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रिपोर्ट / बॉलीवुड की 9 फिल्में जो राजनीति का हुईं शिकार, विरोध के चलते लगा बैन या रिलीज में हुई देरी

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 02:50 PM IST


movies which faced trouble in releasing due to interference political parties
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बॉलीवुड डेस्क. बॉलीवुड में हमेशा से ही ऐसे मुद्दों पर फिल्में बनती रहीं हैं जिन्में देश की राजनीतिक उलटफेर को दिखाया गया है। कई राजनीतिक घटनाओं या कई नेताओं पर फिल्में बनाई गईं, लेकिन जब भी इन पर फिल्में बनीं हैं बवाल जरूर मचा है। वहीं कुछ नहीं तो कई फिल्मों का विरोध धर्म,समाज और संस्कृति के नाम पर किया गया। जब भी समाज की सच्चाई को दिखाने वाले मुद्दों पर फिल्में बनीं उसमें राजनीति जरूर की गई।

 

राजनीतिक पार्टियां हमेशा से ही फिल्मों में दखल देती रहीं हैं। कई बार तो फिल्म के रिलीज होने न होने का फैसला भी किसी राजनीतिक पार्टी के दबाव में आकर लिया गया है। ऐसी कई फिल्में हैं जिनमें राजनीतिक दखल काफी रहा है। कई फिल्मों को राजनीतिक दबाव के चलते रिलीज नहीं होने दिया गया या बाद में फिल्म के कुछ दृश्यों पर कट लगा कर रिलीज किया गया। आज हम आपको ऐसी फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी आड़ में जमकर राजनीति की गई...

नेताओं के हलक से नहीं उतरीं ये फिल्में

  1. किस्सा कुर्सी का (1974)

    किस्सा कुर्सी का फिल्म 1974 में बनी थी और 1975 में रिलीज होने वाली थी। इमरजेंसी के दौर में हर फिल्म को पहले सरकार देखती थी और बाद में रिलीज करती थी। इसे देखने के बाद सरकार को लगा कि ये फिल्म संजय गांधी के ऑटो मेन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट का मखौल उड़ाती और सरकार की नीतियों को बदनाम करती है। इसलिए किस्सा कुर्सी का फिल्म के ओरिजनल प्रिंट्स ही जलाकर नष्ट कर दिए गए थे। जिस प्रिंट को जलाकर नष्ट कर दिया गया था, उस फिल्म में राज बब्बर मुख्य भूमिका में थे। इमरजेंसी हटने के बाद डायरेक्टर ने 1977 में दोबारा फिल्म बनाई। हालांकि दूसरी बार बनी फिल्म में राज ने काम नहीं किया। फिल्म में राज किरण, सुरेखा सीकरी और शबाना आजमी मुख्य भूमिकाओं में थे। 
     

  2. आंधी (1975)

    सुचित्रा सेन और संजीव कुमार की आंधी भी बैन की शिकार हुई थी। इमरजेंसी के दौरान यह तर्क दिए गए थे कि फिल्म में इंदिरा गांधी की गलत छवि पेश की गई है जिसके चलते इसे रिलीज नहीं कर सकते। हालांकि, 1977 में कांग्रेस की हार के बाद जनता पार्टी की सरकार ने फिल्म से बैन हटाकर इसके रिलीज का रास्ता साफ कर दिया था। इस फिल्म के निर्देशक गुलजार थे।

  3. ब्लैक फ्राइडे (2007)

    राइटर एस हुसैन जैदी की किताब पर बनी फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' अनुराग कश्यप की फिल्म थी, जिसे सेंसर बोर्ड ने बैन किया था। ये फिल्म 1993 में हुए मुंबई बम ब्लास्ट पर आधारित थी। उस समय बम ब्लास्ट का केस कोर्ट में चल रहा था इसलिए हाई कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज पर 2004 में स्टे लगा दिया था। बाद में यह फिल्म 2007 में रिलीज की गई थी।

  4. सिंस (2005)

