किस्सा / नितिन मुकेश बोले- 12 की उम्र में पिता ने कहा था, 'शो के पहले मुझे कुछ हो गया तो तुम्हें यह अमानत लौटानी होगी'

singer nitin mukesh performance in bhopal on 15 august
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singer nitin mukesh performance in bhopal on 15 august

दैनिक भास्कर

Aug 19, 2019, 06:33 PM IST

बॉलीवुड डेस्क.  स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पहुंचे गायक नितिन मुकेशअपने पिता की स्मृतियों से जुड़े किस्से बताते हुए भावुक हो गए।

 

एक इमोशनल किस्सा सुनाते हुए उन्होंने बताया - "बात 1962 की है, मैं 12 साल का था। एक अंकल पिता (मुकेशजी) से मिलने आए। पिता ने बताया कि मॉरिशस में टूर होगा उसी संबंध में अंकल मिलने आ रहे हैं। हम होटल पहुंचे। यह शो अगस्त से नवंबर तक चलना था।

 

कुल मिलाकर 30 शोज़ की बुकिंग की गई। इस दौरान ऑर्गेनाइजर ने पिता को एडवांस के तौर पर 3000 रुपए दिए। तब पिता ने मेरी तरफ देखा और मुझसे कहा- इन अंकल ने मुझे 3000 रुपए दिए हैं। अभी यह न मेरे हैं और ना ही तुम्हारे। जब तक मैं शोज़ न कर लूं तब तक यह अमानत अपनी नहीं होगी। यह शो आठ महीने बाद है, इस बीच यदि मुझे कुछ हो गया तो तुम्हें यह पूरी राशि इन्हें लौटानी होगी।

 

पिता की यह बात सुनकर मैं वहीं रोने लगा। घर आया तो मां से कहा कि पिता मुझे ले जाते हैं और वहां ऐसी बात करते हैं। मुझे यह बात उनके जाने के बाद समझ आई कि आखिर वो मुझे क्यों तैयार कर रहे थे। शायद उनका मेरा साथ चंद दिनों का ही था। वो मुझे छोड़कर गए तो मेरी उम्र 25 वर्ष थी।"

स्वतंत्रता दिवस पर हुआ कार्यक्रम

आज के समय के कलाकार बहुत टैलेंटेड हैं। कई ग्रेट कम्पोजर और सिंगर्स हैं, लेकिन पता नहीं क्यों आज का दौर ऐसा है या वेस्टर्न इन्फ्लुएंस है, कि मौसिकी की म्यूजिक पर जोर कम और शोर पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। 40 से 70 के दशक का जो दौर था वो संगीत का स्वर्ण दौर था। मुझे नहीं लगता कि आने वाले दिनों में ऐसे गीत लौटकर आएंगे। क्योंकि उन दिनों गीत बनाने वाले सिचुएशन को देखकर एक-एक गीत पर घंटों बैठकर काम करते थे। तब एक गीत तैयार किया जाता था। तब राजकपूर की एक फिल्म में 10 गीत होते थे, सभी सुपरहिट होते थे। आज देखते हैं कि इतना टैलेंट होने के बाद भी 10 ‌फिल्मों में से एक गीत हिट होता है और वो भी कुछ दिन तक हिट रहता है। आज का ऐसा गीत बताइए जो 70 साल बाद आप सुनेंगे। 

27 जुलाई 1976 को पिता के साथ अमेरिका के टूर पर निकला। पूरा एक महीने हम साथ रहे और 27 अगस्त को पिता ने शरीर छोड़ा। वो एक महीना सिर्फ मेरे साथ थे। परिवार का कोई भी व्यक्ति साथ नहीं था। वो एक महीने की स्मृतियां अभी भी भुला पाना मुश्किल है।

रवींद्र भवन में जाने कहां गए वो दिन.., क्या खूब लगती हो…, छोड़ो कल की बातें…, मेरा रंग दे बसंती चोला… जैसे गीतों से स्वतंत्रता दिवस की शाम को सुमधुर किया नितिन मुकेश ने। वह स्वराज संस्थान संचालनालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। संस्कृति मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ, मुख्य सचिव एसआर मोहंती, संस्कृति प्रमुख सचिव पंकज राग सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित थे। 

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