--Advertisement--

सुनील दत्त की वजह से फिल्मों में आ पाए थे विनोद, आखिरी दिनों में ऐसी हो गई थी हालत

70 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए विनोद खन्ना की 27 अप्रैल को पहली डेथ एनिवर्सरी है।

Danik Bhaskar | Apr 27, 2018, 11:42 AM IST
आखिरी वक्त में बीमारी के कारण ऐसी हो गई थी विनोद खन्ना की हालत। आखिरी वक्त में बीमारी के कारण ऐसी हो गई थी विनोद खन्ना की हालत।

मुंबई. 70 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए विनोद खन्ना की 27 अप्रैल को पहली डेथ एनिवर्सरी है। उन्हें ब्लैडर कैंसर था जिसके चलते कुछ महीने वे अस्पलात में भी एडमिट रहे और वहीं उनकी मौत हो गई। विनोद खन्ना की मौत से पहले गिरगांव के एचएन रिलायंस फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर से उनकी एक फोटो सामने आई थी जिसमें उन्हें पहचान पाना भी मुश्किल हो रहा था। दरअसल डेथ से पहले वे बेहद कमजोर हो गए थे सामने आई फोटो में उनकी तेजी से गिरती सेहत का अंदाजा साफ लग रहा था। बता दें, बीमारी के चलते ही खन्ना 2015 में शाहरुख-काजोल स्टारर ‘दिलवाले’ के बाद फिल्मों में नजर नहीं आए। उड़ी थी विनोद खन्ना की मौत की झूठी खबर...


- मौत से पहले एक्टर और सांसद विनोद खन्ना की जो फोटो इंटरनेट पर वायरल हुई थी उसे देखकर उनके निधन की अफवाह भी उड़ा दी गई।
- झूठी खबर इस तरह तेजी से फैली थी कि मेघालय बीजेपी के नेताओं ने तो उनको दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि तक दे दी थी।
- मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में स्वच्छ भारत अभियान के एक कार्यक्रम के दौरान विनोद खन्ना के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। हालांकि बाद में राज्य के पार्टी महासचिव डेविड खरसाती को बताया गया कि वे अभी जीवित हैं, तो उन्होंने आनन-फानन में एक बयान जारी करते हुए माफी मांगी थी।

छुपाकर रखी गई थी विनोद खन्ना की बीमारी
- 144 फिल्मों में काम कर चुके विनोद खन्ना को असल में क्या बीमारी थी, इस बारे में उनके मौत से पहले तक किसी तो भी पता नहीं था। हालांकि मौत से पहल खबरें आने लगी थीं कि उन्हें कैंसर है।
- रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बेटी श्रद्धा को धक्का ना लगे, इसके लिए विनोद और उनकी दूसरी पत्नी कविता ने कैंसर की बात को लंबे वक्त तक सीक्रेट रखा था।
- बता दें, विनोद के परिवार में पहली पत्नी गीतांजलि से बेटे राहुल-अक्षय हैं। दूसरी पत्नी कविता से बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा हैं।

सुनील दत्त के जरिए हुई बॉलीवुड में एंट्री
- विनोद की सुनील दत्त से एक पार्टी में मुलाकात हुई थी। उस वक्त सुनील के छोटे भाई सोम दत्त अपने होम प्रोडक्शन में ‘मन का मीत’ बना रहे थे। इसमें सुनील दत्त को अपने भाई के किरदार के लिए किसी नए एक्टर की तलाश थी।
- विनोद खन्ना की पर्सनैलिटी, ऊंची कद-काठी को देखकर सुनील दत्त ने उन्हें वह रोल ऑफर किया। यह फिल्म 1968 में रिलीज हुई और बॉलीवुड में विनोद खन्ना की एंट्री हुई।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- इंजीनियर बनना चाहते थे विनोद खन्ना....

पाकिस्तान में जन्मे, बनना चाहते थे इंजीनियर 

 


- विनोद खन्ना 6 अक्टूबर, 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्मे। बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई में बस गया। पिता टेक्सटाइल बिजनेसमैन थे, लेकिन विनोद साइंस के स्टूडेंट रहे और पढाई के बाद इंजीनियर बनने का सपना देखा करते थे। 
- पिता चाहते थे कि वे कॉमर्स लें और पढ़ाई के बाद घर के बिजनेस से जुड़ें। स्कूलिंग के बाद पिता ने उनका एडमिशन एक कॉमर्स कॉलेज में भी करा दिया था, लेकिन विनोद का पढ़ाई में मन नहीं लगा।

पिता ने तान दी थी बंदूक


- जब विनोद खन्ना ने सुनील दत्त का ऑफर कबूल किया तो उनके पिता नाराज हो गए। उन्होंने विनोद पर बंदूक तान दी और कहा कि यदि वे फिल्मों में गए तो वो उन्हें गोली मार देंगे।
- हालांकि, विनोद की मां ने उनके पिता को इसके लिए राजी कर लिया। पिता ने कहा कि अगर विनोद दो साल तक कुछ ना कर पाए तो उन्हें फैमिली बिजनेस ज्वाइन करना होगा।

करियर का टर्निंग प्वाइंट


- विनोद के करियर में टर्निंग प्वाइंट 1971 में आया। उसी साल में उन्होंने सुनील दत्त और अमिताभ बच्चन स्टारर ‘रेशमा और शेरा’ की। गुलजार की ‘मेरे अपने’ में उनकी एक्टिंग की तारीफ हुई। इस साल उन्होंने करीब 10 फिल्में कीं।
- 1973 में गुलजार के डायरेक्शन में बनी ‘अचानक’ से उन्होंने बॉलीवुड में अपने पैर मजबूती से जमा लिए।