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Movie review: शॉकिंग था 'सैराट' का क्लाइमेक्स लेकिन निराश करता है 'धड़क' का अंत / Movie review: शॉकिंग था 'सैराट' का क्लाइमेक्स लेकिन निराश करता है 'धड़क' का अंत

DainikBhaskar.com

Jul 20, 2018, 10:27 AM IST

डायरेक्टर शशांक खेतान की फिल्म 'धड़क' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है।

Jhanvi Kapoor And Ishaan Khatter Dhadak Movie Review
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क्रिटिक रेटिंग 3.5/5
स्टार कास्ट जाह्नवी कपूर, ईशान खट्टर, आशुतोष राणा, शालिनी कपूर
डायरेक्टर शशांक खेतान
प्रोड्यूसर करन जौहर, हीरू जौहर, अपूर्वा मेहता
जोनर रोमांटिक ड्रामा
अवधि 137 मिनट

बॉलीवुड डेस्क. जवां दिलों का प्यार किस तरह परवान चढ़ता है परिवार से और समाज से लड़ता है। सैराट की असली कहानी यही थी, जिसे धड़क में दिखाने की पुरजोर कोशिश की गई। कुछ हद तक मिली कामयाबी के बीच स्टार किड जाह्नवी की फिल्म देखने पहुंचे लाेग बहुत सारी उम्मीदें लेकर न ही जाएं। लेकिन सैराट देखी है और यह सोच रहे हैं कि कहानी का अंत भी जस का तस है, तो इस जगह आप गलत साबित हो सकते हैं। कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फिल्म का क्लाईमैक्स ही जो धड़क को सैराट से अलग बनाता है।

'धड़क' की कहानी : 'धड़क' मराठी फिल्म 'सैराट' की हिन्दी रीमेक है। फिल्म की ज्यादातर बातें ठीक सैराट जैसी ही हैं हालांकि शशांक ने 'धड़क' में कॉस्मेटिक बदलाव किए हैं जो हिन्दी फिल्म ऑडियंस के हिसाब से हैं। फिल्म में लीड कैरेक्टर पार्थवी (जाह्नवी कपूर) और मधु (ईशान खट्टर) हैं। मधु अपने कॉलेज में साथ पढ़ने वाली पार्थवी को लाइक करता है और वह भी उसे पसंद करती है। पार्थवी को पाने मधु काफी मेहनत करता है। कहानी में ट्विस्ट ये है कि यह लव स्टोरी उदयपुर की है। पार्थवी काफी अमीर और पावरफुल फैमिली से हैं। उनके पिता रतन सिंह (आशुतोष राणा) क्रूर और बेहद महत्वाकांक्षी नेता हैं। वहीं मधु गरीब परिवार से है। इसके बावजूद मधु और उनका परिवार पार्थवी का दिल जीत लेता है। दोनों की लव स्टोरी शुरू होती लेकिन जल्द ही इसके बारे में पार्थवी की फैमिली को पता चल जाता है। इस वजह से इस क्यूट सी लव स्टोरी में भूचाल आ जाता है लेकिन दोनों हार नहीं मानते और एक-दूसरे के साथ शहर छोड़कर भाग जाते हैं।

कुछ कुछ चूके शशांक : मूल फिल्म 'सैराट' की तरह शशांक ने धड़क में भी वही एनर्जी और जज्बा बरकरार रखने की कोशिश की है। प्यार के लिए जवां दिलों का जुनून भी धड़क में साफ दिखा है। बावजूद इसके शशांक कहीं न कहीं 'सैराट' के सबसे पावरफुल पॉइंट सादापन और लव बर्ड्स के मासूम प्यार काे दिखाने में नाकामयाब नजर आए हैं। उदयपुर को फिल्म में बेहद खूबसूरत दिखाया गया है लेकिन आलीशान कोठियों के दृश्यों, कलरफुल साड़ी और विदेशियों का दिखाना गैरजरूरी लगा।

- बात ईशान खट्टर की एक्टिंग की करें तो वह बेहद शानदार है। वे अपने कैरेक्टर में पूरी तरह डूबे नजर आते हैं। ईशान की एक्टिंग में कोई कसर नहीं दिखी है। धड़क ईशान की दूसरी फिल्म है जिसमें उन्होंने फिर से अपनी एक्टिंग से सबको इम्प्रेस कर दिया है।

जाह्नवी ने बाद में संभाली एक्टिंग: फिल्म में जाह्नवी का कैरेक्टर स्ट्रॉन्ग है जिसे उन्होंने डिलीवर करने की कोशिश की है। राजस्थानी टच को लेकर जाह्नवी थोड़ी कमजोर पड़ी हैं लेकिन इंटरवल के बाद उन्होंने अपनी एक्टिंग से इसकी भरपाई कर दी है। फिल्म में ईशान के दोस्त बने अंकित बिष्ट और श्रीधर वत्स ने बतौर फ्रेंड बखूबी अपना रोल निभाया है। आशुतोष राणा अपने कैरेक्टर के साथ पूरा न्याय करते दिखे हैं। लेकिन वे अपने रोल में स्टीरोटाइप होकर फंस गए हैं।

- फिल्म का क्लाइमेक्स निराश करता है। जैसा कि सैराट क्लाइमेक्स आपको बेहद शॉक्ड करता है। शायद यही रीजन है कि शशांक इससे ऑडियंस को थिएटर तक ला सकें। ये उनका क्लेवर मूव कहा जा सकता है। फिल्म का म्यूजिक ऑरिजनल फिल्म से लिया गया है जो कि बेहद शानदार है।

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