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गणपति बप्पा के इस धाम का है इतना मान कि नंगे पैर चलकर आते हैं बड़े-बड़े सितारे

3 वर्ष पहले
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मुंबई. प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश भक्तों के दुख हरने के लिए जाने जाते हैं इसलिए इन्हें दुखहर्ता और सुखकर्ता कहते हैं। मुंबई स्थित प्राचीन मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर भी इन्हीं सुखकर्ता को समर्पित  है। इस मंदिर को जिस दानवीर महिला ने बनवाया था, उनकी कोई संतान नहीं थी।  उन्होंने इस उद्देश्य से यह मंदिर बनवाया था कि यहां पर मन्नत मांगने वाली महिला कभी नि:संतान नहीं रहेगी। कालांतर में यह मंदिर सभी भक्तों की मन्नतों की पूर्ति के लिए काफी प्रसिद्ध हुआ। यहां पर आम लोगों के साथ कार्पोरेट जगत, राजनीति और बॉलीवुड की नामचीन हस्तियां भी आशीर्वाद पाने नंगे पैर दौड़ी आती हैं। 

1982 में जब कुली की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन घायल हो गए थे और कोमा में चले गए थे तो उनकी पत्नी जया नंगे पैर प्रार्थना करने सिद्धि विनायक मंदिर आती थी। लेकिन वह यह देखकर हैरान रह जातीं कि वहां पहले से ही हजारों लोग अमिताभ की सलामती की दुआ मांग रहे होते थे। कुछ ही दिनों बाद अमिताभ कोमा से बाहर आ गए और पूरी तरह से ठीक भी हो गए। इसके बाद से पूरा बच्चन परिवार हर बड़े मौके पर सिद्धिविनायक मंदिर पहुंच कर बप्पा से आशीर्वाद प्राप्त करता है। 

1) 119 साल पहले बना था ये सिद्धिविनायक मंदिर

सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 19 नवंबर, 1801 में हुआ था। इस मंदिर का मुख्य हिस्सा सिर्फ 3.6 वर्ग मीटर में स्थित है। इसकी दीवारें 450 मीमी चौड़ी हैं। यह मंदिर मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में काका साहेब गाडगिल मार्ग और एसके बोले मार्ग पर स्थित है। सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण एक ठेकेदार लक्ष्मण विठू पाटिल ने किया था।लक्ष्मण विठू को मंदिर के निर्माण के लिए धन एक अमीर मराठी दानवीर महिला देऊबाई पाटिल ने दिया था।

देऊबाई माटुंगा नि:संतान थी। एक दिन गणपति  की पूजा करते समय उनके मन में आया कि क्यों न ऐसे मंदिर का निर्माण करवाया जाए जहां भगवान से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद लिया जा सके। इसी विचार के बाद उन्होंने इस मंदिर के लिए धन दिया। 

यह मंदिर 'नवसाचा गणपति' के नाम से भी प्रसिद्ध है। मराठी भाषा में इसे 'नवसाला पवानारा गणपति' भी कहते हैं। सिद्धिविनायक की पाषाण प्रतिमा एक खास तरह की आकृति में बनी हुई है, जो शायद ही कहीं और मौजूद हो। इसकी ऊंचाई 2 फीट 6 इंच और चौड़ाई 2 फीट है।

मंदिर के गर्भगृह में मौजूद मूर्ति जरा सी दाहिनी तरफ झुकी हुई है भगवान गणपति की चारों भुजाओं में अलग-अलग वस्तुएं हैं। एक हाथ में कमल का फूल, दूसरे में कुल्हाड़ी, तीसरे में जपमाला और चौथे में मोदक-लड्डू से भरा एक कटोरा। बाएं कंधे पर एक सांप भी है, जो आमतौर पर श्रीगणेश प्रतिमा पर नहीं होता है।

सिद्धिविनायक मंदिर के पुजारी श्री रामदास के बनवाए मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति विराजमान है। इसका निर्माण साल 1952 में हुआ था। जो भक्त सिद्धिविनायक के दर्शन करने आते हैं, वे हनुमान मंदिर में भी जरूर जाते हैं।

श्री सिद्धिविनायक का  नया मंदिर संगमरमर की एक बहुकोणीय संरचना है जिस पर सोना चढ़ा कलश स्थापित है। मुख्य केन्द्रीय कलश को गणेश प्रतिमा के ठीक ऊपर मंदिर के शिखर पर स्थापित किया गया है। सोना चढ़े इस कलश का वजन 1500 किलोग्राम है 

मंदिर में अन्य चढ़ावों के रूप में सोने की छड़ों और आभूषणों सहित भारी मात्रा में सोना अर्पित किया जाता है। सरकार की स्वर्ण मौद्रिकरण योजना (जीएमएस) में भाग लेने वाला पहला मंदिर बना था। मंदिर का अपना डीमैट अकाउंट भी  है, ताकि श्रद्धालु शेयर, म्यूचल फंड्स, बांड्स आदि भी दान दे सकें।