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राखी भाई मदन माेहन को ही था लता मंगेशकर को डांटने का अधिकार, ताउम्र निभाया बहन को दिया वचन

म्यूजिक डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म 1948 में आई आंखें में लता मंगेशकर से गाने गवाना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

Dainik Bhaskar

Aug 25, 2018, 06:59 PM IST
unique relation of brother madan mohan with his sister lata mangeshkar

बॉलीवुड डेस्क. मायानगरी जितनी अपनी फिल्मों के लिए मशहूर है, उतनी यहां बनने वाले रिश्तों के लिए भी। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी थे, जिन्हे लोगों ने मरते दम तक निभाया। उन्हीं में से एक भारत रत्न लता मंगेशकर और म्यूजिक डायरेक्टर मदन मोहन का रिश्ता। लता और मदन मोहन की मुलाकात पहली बार एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी। तब से लेकर मदन मोहन की आखिरी

लता के मदन भैया को था विशेषाधिकार : लता मंगेशकर और म्यूजिक डायरेक्टर मदन मोहन का रिश्ता बहुत ही अनूठा था। बात 1948 की है जब लता फिल्म आंखें में नहीं गा सकीं। यतीन्द्र नाथ मिश्र की किताब ‘लता सुर गाथा’ में लता ने मदन मोहन के साथ अपने रिश्ते की कहानी सुनाते हुए बताया था कि एक बार मदन मोहन लता के घर पहुंचे, उस दिन रक्षाबंधन था। मदन मोहन इस बात से बेहद दुखी थे कि उनकी पहली फिल्म में लता नहीं थीं। फिर वे लता को घर ले गए और कहा- आज राखी है ये लो मेरी कलाई पर बांधो। मदन मोहन ने लता से कहा कि तुम्हें याद है जब हम पहली बार मिले थे तब हमने भाई-बहन का गीत गाया था। आज से तुम मेरी छोटी बहन और मैं तुम्हारा मदन भैया। आज से तुम अपने भाई की हर फिल्म में गाओगी।

मरने के बाद भी वादे पर कायम रहे : लता से किया हुआ वादा मदन मोहन के निधन के बाद भी पूरा किया गया। दरअसल जब 2004 में फिल्म वीर-जारा में मदन मोहन के कम्पोजिशन को यूज किया गया तब सारे गाने लता मंगेशकर ने ही गाए थे। इसके पहले 1975 में मदन मोहन के निधन के बाद रिलीज हुईं तकरीबन 6 फिल्मों में उनका संगीत लिया गया। जिसमें से कई में लता मंगेशकर की आवाज सुनने को मिली।

इनका किस्सा भी गजब है: बड़ी बहन का रुतबा और प्यार क्या होता है, किंग खान और उनकी बहन शहनाज का रिश्ता इसका जीता-जागता उदाहरण है। अपने परिवार के बावजूद शाहरुख उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ते। शहनाज की इस हालत के पीछे एक किस्सा है। बात उस वक्त की है जब पता चला कि शाहरुख के पिता ताज मोहम्मद को कैंसर हो गया था। लंबे इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। निधन के बाद ताज मोहम्मद की बॉडी घर आई तब शहनाज स्कूल गईं थीं। घर आते ही जैसे शहनाज ने अपने पिता को देखा तो वे बेहोश हो गईं। दो दिन तक होश नहीं आया, न ही उनकी आंखों से आंसू गिरे। इसके कारण शहनाज डिप्रेशन में चली गईं। वे बीमार रहने लगीं, यही वजह थी कि शहनाज की शादी भी नहीं हुई।

- शाहरुख ने DDLJ शूटिंग में बिजी हो गए, इसी बीच शहनाज की तबियत इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टर्स ने उनके बचने की उम्मीद भी छोड़ दी। इस बीच शाहरुख इलाज के लिए उन्हें स्विटजरलैंड ले गए।
- उस वक्त शहनाज ठीक तो हो गईं, लेकिन न वे किसी से मिलती हैं न ही बात करती हैं। बस छोटा भाई और उसकी फैमिली ही शहनाज की दुनिया है।

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