विज्ञापन

Movie Review : नहीं चला सनी के एक्शन और धरम की कॉमेडी का जादू, फिर से बोर करती है फिल्म / Movie Review : नहीं चला सनी के एक्शन और धरम की कॉमेडी का जादू, फिर से बोर करती है फिल्म

DainikBhaskar.com

Aug 31, 2018, 01:50 PM IST

यह यमला पगला दीवाना सीरीज की तीसरी फिल्म है।

movie review yamla pagla deewana fir se
  • comment

क्रिटिक रेटिंग 1.5/5
स्टार कास्ट सनी देओल, बॉबी देओल, धर्मेन्द्र देओल, कृति खरबंदा, गिप्पी ग्रेवाल
डायरेक्टर

नवानियत सिंह

प्रोड्यूसर गिन्नी खनूजा, अारुषी मल्होत्रा, अक्षय, धवल
जोनर एक्शन कॉमेडी ड्रामा
ड्यूरेशन 148 मिनट

बॉलीवुड डेस्क. पहली फिल्म हिट थी, दूसरी फिल्म चली नहीं और तीसरी फिल्म ने भी बोर किया। फिल्म यमला पगला दीवाना की फ्रेंचाइजी वह कमाल दोबारा नहीं दोहरा पाई है। फिल्म में देओल फैमिली ने आयुर्वेद के इर्दगिर्द कहानी रची है। फिल्म थोड़ी ढीली रही, बॉलीवुड मसाला जिसकी उम्मीद थी, वह फिल्म में नजर नहीं आया है।

वैद्य की कहानी है YPD फिर से : जिसमें पुराण (सनी देओल) जो कि पंजाब से हैं एक ईमानदार आयुर्वेद डॉक्टर हैं। वे नज्ब छूकर ही लोगों की बीमारी बता देते हैं। पुराण के पास सभी बीमारियों के इलाज की एक दवाई है जिसका नाम वज्र कवच है। इस दवाई का फॉर्मूला पुराण के पूर्वजों से मिला है। पुराण नहीं चाहता कि इसे कोई दूसरा यूज करे। पुराण जानता है कि अगर ये फार्मूला दवाई कंपनियों के पास चला जाएगा तो ये गरीब जनता की पहुंच से बाहर हो जाएगा। पुराण एक शांत और धैर्यवान इंसान है। लेकिन गुस्सा आने पर अपनी डिफरेंट स्टाइल में घूंसे मार सकता है।

- पुराण का एक लोफर भाई है (बॉबी देओल) जिसका नाम काला है। उसकी उम्र 40 साल है। जिसकी ना तो शादी हुई है और ना ही उसके पास कोई रोजगार है। इसके साथ ही वह शराब पीने का आदी है। काला अक्सर पुराण की परेशानियों को बढ़ाने का काम करता है उनका किराएदार तेनंत परमार (धर्मेंद) जो सिर्फ 110 रुपए किराया देता है।

- इसके बाद गुजरात से चीकू (कीर्ति खरबंदा) इनकी लाइफ में आती हैं। इसके बाद सबकी लाइफ में कुछ बदलाव होते हैं। इसके बाद तीनों देओल अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हो जाते हैं।

बाप-बेटों की तिकड़ी का जलवा कायम : आज भी सनी को पंच मारते हुए देखने में मजा आता है। जैसे सनी पंच मारते हैं वैसा कोई दूसरा नहीं कर सकता। फिल्म में धर्मेंद का चार्म देखने को मिला है। ऐसा लगता है कि उनके कैरेक्टर को दूसरे दो देओल के कैरेक्टर से ज्यादा इमेजिनेशन के साथ लिखा गया है।बॉबी देओल को काफी लंबा रोल मिला है लेकिन उनके डायलॉग रिपीट होते हैं जिनको सुनकर बोरियत ज्यादा महसूस होती है। फिल्म में वे एंटरटेनिंग नहीं लगते हैं।

- स्टोरी और स्क्रीनप्ले दोनों धीरज रतन ने लिखा है। कुछ सीन्स को छोड़कर कहानी उबाऊ और प्रिडिक्टेबल है। ज्यादातर डायलॉग रिपीट हुए हैं और बोरिंग भी हैं।

सनी के फैन हैं तो ही देखें फिल्म : डायरेक्टर नवानियत सिंह, देओल फैमिली के चार्म को भुनाने में असफल हुए हैं। हालांकि धर्मेन्द्र और रेखा के ओल्ड सुपरहिट सॉन्ग रफ्ता-रफ्ता का रीक्रिएशन एक बार फिर शानदार रहा है। फिल्म का फर्स्ट पार्ट अच्छा था लेकिन 7 साल बाद ये फिल्म बोरिंग, थकाऊ लगती है।

- एेसे में आप सिनेमा हॉल में बैठकर फिल्म के खत्म होने का इंतजार करते हैं। अगर आप सनी देओल के फैन हैं तो फिल्म को देख सकते हैं। बाकी फिल्म में कुछ भी नहीं है।

X
movie review yamla pagla deewana fir se
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन