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मूवी रिव्यू: बेसिरपैर की कहानी है 'सत्यमेव जयते', डायरेक्शन-राइटिंग सबसे खराब

फिल्म से आएशा शर्मा ने बॉलीवुड डेब्यू किया है

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2018, 11:58 AM IST
Movie Review of john abraham's satyameva jayate

रेटिंग 1.5
स्टारकास्ट जॉन अब्राहम,मनोज बाजपेयी,आएशा शर्मा
डायरेक्टर मिलाप झावेरी
प्रोड्यूसर निखिल आडवाणी, भूषण कुमार

बॉलीवुड डेस्क. सत्यमेव जयते, सिस्टम से लड़ने के नाम पर बनाई गई बैसिरपैर की फिल्म है। मिलाप झावेरी की फिल्म की कहानी पुलिस फोर्स में फैले करप्शन पर बेस्ड है।

कहानी: वीर (जॉन अब्राहम) एक आर्टिस्ट हैं लेकिन वो एक छुपा हुआ किलर भी है। पुलिसवालों को जलाकर मारता है और मारने के बाद उनका स्कैच बनाता है। जब पुलिस फोर्स उसे पकड़ने में कामयाब नहीं होती तो इंस्पेक्टर शिवांश (मनोज बाजपेयी) को बुलाकर ये केस दिया जाता है। शिवांश किलर को पकड़ने की कोशिश करता है और किलर उसकी नाक के नीचे से पुलिसवालों को मारना जारी रखता है। वीर के किलर बनने की कहानी भी है।

वीर अच्छा काम करने वाला एक आदमी है जिसका काम अपने तरीके से करप्ट पुलिस फोर्स को निकालना है। डीसीपी शिवांश राठौर एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर है जो किलर के माइंड में चलने वाले प्लान को क्रेक कर लेता है। इसके बाद क्या, लगता है कि इसके बाद क्या होगा ये स्क्रिप्टराइटर भी भूल गए हैं। इस फिल्म के साथ यही इश्यू है। ये शानदार शुरूआत करती है लेकिन एक प्वाइंट पर पहुंचने के बाद भटक जाती है।

डायरेक्शन: फिल्म का सब्जेक्ट आउटडेटेड है जिसमें आगे क्या होगा आप आसानी से पता लगा सकते हैं। इस फिल्म का डायरेक्शन और राइटिंग दोनों ही बहुत खराब हैं। जो हजम नहीं होते। आप डिसाइड नहीं कर सकते कि दोनों में से ज्यादा खराब क्या है। फिल्म का डायरेक्शन और राइटिंग मिलाप झावेरी ने ही किया है। उनके सिग्नेचर डॉयलॉग ने फिल्म को हास्यप्रद बना दिया है। सीरियस सीन्स में भी फिल्म के डॉयलॉग फनी लगते हैं। फिल्म को सीरियसली लेना इम्पॉसिबल है।

एक्टिंग: जॉन अब्राहम हमेशा हैवी मसल्स और त्योरी चढ़ाए हुए फेस के अलावा किसी चीज में इन्वॉल्व नहीं लगते। वे स्क्रीन पर कौन सा सीन कर रहे हैं उन्हें इससे कोई मतलब नहीं लगता। किलिंग से लेकर रोमांस करते हुए तक उनके एक्सप्रेशन सेम रहते हैं। बस पंच मारते वक्त वे अभिनय करते हुए दिखते हैं। झावेरी की हीरोइन शिखा (आएशा शर्मा) दुनिया में सबसे अच्छी लड़की हैं, ऐसा दिखाया गया है।

वे जानवरों की केयर करती हैं, बीच को साफ करती हैं, एनजीओ में बच्चों को पढ़ाती हैं और पेटिंग भी करती हैं। आएशा शर्मा ने अच्छा काम किया है। मनोज बाजपेयी ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। लेकिन फिल्म की बेवकूफियां उनके शानदार अभिनय पर भारी पड़ जाती हैं। अमृता खानविलकर ने शिवांश की पत्नी का रोल किया है। उनका रोल बहुत छोटा है।

म्यूजिक: फिल्म में नोरा फतेही का डांसिंग आइटम नंबर दिलबर दिलबर अच्छा है। इसके अलावा आतिफ असलम का पानियों सा भी अच्छा ट्रेक है। बाकी के एलबम का म्यूजिक भी सूदिंग है। म्यूजिक डायरेक्शन साजिद-वाजिद, तनिष्क बागची, रोचक कोहली और अर्को पार्वो का है।

देखें या नहीं? इस फिल्म को देखकर अपना टाइम और पैसे बर्बाद न करें।

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Movie Review of john abraham's satyameva jayate
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