स्क्रीनिंग / विधु विनोद चोपड़ा ने कहा- कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा और अनदेखी के लिए लोगों को उनसे माफी मांगना चाहिए

स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म की स्टारकास्ट के साथ डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा। स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म की स्टारकास्ट के साथ डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा।
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स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म की स्टारकास्ट के साथ डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा।स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म की स्टारकास्ट के साथ डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा।

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 06:46 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. अपकमिंग फिल्म 'शिकारा' के निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा का कहना है कि कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने वाले सभी लोगों को उनसे माफी मांगना चाहिए। उनके मुताबिक नफरत करने के लिए दुनिया में कोई चीज है तो वो सिर्फ नफरत ही है। चोपड़ा ने ये बातें कश्मीरी पंडितों के लिए नई दिल्ली में रखी अपनी फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान कहीं। 30 साल पहले 19 जनवरी 1990 की रात को लाखों कश्मीरी पंडितो को अपना घरबार छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया गया था। इस फिल्म में उन्हीं लोगों पर हुए अत्याचारों और उनकी दुर्दशा के बारे में बताया गया है।

रविवार को हुए इस कार्यक्रम के दौरान चोपड़ा ने कहा, '30 साल गुजर चुके हैं और अबतक कुछ नहीं हुआ है। कोई शोर नहीं मचा। मेरी उम्मीद तो यही है कि अब तो शोर मचा दो।' आगे उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूं कि लोग ऑनलाइन आएं और सभी कश्मीरी पंडितों से इस बात के लिए माफी मांगें कि हमने आप लोगों के लिए कुछ नहीं किया। उन सभी लोगों से माफी मांगे जो पलायन के 30 साल बाद आज भी रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे हैं। सभी बच्चे जो यहां हैं (फिल्म के सदस्यों की ओर इशारा करते हुए) उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि कश्मीर कैसा है। हम अब भी ये सुनने का इंतजार कर रहे हैं कि कश्मीरी पंडितों हमें माफ कर दो।'


फिल्म को मां को समर्पित किया 

इस फिल्म में 1990 के दौरान कश्मीर से भगाए गए 4 लाख कश्मीरी पंडितों की पीड़ा बताई गई है। जिसके बारे में बात करते हुए चोपड़ा भावुक भी हो गए। उन्होंने इस फिल्म को अपनी मां शांति देवी को समर्पित किया, जो 1989 में अपने बेटे की फिल्म 'परिंदा' के प्रीमियर के लिए मुंबई आई थीं और कभी घर नहीं लौट सकीं। चोपड़ा ने कहा, 'इस फिल्म को बनाने में मुझे 11 साल लगे। इतने वक्त में मैं तीन मुन्ना भाई फिल्म और दो थ्री इडियट्स फिल्म बना सकता था। लोग मुझसे पूछते हैं यही फिल्म क्यों? तो मेरा जवाब होता है, ये सिर्फ एक फिल्म नहीं है। इस फिल्म को मैंने अपनी मां के लिए बनाया है, जो कि कश्मीर में अपने घर लौटने से पहले ही चल बसीं।'

नफरत करने के लिए सिर्फ नफरत है

चोपड़ा का कहना है, 'इस फिल्म को बनाने का मकसद किसी समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाना नहीं है, बल्कि हमारी कहानी बताने की कोशिश है। हम सिर्फ यही कहना चाहते हैं कि नफरत करने लायक कोई चीज है तो वो सिर्फ नफरत है। मुझे उम्मीद है कि फिल्म से यही संदेश पूरे देश में जाएगा।' इस मौके पर चोपड़ा ने जागती कैंप में रहने वाले कश्मीरी पंडितों को फिल्म का सपना पूरा करने में मदद करने के लिए शुक्रिया भी कहा।

एक दिन कश्मीर के पुराने दिन जरूर आएंगे

उन्होंने कहा,'ये पहला मौका है जब मैंने इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखा है। इस फिल्म के निर्माण के दौरान कई मुस्लिम भाइयों ने भी हमारे साथ काम किया। वे इस बात को जानते थे कि ये फिल्म कश्मीरी पंडितों के निर्वासन पर बनी है, इसके बाद भी उन्होंने कश्मीर में हमारे साथ काम किया। यही वो कश्मीर है जिसे हम जानते हैं और एक दिन ये कश्मीर वापस आएगा। हम वापस जाएंगे और पहले की तरह रहेंगे। यही मेरी उम्मीद है।' फिल्म 'शिकारा- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीरी पंडित्स' वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में आदिल और सादिया लीड रोल में नजर आएंगे। ये फिल्म 7 फरवरी 2020 को रिलीज होगी।
 

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