फ्लॉप इफेक्ट / 'छपाक' नहीं चली तो दीपिका ने एक महीने इंतजार कराने के बाद ठुकरा दी प्रदीप सरकार की फिल्म

Chhapaak Effect: Deepika Padukone Turns Down The Offer Of A Pradip SarKar Film
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Chhapaak Effect: Deepika Padukone Turns Down The Offer Of A Pradip SarKar Film

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 02:15 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. बॉक्स ऑफिस पर 'छपाक' के फ्लॉप होने के बाद दीपिका पादुकोण ने प्रदीप सरकार के निर्देशन में बन रही नोती बिनोदिनी की बायोपिक करने से इनकार कर दिया है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपिका की टीम ने मेकर्स से कहा कि वे अब हल्के-फुल्के विषय पर मूवीज करना चाहती हैं, ऐसे विषयों पर नहीं, जो गंभीर हों और उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित करें। 

दीपिका को पसंद आई थी फिल्म की कहानी

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है, "मेकर्स ने कहानी सुनाने के लिए दीपिका से मुलाकात की थी। उन्हें यह पसंद भी आई थी और वे स्क्रिप्ट पढ़ने को तैयार हो गई थीं। लेकिन इसके बाद दीपिका 'छपाक' के प्रमोशन में व्यस्त हो गईं और मेकर्स को बाद में जवाब देने के लिए टालती रहीं। करीब एक महीने से भी ज्यादा का वक्त लेने के बाद उनकी टीम ने जवाब में कहा है कि वे यह फिल्म नहीं कर सकतीं।" 

गौरतलब है कि करीब 35 करोड़ में बनी 'छपाक' बॉक्स ऑफिस पर लागत भी नहीं निकाल सकी।  फिल्म ने 10 दिन में करीब 30 करोड़ रुपए का कारोबार किया। दिल्ली बेस्ड एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल से प्रेरित इस फिल्म को मेघना गुलजार ने निर्देशित किया है। यह बतौर प्रोड्यूसर दीपिका की पहली फिल्म भी है। 

ऐश्वर्या के खाते में गई फिल्म

रिपोर्ट की मानें तो दीपिका के इनकार के बाद मेकर्स ने बिनोदिनी दासी की बायोपिक के लिए ऐश्वर्या राय को अप्रोच किया और उन्होंने इसके लिए हामी भर दी है। हालांकि, अभी कागजी कार्रवाई बाकी है। इसके पूरे होते ही प्रोजेक्ट की घोषणा की जाएगी। 

कौन थीं  बिनोदिनी दासी

बिनोदिनी दासी बंगाली थिएटर एक्ट्रेस और गायिका थीं, जो नोती बिनोदिनी के नाम से मशहूर थीं। उन्होंने 12 साल की उम्र में एक्टिंग की शुरुआत की और 23 की उम्र तक इसे जारी रखा था। अपने 12 साल के करियर में उन्होंने द्रोपदी, सीता, राधा, कैकेयी और प्रमिला समेत 80 से ज्यादा भूमिकाएं निभाई थीं। 19वीं सदी में उनके नाटक इतने लोकप्रिय थे कि बंगाल के प्रसिद्ध संत रामकृष्ण परमहंस भी उन्हें देखने जाते थे। 1913 में उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी थी, जो अमर कथा नाम से प्रकाशित हुई थी।  

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