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बर्थडे विशेष / इमरजेंसी में रफी साहब ने ही किशोर कुमार पर लगा बैन बिना उन्हें पता चले हटवा दिया था

vinod viplav writer of mohammed Rafi Biography shared In Emergency, Rafi Saheb had helped to remove ban on Kishore Kumar without knowing him.
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vinod viplav writer of mohammed Rafi Biography shared In Emergency, Rafi Saheb had helped to remove ban on Kishore Kumar without knowing him.

दैनिक भास्कर

Dec 24, 2019, 09:17 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय, मुंबई. मशहूर पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की 24 दिसंबर को 95वीं बर्थ एनिवर्सरी है। रफी साहब पर 2005 में बायोग्राफी लिख चुके विनोद विप्लव ने उनके जन्मदिन पर कुछ रोचक किस्से बताए। 

बकौल विप्लव - "इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। एक बार रफी साहब किसी काम से दिल्ली आए थे, तब उन्होंने इंदिरा गांधी से मुलाकात किया। बातचीत में उन्होंने इंदिरा गांधी से किशोर कुमार के गानों पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए आग्रह किया। उनके आग्रह पर इंदिरा गांधी ने प्रतिबंध हटा दिया। किशोर कुमार के गाने आकाशवाणी पर बजने शुरू हो गए।"

विप्लव ने आगे बताया 

किशोर कुमार को जब अचानक पता चला कि उनके गानों पर से प्रतिबंध हटा लिया गया, तब उन्होंने इसकी वजह पता लगाने की कोशिश की। जब उन्हें पता चला कि यह सब रफी साहब की वजह से हुआ तो वे आकर रफी साहब से मिले। उन्होंने कहा कि आपने मेरी इतनी मदद की और मुझे संकेत तक नहीं दिया। रफी ने कहा कि यह तो बहुत छोटी बात है। इसे कभी किसी को बताना मत कि मैंने आपकी कोई मदद की है। रफी साहब के मौत के बाद उनका उनके पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन करने गए किशोर कुमार बहुत देर तक रोते रहे। वहां उन्होंने खुलासा किया कि अब रफी साहब नहीं रहे, तब उनका दिया कसम तोड़ते हुए बताता हूं कि उन्होंने मेरी इस तरह से मदद की थी।

एक संगीतकार थे कमल राजस्थानी। संघर्ष के दिनों में वे एक निर्माता से मिले और उनसे काम के लिए रिक्वेस्ट किया। निर्माता ने कमल के सामने शर्त रख दी कि रफी साहब अगर गाने के लिए तैयार हो जाएंगे, तब आपको पक्का काम मिल जाएगा। वे रफी साहब से मिले और उन्हें सब बताया। रफी ने उन्हें डेट दे दिया। प्रोड्यूसर भी यह जान आश्चर्य में पड़ गए कि जिसे कोई नहीं जानता उसके लिए भी रफी साहब गाने के लिए तैयार हो गए। 

जब राजस्थानी साहब को पारिश्रमिक मिला, तब वे रफी साहब के पास लेकर पहुंच गए। रफी साहब उन्हें पारिश्रमिक लौटाते हुए कहा कि आप इसे रख लीजिए और इन पैसों से जूते-कपड़े आदि ले लीजिए, क्योंकि मुंबई दिखावटी दुनिया है। अगर यहां अच्छे से पहनोगे नहीं, तब कोई काम नहीं देगा। कहने का मतलब कि रफी साहब बड़े नेक दिल थे। उनमें ईगो तो बिल्कुल नहीं था। लोगों की मदद करना तो उनके स्वभाव में कूट-कूट कर बसा था। कहते हैं कि उन्हें तीन बेटियां थीं। कभी बेटियों के विदाई पर रोए नहीं, लेकिन जब 'बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले...' गाने की रिकॉर्डिंग करने के बाद फूट-फूट कर रोने लगे।

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