--Advertisement--

'वे आसानी से मेरी तारीफ नहीं करते, मम्मी से कहलवा देते हैं'

मैं जब बड़ा होने लगा तो पापा की तरह का एक्टर बनना चाहता था। एक्टिंग के प्रति उनमें कमाल का जुनून और उत्साह है।

Danik Bhaskar | Jun 17, 2018, 10:42 PM IST

मुंबई। मैं जब बड़ा होने लगा तो उन्हीं की तरह का एक्टर बनना चाहता था। एक्टिंग के प्रति उनमें कमाल का जुनून और उत्साह है। हम दोनों में टिपिकल पुराने जमाने के बाप-बेटे वाला संबंध है। मैं तो उनसे आज भी नजरें मिलाकर बातें नहीं कर पाता। वे मेरे साथ उसी तरह का रिश्ता रखना चाहते थे, जैसा मेरे दादाजी यानी उनके पिताजी के साथ उनका था।

बचपन में उनके साथ डिनर टेबल तक पर मैं डरता था। तब मुझे सब्जी बहुत अच्छी नहीं लगती थी। चिकन खाया करता था। उस पर अगर वे मुझे नॉर्मल आवाज में भी सब्जी खाने को कहते तो मेरी रुलाई फूट पड़ती थी। वे स्टैंड लेने वालों में से एक हैं। आलोचनाओं की परवाह नहीं करते और अपनी बात रखकर ही मानते हैं। वे आसानी से मेरी तारीफ नहीं करते। मम्मी से कहलवा देते हैं। जब भी मैं कुछ अच्छा करता हूं, तो वे बहुत कम शब्दों में कहकर निकल जाते हैं। उनका यह तरीका भी मुझे अच्छा लगता है। इस बहाने मैं ज्यादा चार्ज्डअप रहता हूं।

वे बड़े जुनूनी हैं। जो भी चीज या बात उन्हें अच्छी लग जाए, वे उसे शिद्दत से निभाते हैं। जैसे इस उम्र में भी अलग-अलग रोल करने की उनमें चाह है। रिश्तों के मामलों में वे बड़े कमिटेड इंसान हैं। जो इंसान उन्हें भा गया, उनका साथ मरते दम तक निभाने वालों में से एक हैं।