--Advertisement--

मैं 'मुन्नाभाई 3' की कहानी लिख रहा था, तभी संजय ने अपनी कहानी बताई तो सोचा, चलो अब इसी में घुस जाओ: हिरानी

हिरानी ने बताया कि इस फिल्म में रणबीर को लेने का कारण था कि संजय अपने जवानी के दिनों में उन्हीं की तरह दिखते थे।

Danik Bhaskar | Jun 25, 2018, 05:00 PM IST

बॉलीवुड डेस्क। संजय दत्त के जीवन पर बनी 'संजू' फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया कि 'मैं अगली मुन्नाभाई की कहानी लिख रहा था, तभी मेरी मुलाकात संजय दत्त से हुई। उन्होंने मुझे अपनी कहानी बताई और मैंने फिर मुन्नाभाई को साइड किया और खुद से कहा- चलो अब इसमें घुस जाओ।' उन्होंने बताया 'अब मैं रिलेक्स फील कर रहा हूं। हमने कुछ लोगों को संजू दिखाई है और सभी ने इसे अच्छा बताया है। हम संजू पर पिछले 2-3 साल से काम कर रहे थे। ऐसा लग रहा है जैसे एक और जर्नी खत्म हो गई।'

एक न्यूज चैनल से बात करते हुए हिरानी ने बताया 'फिल्म का सबसे कठिन हिस्सा होता है, कहानी लिखना लेकिन यहां पर कहानी पहले से ही मौजूद थी। हालांकि फिल्म की स्क्रिप्टिंग और स्ट्रक्चरिंग कठिन काम था।' उन्होंने कहा 'अगर आप किसी फिक्शन स्टोरी पर काम कर रहे हैं, तो उसमें अपने हिसाब से बदलाव कर सकते हैं, लेकिन इसमें ऐसा नहीं था। हालांकि फिर भी 'संजू' मेरी बाकी फिल्मों के मुकाबले थोड़े आसान रही।'

हिरानी ने बताया- ऐसे आया 'संजू' बनाने का आइडिया
- हिरानी ने इंटरव्यू में बताया 'जब हम पीके (2014) की शूटिंग कर रहे थे, तब मान्यता ने मुझसे कहा कि मुझे संजय के जीवन पर फिल्म बनानी चाहिए, तो मैंने उनसे कहा 'नहीं'। मैंने उनसे कहा कि संजू की दुनिया मेरी दुनिया से बहुत अलग है।'
- उन्होंने बताया 'तभी संजय पैरोल पर बाहर आए और मैंने उनसे बात की। संजू ने मुझे जेल की लाइफ के बारे में बताया और जब हम बात कर रहे थे, तभी मैंने संजू की कहानी के दूसरे साइड के बारे में सोचा। ये कहानी दोस्ती के बारे में थी, पिता-पुत्र के रिश्तों पर थी और ये उससे भी कहीं ज्यादा थी, जो मैंने सोचा था।'
- उन्होंने बताया 'ज्यादातर लोगों को संजय के बारे में पता था, लेकिन उसके बावजूद मैं जो दिखाना चाहता था, उसके बारे में लोग नहीं जानते थे। मैं बताना चाहता था कि जब संजय को दोषी पाया गया, तो उनके साथ क्या हुआ? उनके पिता के साथ क्या हुआ? उनकी बहन के साथ क्या हुआ? उनके दोस्तों ने कैसे रिएक्ट किया? तभी मैं फिर उनकी बहन प्रिया और पत्नी मान्यता से मिला। उनके दोस्त कुमार गौरव से मुलाकात की।'

हमने इसमें रोमांस नहीं दिखाया, उनकी लड़ाई दिखाई है
- राजकुमार हिरानी ने बताया 'ये पहली बार था जब मैं इतने सारे स्टार्स को लेकर फिल्म बना रहा था और इसमें मुझे फीमेल एक्ट्रेस की भी जरुरत थी, जैसे सोनम कपूर, अनुष्का शर्मा, मनीषा कोयराला, दिया मिर्जा और करिश्मा तन्ना।'
- उन्होंने बताया 'इस फिल्म में रोमांस नहीं दिखाया गया गया है। इस फिल्म में हमने उनके जीवन को दो पहलू को ही लिया है। पहला उनके केस के बारे में और दूसरा उनकी ड्रग्स स्टोरी के बारे में और इन सबसे उनकी लड़ाई के बारे में फिल्म में बताया गया है।'

संजय ने कहा- जो दिखाना हो, दिखाओ
- उन्होंने बताया कि 'जब हमने इस फिल्म को बनाने का फैसला किया तो मैंने संजय से पूछा कि क्या कुछ सेंसर करना चाहते हो? तो उन्होंने कहा- नहीं यार, जो दिखाना चाहते हो, दिखाओ। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं अपनी सजा पहले ही भुगत चुका हूं।'
- उन्होंने बताया 'मुझे नहीं लगता कि किसी के पास भी अपने विवादित जीवन के बारे में ऐसे खुले में बताने का साहस होगा, सिवाय बॉलीवुड स्टार्स के। इसलिए लोग उन्हीं लोगों पर बायोपिक बनाते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं है ताकि बाद में उनपर कोई सवाल न खड़े हों। मुझसे भी लोगों ने पूछा कि आप उनपर क्यों बायोपिक बना रहे हैं, जबकि वो तो जिंदा हैं। तो मुझे यही लगता है कि बायोपिक उन्हीं पर क्यों बननी चाहिए, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।'

रणबीर बहुत मेहनती एक्टर हैं और उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया
- डायरेक्टर ने आगे बताया कि 'मुझे शुरू से ही साफ था कि इस फिल्म में रणबीर ही संजू का रोल करेंगे। इसका कारण था कि अपने शुरुआती दिनों में संजय रणबीर की तरह ही दिखते थे। दोनों की हाइट एक ही है, दोनों फिल्मी बैकग्राउंड से आते हैं। दोनों के पिता एक्टर रहे हैं, दोनों एक ही तरह के वातावरण में रहे हैं और रणबीर संजय के जीवन के बारे में भी जानते थे।'
- उन्होंने कहा 'मैं बहुत भाग्यशाली हूं जो मुझे रणबीर और आमिर जैसे एक्टर्स के साथ काम करने का मौका मिला। रणबीर के अंदर भी आमिर की तरह ही डेडिकेशन है। उसने फिल्म के लिए खुद को झोंक दिया था। वो सुबह 3 बजे आ जाता था। 5-6 घंटे के मेकअप के बाद काम करता था और शाम को 1-2 घंटे मेकअप उतारने में लगते थे। उसके बावजूद रणबीर ने कभी शिकायत नहीं की। उनको यूनिट से कोई भी फोन कर सकता था और उनसे पूछ सकता था।'

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
- हिरानी से जब पूछा गया कि कुछ लोग कह रहे हैं कि इस फिल्म को इसलिए बनाया गया ताकि संजय दत्त की छवि को सुधारा जा सके। तो उन्होंने कहा 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। आप सभी को खुश नहीं रख सकते। आपको खुद से ईमानदार होना जरूरी है। हम सोशळ मीडिया के जमाने में हैं, जहां ये सब होना लाजमी है। हमने इस फिल्म को पूरी ईमानदारी के साथ बनाया है।'