जनता कर्फ्यू / सेलेब्स ने साझा किए अतीत के किस्से, बोले- हर बार कर्फ्यू हमारे भले के लिए ही होता है

Janta Curfew: Celebs Shared Their Experience From The Past
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Janta Curfew: Celebs Shared Their Experience From The Past

दैनिक भास्कर

Mar 22, 2020, 11:11 AM IST
बॉलीवुड डेस्क (उमेश कुमार उपाध्याय).   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आव्हान पर आज पूरे देश में जनता कर्फ्यू है। यह कर्फ्यू जनता द्वारा, जनता की भलाई के लिए ही लगाया गया है। इस मौके पर दैनिक भास्कर ने फिल्मी हस्तियों से बात की तो सभी ने पीएम की इस पहल की तारीफ की। उन्होंने एक सुर में यह भी कहा कि कर्फ्यू हमेशा हमारे भले के लिए ही होता है। साथ ही अतीत के कुछ कर्फ्यू से जुड़े अनुभव और रोचक किस्से भी साझा किए। 

कर्फ्यू के पांच किस्से

प्रधानमंत्री ने जो जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है, वह बहुत ही सराहनीय है और प्रशंसनीय है। हमारे भी कर्फ्यू के कुछ किस्से है। मैं, अमिताभ बच्चन, असरानी, अनिल धवन, बिहार के योगी और एक दोस्त विपिन उपाध्याय, जो अब दुनिया में नहीं रहे। ऐसे कर्फ्यू में हम सब रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर कभी किसी गर्लफ्रेंड के घर के नीचे तो कभी मंगेतर के घर के आगे-पीछे उनसे मिलने या उन्हें देखने के लिए जाते थे।

वह जवानी का जोश था तो उनका दीदार करना ऐसी सूनी सड़कों और घनघारे सन्नाटे में भी नहीं खटकता था। बाद में हम लोगों में इस पर विमर्श हुआ कि यह देश के संकट का समय है। कर्फ्यू देशहित में लगा है तो हमें ऐसे में प्रोटोकॉल फॉलो करना चाहिए। आज अपनी उन बातों को सोचता हूं तो कई बार उसके लिए हमें थोड़ा अफसोस भी होता है।

ऐसे मौके पर हमें देश के नियम का पालन करना चाहिए था। इसलिए कहता हूं कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहित में जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। इस पहल का हमें साथ देना चाहिए। ऐसी कोई हरकत नहीं करनी चाहिए, जैसी कि हम दोस्तों ने पहले की थी। उसके लिए सॉरी।

मैंने दिल्ली में 1984 का कर्फ्यू देखा है। वह आज के जनता कर्फ्यू से अलग था। तब एक बात देखी कि परिवारों, मोहल्लों और समुदाय के लोगों में कर्फ्यू के दौरान आपसी प्रेम भावना बढ़ी थी। शाम को सभी मिलकर एक-दूसरे का हाल पूछते थे। लोग एक-दूसरे की मदद के लिए खड़े हो गए। कर्फ्यू के वक्त हमारे यहां लोग सरसों का तेल लेने आए थे, क्योंकि हमारे खेतों का ही सरसों हमारे यहां कनस्तरों में रखा हुआ था। मां ने अगर सौ-सौ ग्राम ही तेल बांटा होगा तो पूरे मोहल्ले का काम हो गया। दुकानें बंद थी। मेरे घर पर बड़ी-सी तराजू थी। लोग अपना सामान तौलने के लिए मेरे ही घर पर आते थे।

चाइना से वॉर के दौरान के कर्फ्यू देखे हैं। तब खाइयां खोदी जाती थी। दिनभर खाई में रहो। क्योंकि ऊपर से जहाज बम फेंक सकता है। वह कर्फ्यू तो कभी नहीं भूले। रात को लाइट बंद करते थे और किसी ने लाइट जलाई तो उसे मना करते थे कि लाइट मत जलाओ। सतर्क रहते थे। आज भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि यह जो कोरोना है वह भी एक बम है। बस यह एक साइलेंट बम है, जिसकी आवाज भी नहीं आती। मुझे भी इस वायरस के डर से होटल में आइसोलेट करके रखा गया। ठीक होने पर घर भेजा गया, पर कहा गया कि 14 दिन लोगों से मिलिए नहीं। जो लोग आइसोलेशन से भागते हैं। उनसे कहिए कि डरें नहीं, औरों के भले के लिए ऐसा जरूर करें।

मैंने 1965 और 1971 में कर्फ्यू व ब्लैकआउट देखे हैं। घर की खिड़कियों पर हम काला कागज लगा देते थे। मीडिया तो उतनी थी नहीं पर हम रेडियो पर खबरें सुनते थे कि देश में क्या हो रहा है। घर में दुबके बैठे रहते थे। जब खेलने जाते थे तो पुलिस वाले गस्त पर आ जाते थे और हम उन्हें देखकर घर भाग जाते थे। शाम होते ही जितनी जरूरत होती थी उतनी ही मोमबत्ती जलती थी, वह भी खिड़कियों के पास नहीं रखी जाती थी। रात भर मोहल्ले वाले टीम बनाकर गश्त करते थे। गाड़ियां चलती थीं, पर हेडलाइट नहीं जलाया करते थे। दो अलग-अलग सायरन बजते थे। यह सब हमारी भलाई के लिए होता था। यह जनता कर्फ्यू भी भले के लिए है।

आजादी के समय भी मैंने स्वप्रेरणा से लगा ऐसा कर्फ्यू देखा है। उस समय मैं 14-15 साल की थी। तब लोग दिन में घर से बाहर नहीं निकलते थे, शाम को ही सड़कों पर दिखते थे। जब इंडिया-चाइना वॉर हुआ था, उस वक्त हमारे घरों की खिड़कियों में काले कागज चिपका दिए जाते थे। हम घर के अंदर ही लाइट बंद करके बैठते थे। वो अनुभव मुझे याद है। ऐसा सरकार हमारी भलाई के ही करती थी। मैंने जिस दौर में कर्फ्यू जैसा माहौल देखा है, तब हफ्ते में एक बार राशन खरीदते थे।

उस समय 10 रुपए में तो न जाने क्या-क्या खाद्य सामग्री मिल जाती थी। पूरा महीने का सामान आ सकता था। उस समय लोग घरों में बम गिरने के डर से छिपे रहते थे। आज कोरोना की वजह से घरों में कैद है। इसे देखकर मुझे एक गाना याद आ रहा है- ‘करूं न याद, मगर किस तरह भुलाऊं तुझे...।’ आज जनता कर्फ्यू में मैं परिवार के साथ घर पर ही समय बिताऊंगी। मुझे मेरा बेटा और बहू घर से बाहर ही नहीं जाने दे रहे हैं। मुझे खाना पकाने का शौक है तो इस खाली समय में बच्चों के लिए खाना पकाती रहती हूं। थोड़ा बहुत रियाज भी कर लेती हूं।

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