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मेडिकल रिपोर्ट्स में हुआ खुलासा : खुद सोनाली की लापरवाही से चौथी स्टेज तक पहुंचा कैंसर

जून 2018 में भी सोनाली को हिंदुजा हेल्थकेयर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। तब उन्हें गायनिक प्रॉब्लम होने की खबर आई थी।

Danik Bhaskar | Jul 10, 2018, 10:44 AM IST

बॉलीवुड डेस्क. सोनाली बेंद्रे ने बीते बुधवार (4 जुलाई) को सोशल मीडिया पर खुलासा किया था कि उन्हें हाई ग्रेड कैंसर है, जो कि आखिरी स्टेज पर है। सोनाली फिलहाल न्यूयॉर्क में कैंसर का इलाज करा रही हैं। इस खबर के बाद बॉलीवुड और सोनाली के फैंस उनके जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं। इसी बीच मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सोनाली की लापरवाही की वजह से ही उनका कैंसर हाई ग्रेड स्टेज तक पहुंचा।

शरीर में दर्द के बावजूद अनदेखा करती रहीं सोनाली : सोनाली का इलाज कर रहे डॉक्टर्स के मुताबिक, सोनाली को काफी लंबे समय से शरीर में दर्द की शिकायत थी, जिसे वो अनदेखा करती रहीं। जब दर्द असहनीय हो गया और उनकी बीमारी खतरनाक स्टेज तक पहुंच गई तब उन्होंने टेस्ट करवाए, जिसमें कैंसर होने की बात सामने आई। अगर वे समय से जांच करवा लेतीं तो बीमारी का पता शुरुआत में ही चल जाता।

- सोनाली बेंद्रे ने जो पोस्ट ट्विटर और इंस्टाग्राम पर शेयर की, उनमें मेटास्टेटिक कैंसर का जिक्र था। यह कैंसर का काफी गंभीर रूप है। ऐसी स्थिति में कैंसर सेल्स तेजी से शरीर के एक हिस्से से दूसरे में फैलते हैं। इसे फोर्थ स्टेज का कैंसर भी कहते हैं। कैंसर सेल्स फैलने की प्रक्रिया को मेटास्टेसिस कहते हैं।


सुनील शेट्टी ने बढ़ाया हौसला : सुनील शेट्टी ने सोनाली बेन्द्रे के लिए लिखा- सोनाली के लिए स्ट्रेंथ, पावर, प्यार और रिकवरी की प्रार्थना करता हूं। इस समय जिस कठिन वक्त से वो गुजर रही हैं, उतने ही मुश्किल वक्त का सामना उनका बेटा और हसबैंड गोल्डी कर रहे हैं। इस समय उनकी पूरी फैमिली को स्ट्रेंग्थ की जरूरत है।' सुनील ने आगे कहा- 'यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें अगर आप स्ट्रॉन्ग रहेंगे और फैमिली का साथ मिलेगा, तो जल्द बाहर निकल सकते हैं।


क्या होता है हाई ग्रेड कैंसर...

कैंसर का ग्रेड क्या है ये तीन कंडीशन के आधार पर तय होता है। सबसे पहले डॉक्टर कैंसर से प्रभावित और स्वस्थ कोशिकाओं की तुलना करते हैं। स्वस्थ कोशिकाओं के ग्रुप में कई प्रकार के टिश्यू शामिल होते हैं, जबकि कैंसर होने पर भी इससे मिलती-जुलती लेकिन असामान्य कोशिकाओं का ग्रुप जांच में दिखाई देता है, इसे लो-ग्रेड कैंसर कहते हैं। वहीं जब कैंसर प्रभावित कोशिकाओं से स्वस्थ कोशिकाएं जांच में अलग दिखाई देने लगती हैं तो इसे हाई ग्रेड कहते हैं। कैंसर के ग्रेड के आधार पर डॉक्टर पता लगाते हैं कि यह कितनी तेजी से फैल सकता है।