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जाह्नवी कपूर की 'धड़क' पर पब्लिक दे रही रिएक्शन, एक डॉक्टर ने फेसबुक पर लिखा- 'समीक्षा के लिए श्रीदेवी की आत्मा से माफी चाहता हूं...सॉरी मैम' / जाह्नवी कपूर की 'धड़क' पर पब्लिक दे रही रिएक्शन, एक डॉक्टर ने फेसबुक पर लिखा- 'समीक्षा के लिए श्रीदेवी की आत्मा से माफी चाहता हूं...सॉरी मैम'

Dainikbhaskar.com

Jul 22, 2018, 06:58 PM IST

भोपाल के आयुर्वेदिक डॉक्टर अबरार मुल्तानी ने फिल्म के एंड को बगैर हाथ-पैर का बताया।

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बॉलीवुड डेस्क. जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की मूवी 'धड़क' ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 8.71 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। फिल्म समीक्षकों ने इसे 3.5 से 4 स्टार रेटिंग भी दी है। कई सेलेब्रिटी जाह्नवी और ईशान के काम की तारीफ भी कर चुके हैं। ऐसे में अब फिल्म देखने के बाद पब्लिक ने रिएक्शन देना शुरू किया है। लोग सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ा अपना एंगल भी शेयर कर रहे हैं। इनमें से ही एक नाम, भोपाल के आयुर्वेदिक डॉक्टर अबरार मुल्तानी का भी शामिल है। उन्होंने फिल्म के एंड को बगैर हाथ-पैर का बताया।

ये लिखा है डॉ. अबरार ने : फेसबुक पर लिखा- "हॉल में लोग तब हंस रहे थे जब जब ईशान खट्टर रो रहा था। फिल्म में दोनों (मधुकर-पार्थवी) का बच्चा एक बार भी हंसता हुआ नजर नहीं आया। इससे पता चलता है कि चाइल्ड साइकोलॉजी की डायरेक्टर को रत्तीभर समझ नहीं है। बावड़ी को तालाब बोल रहे थे मतलब आपको राजस्थान के कल्चर का भी कोई ज्ञान नहीं है। राजस्थानी भाषा को जबरन थोपा गया है, क्योंकि उदयपुर में इतनी राजस्थानी कोई नहीं बोलता। इसकी शिक्षा दंगल से ली जा सकती है। एंड में ईशान और उसके बेटे को मार दिया जाता है, बस इसी वक्त पब्लिक सबसे ज्यादा हंसती है, क्योंकि बगैर हाथ पैर का एंड हो जाता है।

- चिकित्सा के नजरिए से कहूं तो मुझे यह बात अच्छी लगी कि दोनों ने भागते वक्त जहां मौका मिला नींद भरपूर ली। इतने तनाव में सोना बहुत जरूरी है। ये बात मैं सभी को बोलता हूं। इस समीक्षा के लिए मैं श्रीदेवी की आत्मा से माफी चाहता हूं। सॉरी मैम। एक बार देख लो भाइयों ताकि अगली बार से आप लोग मेरी समीक्षा पर शक नहीं करोगे।"

कमजोर कर दिया क्लाइमैक्स : अन्य फेसबुक यूजर तैयब पटेल ने लिखा- "जाह्नवी कपूर की फिल्म 'धड़क' शायद उन दर्शकों को पसंद आए जिन्हें मराठी फिल्म 'सैराट' के बारे में कुछ भी नहीं पता। धड़क अपनी मूल कृति से काफी पीछे रह गई। सैराट का मतलब जुनूनी, जंगली, अनपढ़, पगलाया हुआ होता है। यही इस फिल्म की आत्मा थी जिसे मराठी में एक अति साधारण शक्ल सूरत की दसवीं क्लास की छात्रा रिंकू राजगुरू ने जीवंत किया था। पर्दे पर रिंकू की दबंगई देखते बनती थी, लेकिन जाह्नवी कपूर में उस दर्जे के जुनून का अभाव दिखता है।

- बड़े बैनर की वजह से फिल्म को बेवजह भव्य बनाने की कोशिश की गई है। जिससे फिल्म धीमी हो गई। मूल फिल्म में सबसे सशक्त सीन उसका क्लाइमैक्स था जिसे देखकर दर्शक स्तब्ध रह गए थे। उसमें भी अनावश्यक छेड़छाड़ कर कमजोर किया गया है।

ट्विटर पर भी आए रिएक्शन

Vinay Karanam : सैराट देखने के बाद लगा एक महिला ने सबकुछ कर सकती है। धड़क देखने के बाद लगता है पैसा खराब हो गया।

Biswatosh Sinha : एक बात को पक्की हो गई कि धड़क की तुलना में सैराट ज्यादा बेहतर है। दोनों में कोई तुलना नहीं है। अच्छा होगा सैराट को फिर देखें।

Neelima Kulkarni : Disappointing!!!!

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