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Movie Review: एंटरटेनिंग है अक्षय कुमार की 'गोल्ड' लेकिन इरिटेट करती हैं मौनी रॉय

गोल्ड के अलावा बॉक्सऑफिस पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते भी रिलीज हुई है।

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2018, 12:01 PM IST
Movie review of Akshay Kumar's Gold
रेटिंग 3
स्टारकास्ट अक्षय कुमार, मौनी रॉय, विनीत सिंह, सनी कौशल, अमित साध,कुणाल कपूर
डायरेक्टर रीमा कागती
प्रोड्यूसर फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी

बॉलीवुड डेस्क. गोल्ड की कहानी लंदन ओलिंपिक 1948 में भारत की जीत से प्रेरित है। ये जीत भारत के आजाद होने के एक साल बाद मिली थी। ये खास थी क्योंकि पहली बार इंडिया ब्रिटिश इंडिया का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही थी। प्लेयर्स दुनिया के सामने ये साबित करके गर्व महसूस कर रहे थे कि वे एक एक आजाद देश के रूप में भी खेल कर जीत सकते हैं।


कहानी: तपन दास अक्षय कुमार इंडिया टीम का मैनेजर है। बंगाली मैन जो कि शराब पीना पसंद करता है लेकिन आजाद भारत के लिए गोल्ड लाना उसका जुनून है। फिल्म हमें 1936 में ले जाती है। जहां इंडिया टीम ब्रिटिश शासन के अंडर हॉकी मैच में गोल्ड जीतती है। उस वक्त टीम का कैप्टन सम्राट कुणाल कपूर होता है। दास टीम का मैनेजर है और इस बात से खुश नहीं है कि इंडिया की जगह ब्रिटिश का झंडा फहराया जा रहा है। जब दास को पता चलता है कि टीम इंडिया फिर ओलिंपिक में जा रही है तो वो इसका फायदा उठाकर टीम को फिर से गोल्ड दिलवाने की जुगत में लग जाता है। जब उसकी जिम्मेदारी टीम को बनाने और गोल्ड जितवाने की है वो इसे एक चैलेंज के तौर पर लेता है।

डायरेक्शन: सभी स्पोर्ट्स बेस्ड फिल्मों में स्ट्रगल, हार फिर जीत को दिखाया जाता है। गोल्ड में भी ऐसा ही है। डायरेक्टर रीमा कागती ने 40 के दशक को क्रिएट करने की बारीकी से कोशिश की जिसमें वे सफल भी रही हैं लेकिन वे दूसरी कई जगह फेल रहीं। इंडियन हॉकी वर्ल्ड के हिस्टोरिकल चैप्टर के साथ इतनी खींचतान की गई है कि वो एक मेलोड्रामा बन जाता है जिसमें स्पोर्ट्स कहीं दिखाई नहीं देता। रीमा कागती और राजेश देवराज ने फिल्म की स्टोरी और स्क्रीनप्ले को ऐसे लिखा है कि वो देशभक्ति और राष्ट्रीयता के हर पहलू को छू सके। फिल्म तीन घंटे लंबी है।

जावेद अख्तर के डायलॉग कई जगह इफेक्टिव हैं। लेकिन वे बहुत सारे हैं। फिल्म में कुछ चीजों को इतना सिंपलिफाई किया गया है कि ऐसा लगता है कि बच्चों की फिल्म देख रहे हैं। सबटाइटल फिल्म का मजबूत पक्ष नहीं हैं ।

एक्टिंग: अक्षय कुमार ने फिल्म में अच्छा काम किया है। वे बंगाली और जुनूनी तपन दास के कैरेक्टर में पूरी तरह घुस गए हैं। अक्षय के साथ ही कुणाल कपूर, विनीत सिंह, अमित साध और न्यूकमर सनी कौशल ने भी अच्छा काम किया है। खासकर सनी ने हिम्मत सिंह के रोल में शानदार काम किया है। इस फिल्म से डेब्यू करने वाली मॉनी रॉय इम्प्रेस करने की जगह परेशान करती हैं। उनके पास फिल्म में परफॉर्म करने का स्कोप ही नहीं था।

देखें या नहीं: कागती से इससे अच्छी फिल्म एक्सपेक्ट की जा रही थी। इसके पहले उन्होंने आमिर खान के साथ तलाश जैसी पावर पैक्ड फिल्म बनाई थी। फिल्म का सेकंड हाफ आपको ज्यादा इन्वॉल्व करता है, क्लाईमैक्स अच्छा है। अगर आप स्पोर्ट्स ड्रामा पसंद करते हैं और अक्षय कुमार के फैन हैं तो फिल्म देख सकते हैं।






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Movie review of Akshay Kumar's Gold
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