रिएक्शन / जेएनयू में छात्रों पर हमला, दीपिका पादुकोण की कैंपस में एंट्री; तीन हिस्सों में बंटा बॉलीवुड

Attack on students at JNU, Deepika's entry into campus; Bollywood divided into three parts
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Attack on students at JNU, Deepika's entry into campus; Bollywood divided into three parts

दैनिक भास्कर

Jan 11, 2020, 10:58 AM IST
बॉलीवुड डेस्क. फीस बढ़ोतरी, नागरिकता संशोधन कानून और कैंपस में हिंसा जैसे कई मामलों के बीच जवाहर लाल यूनिवर्सिटी सुर्खियों में बनी हुई है। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जेएनयू कैंपस में दीपिका पादुकोण की एंट्री ने बॉलीवुड को तीन हिस्सों में बांट दिया है। कुछ सेलेब्स दीपिका के कदम का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे महज फिल्म का प्रमोशन बताकर इसकी आलोचना। जबकि सुपर स्टार मौन हैं।

सोशल मीडिया पर चली थी फिल्म 'छपाक' को बॉयकॉट करने की मुहिम

अशोक पंडित: भारत में हजारों संस्थाएं हैं, लेकिन जेएनयू में ही क्यों छात्र मास्क पहनकर आतंक फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान में जारी आतंकवादी कैंप की तरह है, जो भारत में आतंक फैलाने के लिए आतंकी तैयार करता है। उन्होंने कहा कि क्या आप उन लोगों का समर्थन करती हैं, जो संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, क्या आप भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे का समर्थन करती हैं।

रंगोली चंदेल: एसिड अटैक सर्वाइवर रंगोली चंदेल ने दीपिका की जेएनयू विजिट को पब्लिसिटी स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि, हमें उनका सम्मान करना चाहिए क्योंकी उन्होंने केवल पीआर किया। दीपिका ने इससे पहले कितने मुद्दों पर बात की है। मुझे नहीं लगता कि उसे छात्रों में दिलचस्पी है, वो केवल पैसा कमाने में इंट्रेस्ट रखती हैं।

विवेक रंजन अग्निहोत्री: टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि एक्ट्रेस ने वहां जाकर यह संदेश दिया है कि वे बाकी 98 प्रतिशत छात्रों को बताया कि वे उनके साथ खड़ी नहीं होती हैं। फिल्मी हस्तियों को पाकिस्तान से मदद मिल रही है।

अनुपम खेर: उन गुंडों को गिरफ्तार करो जो जेएनयू हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं। यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह का खून खराबा नहीं होना चाहिए। उन लोगों की असली पहचान उजागर करो और किसी पर भी कैमरा दिखाकर इल्जाम लगाने से बचें। आंदोलन ठीक है, लेकिन देश की संपत्ति को नुकसान लगाने वाले देशद्रोही हैं।

जूही चावला: किसी भी चीज को तोड़ने में समय नहीं लगता, लेकिन बनाने में लगता है। विरोध प्रदर्शन के दौरान देशभर में कई बसों और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था।

दिलीप ताहिल: यह सब जामिया, एमयू जैसी उन्हीं यूनिवर्सिटीज में पहले से ही तय था कि गृहमंत्री के मुंह से सीएए की बात निकले और विरोध करें।

अनुराग कश्यप: महिला प्रजाति मजबूत है, थी और रहेगी। 'छपाक' पहले दिन के सभी शो। हिंसा के खिलाफ खड़े सभी लोग बुक माय शो पर जाइए और हमारी खामोशी का परिचय दीजिए, जो धमाकेदार होगी।

स्वरा भास्कर: स्वरा भास्कर ने यूनिवर्सिटी में जारी हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पर पिटीशन अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने पिटीशन में छात्रों पर हुए हमले की जांच और पुलिसवालों के रवैये की जांच की मांग की है। उन्होंने दीपिका पादुकोण की जेएनयू कैंपस विजिट की भी तारीफ की।

अनुभव सिन्हा: याद रखना बात किस घर से आती है वो। प्रकाश पादुकोण की बेटी है। हीरो है वो आदमी। सालों साल देश की नाक ऊंची की है।

प्रकाश राज: शुक्रिया दीपिका पादुकोण। शुक्रिया एक सच्ची भारतीय होने के लिए।

कोंकणा सेन शर्मा: लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर कोंकणा सेन शर्मा दीपिका पादुकोण के कदम को सम्मानित बताया। उन्होंने एक्ट्रेस का छात्रों के साथ फोटो शेयर कर लिखा 'सम्मान'।

निखिल आडवाणी: प्रोड्यूसर के तौर पर आज दीपिका पादुकोण को मुंबई में थिएटर्स के बाहर खड़े होकर अपने प्रोडक्शन की पहली फिल्म की तारीफ का इंतजार करना चाहिए था। इसकी बजाय वे पूरी मजबूती के साथ जेएनयू स्टूडेंट्स के साथ खड़ी हुईं। वह भी अपने इस कदम के परिणाम जानते हुए। सम्मान करता हूं

वहीं अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन, अनुष्का शर्मा, करीना कपूर जैसे बड़े सितारों ने मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विद्या बालन ने कहा था कि पता नहीं लोग एक्टर्स से हर मुद्दे पर बोलने की उम्मीद क्यों रखते हैं। अगर हमें किसी मामले पर कम जानकारी है तो हमने तय किया है कि हम उस बारे में कम बात करेंगे तो दिक्कत क्या है। उन्होंने कहा कि मैं सेट पर काम करती हूं, मेरे साथ 200 लोग काम करते हैं। अब अगर मेरे बयान से उन सभी पर असर पड़ेगा तो मुझे ही गिल्ट होगी।

वहीं, सैफ अली खान ने बताया कि वे इस तरह के पॉलिटिकल मुद्दों पर अपनी राय क्यों नहीं देते। एक्टर ने कहा कि मैं अभी भी राजनीतिक गतिविधियों पर पुख्ता नजरिया बनाने की कोशिश कर रहा हूं। यही वजह है कि मैं अभी इस पर कोई राय रखना जरूरी नहीं समझता। भारत में पॉलिटिकल मुद्दों पर बोलते कुछ है और समझ कुछ और ही लिया जाता है।

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