में तुम दोनों सीख रहे हो। इसे निकाल दो, जाओ घर पर छोड़ कर आओ। फिर तो दीदी घर आकर बोलीं- मैं बहन को घर पर ही पढ़ाऊंगी। इस तरह दीदी का स्कूल मेरी वजह से छूट गया।

  6. जब ऊषा ने तीन महीने सेवा की

    जब लता जी 32 साल की थी तब उनकी तबियत काफी खराब हो गई। बताया गया कि उन्हें किसी ने खाने में स्लो प्वॉइजन दे दिया था। इस घटना का ज़िक्र लता जी की बेहद करीबी  पदमा सचदेव ने अपनी किताब 'ऐसा कहां से लाऊं' में किया है। डॉक्टरी जांच के बाद इस बात का खुलासा  हुआ उनके खाने में जहरीली चीज मिलाई गई थी। अफवाह उड़ी कि लता दीदी फिरसे कभी गा नहीं पाएंगी। लेकिन इस दौरान ऊषा मंगेशकर ने उनका ध्यान रखा और हमेशा उनके लिए अपने हाथों से खाना बनाया।

  7. संगीत ही दीदी का जीवन: मयुरेश पई

    मयुरेश पई।

     

    16 साल से दीदी के साथ जुड़ा हूं। दीदी की सादगी, स्वभाव, ममता उनके गाने में दिखती है। कलाकार तो वे बड़ी हैं ही, उससे बड़ी इंसान हैं। वे मिलने वालों को कभी रोकतीं नहीं हैं। वे बोलती हैं- आ रहे हैं, तो आने दो। दीदी ने गाना कम किया है, पर बंद नहीं किया है। उनका जीवन ही संगीत है। अभी नॉन फिल्म गाने काफी गा रही हैं। मार्च में नरेंद्र मोदी की पसंदीदा कविता 'सौगंध मुझे इस मिट्‌टी की...' गाकर उन्हें समर्पित की थी। वे जल्दी उठ जाती हैं। पूजा-पाठ करती हैं। टीवी देखना पसंद है। सोशल साइट्स पर भी सक्रिय रहती हैं। सबके साथ में डायनिंग टेबल पर खाती हैं। दीदी के जैसा गाजर का हलवा कोई नहीं बना सकता। आम लोगों की तरह ही उनकी दिनचर्या है। उनका आधा दिन तो शॉपिंग में ही जाता है।

    मयुरेश पई, लताजी के साथ 16 वर्षों से जुड़े और उनकी म्यूजिक कंपनी 'एल.एम. म्यूजिक' के सीईओ

     

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