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'सभी मसले अपने हाथ में लेकर मुझे एंबिशन पूरा करने योग्य बनाया, वे मेरे लिए रोल मॉडल थे'

मैं जब मुड़कर देखता हूं तो पिताजी के साथ बिताए प्यारभरे क्षण याद आते हैं।

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2018, 10:12 PM IST
Sajjan Jindal Says on Fathers day

मुंबई। मैं जब मुड़कर देखता हूं तो पिताजी के साथ बिताए प्यारभरे क्षण याद आते हैं। हम उन्हें बाऊजी कहते थे। वे अक्सर कहते थे, 'जब दूसरे लोग दीवार देखते हैं, मैं दरवाजे देखता हूं।' ठीक इसी तरह उन्होंने हमारी परवरिश की। उन्होंने मुझे जो अमूल्य शिक्षा दी वह बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। उनके जोश और लगन से तो सभी परिचित हैं, लेकिन उनका आभामंडल सादगीभरा रहा।

उन्होंने 17 साल की किशोरवय में आंत्रप्रेन्योरशिप की यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा में उन्होंने लाखों जिंदगियों को प्रेरणा दी, जिनमें समाज और बिजनेस से जुड़े लोग भी समान रूप से शामिल हैं। वे कहते थे, 'ओम के पैर नहीं हैं, पहिए हैं।' उन्होंने सच्चे तौर पर एक पीढ़ी को जीना सिखाया। मैं जब छोटा था, वे हमेशा कहते थे सपने देखो। उन्होंने मुझे कभी रोका या टोका नहीं। उन्होंने हमेशा हम भाइयों को फ्री हैंड दिया।

उनका मेहनती व्यक्तित्व न केवल सीखने में जोश भरने की प्रेरणा देता था, बल्कि मुझे कड़े परिश्रम और प्रतिदिन बेहतर होते रहने के लिए प्रेरित भी करता था, मैंने ऐसा ही किया। मेरा लक्ष्य खुद को उनके सामने साबित करना नहीं था, बल्कि उनके विज़न के अनुरूप खुद को योग्य बनाना था। उनका नज़रिया उनके प्यारभरे और दूसरों का ध्यान रखने वाले व्यवहार से उजागर होता था।'

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