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हैप्पी बर्थडे बिग बी / स्व. हरिवंश राय बच्चन के शब्दों में अमिताभ का आगमन: मेरे पिता लौटे



Amitabh Bachchan Happy Birthday | Amitabh Bachchan Father Harivansh Rai Bachchan Describe Moment It Felt Real
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Amitabh Bachchan Happy Birthday | Amitabh Bachchan Father Harivansh Rai Bachchan Describe Moment It Felt Real

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 12:01 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. 11 अक्टूबर 1942 का दिन, जब अमिताभ का जन्म होने वाला था, तब उनके पिता हरिवंश राय बच्चन ने अपनी मन:स्थिति का वर्णन कागज पर उकेर दिया था।हरिवंश राय ने लिखा था- "रात को मैंने एक विचित्र स्वप्न देखा। मैंने देखा कि जैसे चक वाला हमारा पुश्तैनी घर है। उसमें पूजा की कोठरी में बैठे मेरे पिता आंखों पर चश्मा लगाए सामने रेहल पर रामचरितमानस की पोथी खोले मास पारायण के पांचवें विश्राम का पाठ कर रहे हैं। इसमें वह प्रसंग है जिसमें अपनी अर्धांगिनी शतरूपा के साथ मनु तपस्या करते हैं और जब उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट होते हैं तब वे उनसे वरदान मांगते हैं, 'चाहऊं तुम्हहिं समान सुत' और मैं तेजी के साथ पूजा की कोठरी के सामने बैठा सुन रहा हूं। पिताजी के मुख से एक-एक शब्द स्पष्ट मैंने सुना है- 

आपु सरिस खोजो कहं जाई।

 नृप तब तनय होब मैं आई।।

 

और फिर तेजी ने मुझे जगाया : उन्होंने आगे लिखा है-  तभी तेजी ने मुझे जगाकर बताया कि उनके पेट में पीड़ा आरंभ हो गई है। ब्रह्म मुहूर्त था। सपना इतना स्पष्ट था और मैं उससे इतना अभिभूत था कि मैं उसे बगैर तेजी से बताए न रह सका। तर्कवाली व्याख्या तो सपने की मैंने बाद में की। पर उस अधजागे-अधसोए से में मेरे मुंह से निकल गया, 'तेजी, तुम्हारे लड़का ही होगा और उसके रूप में मेरे पिताजी की आत्मा आ रही है। तेजी ने इस सपने को परा प्रकृति का संकेत समझा। उन्हें इनके विषय में संदेह या अविश्वास कभी नहीं रहा।

मनोवैज्ञानिक समाधान शायद स्वप्न का यह है कि उस दिन मुझे पिताजी की बहुत याद आई थी, मानस पाठ करते हुए उनका रूप बचपन से मेरे दिमाग में बैठा था, तेजी के प्रसविनी बनने का समय आ पहुंचा था और इस संबंध में कई तरह के प्रश्न मेरे मन में उठते थे। मेरे अवचेतन ने जैसे स्वप्न के रूप में उनका उत्तर दिया। पर इस उत्तर से न तो मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं और न रहस्य पर से पूरी तरह परदा ही हटा है।

अपने पारिवारिक जीवन में मुझे कई बार इसका अनुभव हुआ है, जैसे मेरे पिताजी की आत्मा हमारे बीच सक्रिय है। मैं तर्क से सिद्ध नहीं कर सकता। सब कुछ तर्क से सिद्ध किया भी जा सकता और हैमलेट के शब्दों में कहना पड़ता है- "ओ होरेशियो, सुनो हमारे दर्शन की कल्पना जहां तक पहुंच सकी है, नील-गगन में उसके आगे बहुत पड़ा है।"

 

अपरान्ह में दिनभर की कठिन प्रसव पीर के पश्चात तेजी ने पुत्र 'अमिताभ' को जन्म दिया।

 

(अहा! जिंदगी के प्रथम अंक से साभार)

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