    यह फिल्म केरल के एक पादरी पर बेस्ड थी, जिसे एक औरत से प्यार हो जाता है। दोनों के बीच संबंध भी बन जाते हैं। कैसे ये पादरी, समाज और धर्म की मर्यादाओं के बावजूद अपने प्यार को कायम रखता है, यही फिल्म की कहानी है। कैथलिक लोगों को यह फिल्म पसंद नहीं आई थी क्योंकि इसमें कैथलिक धर्म को अनैतिक ढंग से दिखाया गया था। सेंसर बोर्ड ने इसे बैन कर दिया। कुछ दृश्यों को हटाने के बाद फिल्म को 25 फरवरी 2005 को रिलीज किया गया था। 

  5. फिराक (2009)

    फिराक दूसरी फिल्म है, जो गुजरात दंगों पर बनी। प्रोड्यूसर्स के मुताबिक यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर बेस्ड थी, जो गुजरात दंगों के समय हुई थीं। एक्ट्रेस नंदिता दास को इस फिल्म के लिए कई संगठनों से काफी विरोध झेलना पड़ा था। आखिरकार सेंसर बोर्ड ने इसे बैन कर दिया। फिल्म 2008 में रिलीज होनी थी लेकिन नहीं हुई। कुछ समय बाद 20 मार्च 2009 को जब ये फिल्म रिलीज हुई, तब इसे आलोचकों और दर्शकों से काफी तारीफ मिली थी।

  6. अनफ्रीडम (2015)

    यह फिल्म एक लेस्बियन जोड़े की लव स्टोरी पर बेस्ड है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे उनका सामना आतंकवादियों से होता है और उसके बाद उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आता है? सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज नहीं होने दिया था क्योंकि इससे देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका थी। फिल्म 29 मई 2015 को सिर्फ अमेरिका में रिलीज की गई थी। 

  7. परजानिया (2005)

    यह फिल्म गुजरात दंगों पर बेस्ड थी। कुछ लोगों ने इसे सराहा तो कई ने इसे क्रिटिसाइज भी किया। फिल्म की कहानी में अजहर नाम का लड़का 2002 में हुए दंगों के समय गायब हो जाता है। वैसे तो परजानिया को अवॉर्ड मिला, लेकिन गुजरात दंगे जैसे सेंसेटिव सब्जेक्ट की वजह से इस फिल्म को गुजरात में बैन कर दिया गया था।

  8. इंदु सरकार (2017)

    फिल्म इंदु सरकार पर भी काफी विवाद हुआ था। 1975 के इमरजेंसी दौर पर बनी यह फिल्म का देशभर में काफी विरोध हुआ था। जगह-जगह फिल्म के निर्देशक मधुर भंडारकर के पुतले जलाए गए थे। कांग्रेस ने फिल्म के विषय पर आपत्ति जताई थी और भंडारकर पर बीजेपी से फंड लेने का आरोप भी लगाया गया था। फिल्म में कीर्ति कुल्हारी का किरदार इंदिरा गांधी पर आधारित था। भारी विरोध के बावजूद फिल्म को 28 जुलाई साल 2017 में रिलीज किया।

  9. पद्मावत (2018)

    फिल्म पद्मावत संजय लीला भंसाली ने बनाई थी। इसमें रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में थे। इसमें चितौड़ की रानी पद्मावती की कहानी को दिखाया गया है। पद्मावती बनी दीपिका पर फिल्माए गए कुछ दृश्यों पर करणी सेना और कुछ राजपूत गुटों ने कड़ा विरोध जताया था। रानी पद्मावती की छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए फिल्म के सेट पर करणी सेना ने खूब उत्पात मचाया था। इतना ही नहीं फिल्म तैयार होने के बाद इसके रिलीज होने का भी कड़ा विरोध किया गया। पहले फिल्म 1 दिसंबर 2017 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन विरोध और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद फिल्म को पिछले 25 जनवरी 2018 को रिलीज किया गया। 

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