इंटरव्यू / जेल गया तो खुद को फिर से पहचानना, मौका मिला तो कैदियों के लिए वर्कशॉप करने जरूर जाऊंगा: राजपाल यादव



राजपाल यादव। राजपाल यादव।
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राजपाल यादव।राजपाल यादव।

  • राजपाल यादव ने कहा, "देश का कानून सबके लिए एक है, जेल में जो भी आदेश मिला, फॉलो किया"
  • उन्हें चेक बाउंस मामले में तीन महीने की जेल हुई थी

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 02:48 PM IST

बॉलीवुड डेस्क (उमेश कुमार उपाध्याय).  बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव का कहना है कि जेल मे रहने के दौरान खुद को फिर से पहचानने और जिंदगी को नए सिरे से देखने का मौका दिया है। चेक बाउंस मामले में उन्हें तीन महीने की जेल हुई थी। वे इस साल फरवरी के अंत में तिहाड़ जेल से बाहर आए। इस फेज के बारे में दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की।

सवाल: जेल का अनुभव कैसा रहा?

जवाब: देश के सिस्टम की बहुत इज्जत करता हूं। सिस्टम ने मुझे जहां भी खड़ा किया, वहां पूरे अनुशासन से खड़े रहने की कोशिश की। मैं कानून के बाहर नहीं हूं। जेल में जो भी आदेश मिला, सबको फॉलो किया।

सवाल: जिस तरह संजय दत्त को जेल में फर्नीचर बनाने का काम मिला था, आपको वैसा क्या काम मिला?

जवाब: मैं वहां इम्प्रूवमेंट डिग्री के तहत गया था। उसमें काम करने के लिए नहीं था। फिर भी मैं मेरे लायक सभी काम करता था। सांस्कृतिक, नाटक संबंधी वर्कशॉप करवाता था। जेल में रहने के दौरान 50 से अधिक बच्चों से इंटरेक्शन किया होगा। वहां जिन कैदियों के साथ पाठशाला ली, उनका कहना था कि राजपाल भैया अगर आप जैसा समझाने वाला बंदा साथ हो, तब कोई समस्या ही नहीं आ सकती।

सवाल: वहां की सबसे बड़ी सीख क्या लगी?

जवाब: मुझे लगता है कि खुद को पहचानने का मौका मिला। जैसे किसान अपने खेत में पैदा हुए गेहूं को खाने और बेचने के अलावा बीज के लिए भी बचाकर रखता है। मुझे लगता है कि जेल जाने के बाद मुझे भगवान ने बीज बनने वाले गेहूं सा मौका दिया है।

सवाल: जिन कैदियों को आपने सिखाया, क्या उनमें से किसी को कोई रोल मिला?

जवाब: कोई किसी को रोल नहीं दिलवा सकता। मैं किसी को सिखा सकता हूं, पर एक्टर नहीं बना सकता हूं। मेरे वश में एक्टर बनाना होता, तब सबसे पहले मेरे सारे भाई सुपर स्टार होते।

सवाल: वहां पर कोई ऐसा मिला, जिससे दोबारा जाकर मिलना हुआ हो?

जवाब: अभी मौका नहीं मिल पाया, क्योंकि लगातार बिजी हूं। अगर मौका मिला, तब जेल में वर्कशॉप करने जरूर जाऊंगा। वहां पर कई लोग हैं, जिनसे मिलने भी जाना चाहूंगा। एक सिपाही हैं, जिनसे बहुत प्रभावित हूं। वे कैदियों को सुंदरकांड सुनाते हैं। कैदियों की काउंसलिंग करते हैं। उनकी ईमानदारी, सेवा बड़ी अच्छी लगी। उनसे बिल्कुल मिलने जाऊंगा।

सवाल: वहां खाने की व्यवस्था कैसी है? कहते हैं, वहां खाने लायक भोजन नहीं मिलता?

जवाब: नहीं ऐसा नहीं है। जो ऐसा बोलते हैं, उन्हें वहां पर एक बार दौरा करना चाहिए। फिर पता चलेगा कि वहां, खान-पान, व्यवहार और संस्कार किस तरह का होता है। वहां नियमों के तहत सबको हेल्दी खाना दिया जाता है।

राजपाल यादव।

सवाल: जेल की कोई ऐसी बात जिसे जानकर आश्चर्य हुआ हो?

जवाब: वहां पर इंग्लिश, हिंदी पढ़ाई जाती है। सबको लाइब्रेरी दी जाती है। 26 जनवरी और 15 अगस्त को प्रॉपर मोटिवेट किया जाता है। मैं दिसंबर से लेकर फरवरी तक वहां था, सो गणतंत्र दिवस का माहौल देखा। सबको गानों के जरिए मोटिवेट किया जाता है। सभी कैदी भाइयों को बिना किसी भेदभाव पार्टिसिपेट कराने का आदेश होता है। उस दिन तो सबके अंदर पॉजिटिव एनर्जी देखने को मिली, जो बहुत अच्छा लगा। जेल प्रशासन वहां पर काउंसलिंग करवाता है। सबको बहुत सीख मिलती है।

सवाल: एक्टिंग पाठशाला में आगे क्या सिखाएंगे?

जवाब: 'राजपाल की पाठशाला' के तहत एक्टिंग प्रशिक्षण देने की शुरुआत आजमगढ़ (उ.प्र.) से की है। कोशिश होगी कि महीने में 7-8 दिन और एक दिन में 5 घंटे पाठशाला को दूं। अभी तो शुरुआत है, इसे ऑल इंडिया तक पहुंचाना है।

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