ठगों का सच / अंग्रेज कर्नल स्लीमैन ने किया था खात्मा, फिर किया था पुनर्वास; ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान में देखने नहीं मिलेंगी ये बातें



unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
X
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan
unknown unheard facts of thugs not seen in thugs of hindostan

  • ठगों की भाषा रामासी थी। जो गुप्त और सांकेतिक थी। 
  • मूल औजार तपौनी का गुड़, रूमाल और कुदाली होता था। 
  • ठग अपने शिकार को बनिज कहते थे, जिनका रूमाल से गला घोंटा जाता था।
  • ठग काली के उपासक थे, जिसमें मुस्लिम ठग भी शामिल थे।
  • ठग बेहराम ने 931 और आमिर अली ने 700 से ज्यादा हत्याएं की थी।

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2018, 03:21 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. दिवाली पर आमिर खान और अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' रिलीज हो चुकी  है। फिल्म के निर्माताओं  का दावा है यह फिल्म 1839 में  आई फिलिप मीडोज टेलर की बुक 'कन्फेशन ऑफ ए ठग' पर आधारित है, लेकिन फिल्म के ट्रेलर, टीजर या मेकिंग वीडियोज में कहीं भी कर्नल स्लीमैन का जिक्र नहीं आया है, जिसे ठगों के खात्मे का क्रेडिट दिया जाता है। हालांकि संभावना कम है कि ये बातें आपको ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान में देखने मिलें। 

 

एमपी से जुड़ा है रिश्ता : 17वीं और 18वीं सदी के दौरान बुंदेलखंड से विदर्भ और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ठगों का आतंक था। बहराम और आमिर अली एेसे ठग थे जिनके नाम पर सबसे ज्यादा हत्याएं इतिहास में दर्ज हैं। ठगों के खात्मे का मुख्य केन्द्र जबलपुर रहा। जहां वर्तमान में मौजूद माॅडल हाई स्कूल पर पकड़े गए ठगों को सामूहिक फांसी दी जाती थी। 

 

फैमिली बिजनेस की तरह थी ठगी : कटनी के स्लीमनाबाद व आसपास के कुछ क्षेत्रों में एक वर्ग के लिए ठगी फैमिली बिजनेस था। ये लोग राहगीरों को ठगकर आैर लूटकर ही अपना पेट पालते थे। कई क्षेत्र और भी थे जहां शाम ढलने के बाद निकलने का मतलब था जान जोखिम में डालना। लूट और ठगी करने वालों में किशोर और बच्चे तक शामिल रहते थे।

 

आज भी बाकी हैं निशान : ठगी के खात्मे के पीछे एक पहल भी थी, जिसके कारण ठगी पृथा बंद हो सकी। ठगों के खात्मे के बाद उनके बच्चों को जीवनयापन करने कुछ और सिखाना जरूरी था। जबलपुर में रिफॉर्मेट्री स्कूल खोला गया था। आज यहां पॉलीटेक्निक कॉलेज है। इस स्कूल में ठगों के बच्चों को दूसरे काम सिखाए जाते थे। जिसमें दरी बनाना प्रमुख था। जहां ये काम करते थे उसे आज दरीखााना के नाम से जानते हैं। 

 

कर्नल स्लीमैन के नाम पर स्लीमनाबाद : 1809 मे इंग्लैंड से कैप्टन विलियम स्लीमैन को ईस्ट इंडिया कंपनी ने गायब हो रहे लोगों का पता लगाने की जिम्मेदारी दी। स्लीमैन को पता चला कि 200 लोगों का ऐसा गिरोह है जो लूटपाट करने हत्याएं करता था। जिसका सरदार बेरहाम ठग था। वह हाईवे और जंगलों पर साथियों के साथ घोड़ों पर घूमता था। इस केस के लिए विलियम स्लीमैन को इंचार्ज और जबलपुर में हेड क्वार्टर बनाया गया।

 

10 साल में पता चला सच : 10 साल की मशक्कत के बाद बहराम पकड़ा गया। और तब सारी चीजों का खुलासा हुआ। जबलपुर से करीब 75 किमी दूर कटनी जिले के कस्बे स्लीमनाबाद को कर्नल हेनरी विलियम स्लीमन के नाम से ही बसाया गया है। कर्नल स्लीमैन ने ही 1400 ठगों का फांसी दी थी। बचे हुए ठगों को समाज से जोड़ने उनका पुनर्वास भी कराया था। 

 

गुरंदी बाजार से रिश्ता : ठगी जैसे पेशे के खात्मे के बाद बचे हुए ठग गुरंदे कहलाए। जिंदा बचे ठगों, बच्चों और परिवार का जबलपुर में ही वर्तमान गुरंदी बाजार में पुनर्वास किया गया। इसलिए इसे गुरंदी बाजार कहा जाने लगा। गुरंदी में हर वह चीज मिला करती थी, जिसका मिलना उस दौरान किसी और जगह मिलना नामुमकिन होता था।

 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना