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लता दीदी के जन्मदिन पर बहन मीना, ऊषा और आशा ने बताए इमोशनल किस्से, बोलीं- वे हमारी मां जैसी हैं

10 महीने पहले
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मंगेशकर बहन-भाई: बाएं से आशा, ऊषा, हृदयनाथ, लता और मीना मंगेशकर।
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बॉलीवुड डेस्क (उमेश कुमार उपाध्याय). स्वर कोकिला लता मंगेशकर 90 साल की हो गई हैं। 28 सितंबर 1929 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्मी लता पांच भाई-बहनों में (लता, मीना, आशा, ऊषा और हृदयनाथ) में सबसे बड़ी हैं। जब लता 12 साल की थीं, तब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। उसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके ही कंधों पर थी। दीदी के जन्मदिन पर उनकी बहनों मीना, उषा और आशा ने उनसे जुड़े इमोशनल किस्से दैनिक भास्कर के साथ शेयर किए। 

1) बहनों की नजर में लताजी

पिताजी हम भाई-बहनों को बहुत कम उम्र में छोड़कर चले गए। दीदी 12 साल की थी, मैं 10 साल की, मुझसे छोटी आशा, उषा फिर हृदयनाथ थे। दीदी के ऊपर पूरे घर का बोझ आ गया, तब दीदी ने मास्टर विनायकराव कर्नाटकी की कंपनी 'नवयुग' से जुड़कर काम किया। दीदी किस हालत में हमें लेकर आगे बढ़ीं, यह मां ही जानती थीं। बहुत मुसीबत हुई, पर हमें कभी पता नहीं चलने दिया और जताया भी नहीं।    

बचपन में दीदी बहुत ज्यादा चंचल थीं। हम लकड़ी की गुड़िया लाते और उसे कलर करते थे। सहगल साहब की पिक्चर 'देवदास' के कैरेक्टर पर नाटक खेलते। हमारा बचपन बहुत अच्छा बीता। दीदी हम लोगों के खिलाफ कभी नहीं गई। उन्होंने कभी मर्जी थोपकर नहीं कहा कि यह करो।

मीना कहती हैं कि, एक रात दीदी को धमकी भरा फोन आया कि, तुम्हें देख लूंगा। दीदी ने यह बात किसी को नहीं बताई। उस जगह पर अकेली गईं। लेकिन कोई आया ही नहीं। यह फिल्म 'आवारा' के समय की बात है। उनको केक काटना, बर्थडे मनाना पसंद नहीं है। वे हम लोगों से कुछ लेती नहीं हैं, इसलिए मैंने  उनकी जिंदगी पर 'दीदी और मैं' नाम की किताब लिखी है।

दीदी मुझसे 4 साल बड़ी हैं।दीदी मुझसे शुरू से बहुत प्यार करती हैं। जब मैं बड़ी हो रही थी तब उनको आई बोलती थी। उनके साथ-साथ रहती थी। बहनों में सबसे ज्यादा मुझे साथ रखती थीं। वे जब स्कूल गईं, तब उनका हाथ पकड़कर मैं भी स्कूल गई। हम चार-पांच दिन साथ साथ स्कूल गए। दीदी का बचपन में नाम हेमा नहीं हृदया था, भाई के जन्म पर बदलकर लता रख दिया गया ।    

एक दिन मास्टर की नजर मुझ पर पड़ गई। वे बोले कि यह लड़की कौन है? दीदी ने बताया मेरी छोटी बहन है। तब मास्टर बोले- एक पैसे में तुम दोनों सीख रहे हो। इसे निकाल दो, जाओ घर पर छोड़ कर आओ। फिर तो दीदी घर आकर बोलीं- मैं बहन को घर पर ही पढ़ाऊंगी। इस तरह दीदी का स्कूल मेरी वजह से छूट गया।

जब लता जी 32 साल की थी तब उनकी तबियत काफी खराब हो गई। बताया गया कि उन्हें किसी ने खाने में स्लो प्वॉइजन दे दिया था। इस घटना का ज़िक्र लता जी की बेहद करीबी  पदमा सचदेव ने अपनी किताब 'ऐसा कहां से लाऊं' में किया है। डॉक्टरी जांच के बाद इस बात का खुलासा  हुआ उनके खाने में जहरीली चीज मिलाई गई थी। अफवाह उड़ी कि लता दीदी फिरसे कभी गा नहीं पाएंगी। लेकिन इस दौरान ऊषा मंगेशकर ने उनका ध्यान रखा और हमेशा उनके लिए अपने हाथों से खाना बनाया।

   

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