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नेशनल अवॉर्ड कॉन्ट्रोवर्सी पर बोले शत्रुघ्न- जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण था

शॉटगन के नाम से फेमस एक्टर और पॉलिटिशियन शत्रुघ्न सिन्हा ने नेशनल अवॉर्ड कॉन्ट्रोवर्सी पर दुख जाहिर किया है।

Danik Bhaskar | May 05, 2018, 12:38 PM IST

मुंबई. शॉटगन के नाम से फेमस एक्टर और पॉलिटिशियन शत्रुघ्न सिन्हा ने नेशनल अवॉर्ड कॉन्ट्रोवर्सी पर दुख जाहिर किया है। उनका कहना है कि जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण था। गौरतलब है कि गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 65वें नेशनल अवॉर्ड का वितरण किया गया। वैसे तो ये अवॉर्ड्स राष्ट्रपति के हाथों दिए जाते हैं। लेकिन इस बार पहले ही यह अनाउंसमेंट किया गया कि राष्ट्रपति सिर्फ 11 लोगों को अवॉर्ड देंगे, जबकि बाकी लोगों को सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और राज्यवर्धन सिंह राठौर के हाथों यह अवॉर्ड दिया जाएगा। 53 लोगों ने किया सेरेमनी का बायकॉट...

- राष्ट्रपति ने तय समय पर जाकर 11 लोगों को नेशनल अवॉर्ड दिया। इनमें मरणोपरांत श्रीदेवी का बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड उनके पति बोनी कपूर और बेटियों जाह्नवी और ख़ुशी को सौंपा गया। वहीं, दिवंगत एक्टर विनोद खन्ना का दादा साहब फाल्के अवॉर्ड उनके बेटे अक्षय खन्ना और दूसरी पत्नी कविता खन्ना को सौंपा गया। 67 हस्तियों को यह अवॉर्ड स्मृति ईरानी और राज्यवर्धन सिंह राठौर ने दिया। जबकि 53 लोग बहिष्कार करते हुए सेरेमनी से गायब रहे।

शत्रुघ्न बोले- इस दुर्भाग्य को टाला जा सकता था

- कॉन्ट्रोवर्सी को लेकर शत्रुघ्न कहते हैं, "जो हुआ, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। इसे टाला जा सकता था। मैं पर्सनली राष्ट्रपति को जानता हूं। वे बिहार के राज्यपाल रहे हैं और बेहतरीन इंसान भी हैं। मुझे लगता है कि उनका उद्देश्य किसी को दुखी करना नहीं हो सकता। लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए थी। आर्टिस्ट देश का गौरव हैं। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान देने के लिए बुलाकर आप किसी और के हाथों उन्हें अवॉर्ड नहीं दे सकते।"

स्मृति ईरानी को लेकर यह बोले शत्रुघ्न

- शत्रुघ्न ने इस दौरान कहा कि वे स्मृति की योग्यता पर संदेह नहीं जता रहे। लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति देते हैं। फिर कोई और इन्हें कैसे दे सकता है। इसमें ऐसा भी नहीं हो सकता कि राष्ट्रपति चुनिंदा लोगों को यह सम्मान दे दें और बाकी को छोड़ दें। शत्रुघ्न ने राष्ट्रपति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे इस सम्मान के लिए वक्त क्यों नहीं निकाल सके। जब प्रतिभा पाटिल और दूसरे राष्ट्रपतियों को कभी इसमें कोई परेशानी नहीं हुई तो फिर इस बार यह परम्परा टूट कैसे गई।

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