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अंदर से ऐसा दिखता है वह घर, जहां तीन दिन तक पड़ी रही बॉलीवुड के फेमस विलेन की लाश, एक्टर ने खुद शेयर की थी PHOTOS, लिखा था- मेरा घर मेरा मंदिर है

2 वर्ष पहले
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मुंबई. 80 और 90 के दशक के विलेन महेश आनंद की लाश बीते शनिवार उनके घर से बरामद की गई थी। वे यहां कई सालों से अकेले रह रहे थे। सिने एंड टेलीविज़न आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक़, जब पड़ोसियों ने आसपास बदबू की शिकायत की तो पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और महेश की डेड बॉडी को बाहर निकाला। कहा जा रहा है कि उनकी मौत इससे भी तीन दिन पहले हो चुकी थी। क्या आप जानते हैं कि महेश अपने घर को मंदिर मानते थे। उन्होंने खुद जून 2018 में अपने घर की इनसाइड फोटोज का एक कोलाज शेयर किया था और घर के बारे में बताया था। महेश ने लिखा था- कोई घर छोटा नहीं होता...

- महेश ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा था, "गुड मॉर्निंग दोस्तों, यारों, शुभचितकों। मैं अपने सप्ताह की शुरुआत आपको अपने छोटे से घर के बारे में बताते हुए करता हूं। छोटा है, लेकिन मेरा है। आपको आश्रय, प्यार और पॉजिटिविटी देने वाला कोई घर छोटा नहीं होता। खुशियों से भरपूर सप्ताह मुबारक हो। पॉजिटिव रहो। ढेर सारा प्यार। महेश आनंद।" बता दें कि 57 साल के महेश आनंद कुछ सालों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। आखिरी वक्त में उनके पास ऑटो का किराया चुकाने तक के पैसे नहीं थे। खुद महेश ने यह खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।

इंडस्ट्री के पास सवा लाख रुपए का फंड भी नहीं

- महेश आनंद की मौत ने चकाचौंध से भरी ग्लैमर इंडस्ट्री पर नैतिक सवाल किया है। वह यह कि सवा लाख करोड़ सालाना के टर्नओवर वाली इंडस्ट्री के पास अपनी ही बिरादरी के एक्टर्स के लिए सवा लाख रुपए तक का फंड नहीं है, जिससे तंगहाली में जीने वाले एक्टर्स की मदद की जा सके। इस बात की पुष्टि खुद एक्टर्स की सबसे बड़ी संस्था CINTAA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मनोज जोशी ने की। उन्होंने साफ तौर पर कहा, "टीवी, फिल्म, एड और एंटरटेनमेंट के बाकी सेगमेंट को मिला दें तो सालाना पूरी इंडस्ट्री का टर्नओवर सवा लाख करोड़ रुपए है। दुर्भाग्य से जरूरतमंद एक्टर्स की मदद के लिए सवा लाख रुपए तक का भी फंड अब तक नहीं बन पाया है। बीमार और आर्थिक रूप से तंगहाल एक्टर्स को विभिन्न संस्थाएं अपने-अपने लेवेल पर करती हैं।"
- मनोज ने आगे कहा, "मिसाल के तौर पर हम सिंटा के जरिए अपने जरूरतमंद मेंबर्स और सिने वर्कर्स को मंथली दो से सात हजार रुपए तक की मदद मुहैया कराते हैं। साथ ही मृतक के परिवार को लाख रुपए तक की सहायता हम लोग करवाते हैं। जरूरतमंद एक्टर्स को नियमित मदद मिलती रहे, सके लिए हम एक बड़ी बिल्डिंग बनवा रहे हैं। वहां एक्टिंग से लेकर फिल्म और सीरियल निर्माण की गतिविधियों के वर्कशॉप करवाकर रेवेन्यू जनरेट करेंगे। उसका इस्तेमाल हम जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए करेंगे। सिंटा की स्थापना को कई दशक बीत चुके हैं। पहले के कमेटी मेंबर्स के जेहन में भी यह बात आई होगी। हालांकि, हकीकत तो यही है कि आज की तारीख में भी कोष नहीं है।"

CINTAA की आय का एकमात्र जरिया

सिंटा के एक और उच्च पदाधिकारी संजय भाटिया कहते हैं, "अभी तो हमारे पास आय का एकमात्र जरिया सिंटा की मेमबरशिप फ़ीस है। वह रकम बैंक में जमा होती है। उससे मिलने वाले ब्याज से हम अपने जरुरतमंद मेंबर्स की मदद करते हैं। हम इसी महीने एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। वहां छोटे-बड़े सभी कलाकारों की मौजूदगी में फंड बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। रहा सवाल महेश आनंद जी का, तो वह हमारे मेंबर नहीं थे। उनकी तरफ से जरूरत की कोई अर्जी नहीं आई, इसलिए हम उनकी मदद नहीं कर सके। हालांकि, हम लोग अपने साथी मेंबर्स से रिक्वेस्ट करते रहते हैं कि वे अपनी बिरादरी के तमाम लोगों को सिंटा से जोड़ें।"
- सिंटा के ही अमित बहल एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाते हैं। वे कहते हैं, "हम कलाकारों की संस्था सिंटा तो अपने जरुरतमंद वर्कर और एक्टर्स की मदद करती है, लेकिन जरा प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स की संस्था से भी सवाल होने चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई कोष बनाने की तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया। संसद में गए उन कलाकारों से भी सवाल होने चाहिए, जिन्होंने अब तक सरकार के सामने जरूरतमंदों की बेहतरी के लिए किसी तरह का कोष गठित करने का सवाल नहीं किया।"

इनपुट : अमित कर्ण

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