फादर्स डे / किसी को पसंद नहीं थी एक्टिंग तो किसी ने किया सपोर्ट, एक्टर्स ने शेयर की पिता से जुड़ी खास बातें



अर्चना पूरन सिंह अर्चना पूरन सिंह
मानव गोहिल मानव गोहिल
कीकू शारदा कीकू शारदा
शक्ति अरोरा शक्ति अरोरा
शिविन नारंग शिविन नारंग
अवनीत कौर अवनीत कौर
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अर्चना पूरन सिंहअर्चना पूरन सिंह
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अवनीत कौरअवनीत कौर

Dainik Bhaskar

Jun 16, 2019, 12:06 PM IST

टीवी डेस्क. रविवार को फादर्स डे मनाया जा रहा है। सभी पिता अपने बच्चों के जीवन में अहम रोल अदा करते हैं। पिता अपने बच्चों को कुछ ऐसी बातें जरूर बताते हैं जो उनके जीवन को नई दिशा देती है। हर छोटे-बड़े स्टार्स के पास अपने फादर से जुड़ी ढेरों रोचक कहानियां हैं। आज आपको कुछ चुनिंदा टीवी स्टार्स और उनके पिता से जुड़ी रोचक बाते बताने जा रहे हैं...

काश! पिताजी के रहते इस ऊंचाई पर पहुंच पाती- अर्चना पूरन सिंह

  1. मेरे पिता चौधरी पूरन सिंह उत्तर प्रदेश के बहुत बड़े लॉयर थे। वे संजय गांधी के भी लॉयर रहे हैं। उन्होंने कभी हम भाई-बहनों में लड़का-लड़की का भेदभाव नहीं रखा। मैं अपने फादर की लिटरली पूजा करती थी। 19 साल की उम्र में घर से निकलकर मुंबई आई। उन्हें दिखाने के लिए बहुत बड़ा बनना चाहती थी। मेरे करियर की कुछ हद तक ऊंचाई उन्होंने जरूर देखी, लेकिन अफसोस कि आज जिस मुकाम पर मैं हूं, यह देखने के लिए वो साथ नहीं हैं। पार्किंसंस बीमारी के के चलते कई सालों तक बिस्तर पर रहे और फिर उनका देहांत हो गया। आज शोहरत, दौलत सब है, पर अफसोस यह कि पिता साथ नहीं हैं।

  2. पापा ने कहा तुम पोस्ट ग्रेजुएट नहीं हो, इसलिए कम सैलेरी है- मानव गोहिल

    मेरे पापा केमिकल ट्रेडिंग का बिजनेस करते थे। मैं उनके पास नौकरी करता था, लेकिन वो मुझे प्यून से भी कम पेमेंट देते थे। एक दिन जब पिताजी से पूछा कि आप मुझे मात्र 900 रुपए ही देते हो, जबकि प्यून को 1200 रुपए देते हो। तब पापा कहने लगे, वो पोस्ट ग्रेजुएट हैं और तुम पोस्ट ग्रेजुएट नहीं हो। इसी बात पर पापा के पास से नौकरी छोड़कर कहीं और नौकरी की तलाश में निकल पड़ा। मुझे सिटी बैंक में नौकरी मिली, वहां टाई पहनकर क्रेडिट कार्ड बेचने लगा। लेकिन यहां मुझे अपग्रेड की जरूरत महसूस हुई, तब पिताजी की कही बात याद आई। अहसास हुआ कि अगर कुछ बनना है, तो पोस्ट ग्रेजुएशन करना होगा। फिर मुंबई से वापस लौटकर बडोदरा आया और बिजनेस मैनेजमेंट से पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

  3. कभी एक्टिंग लाइन चुनने से पिताजी नाराज थे, अब प्राउड फील करते हैं - कीकू शारदा

    मैं मारवाड़ी बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखता हूं। एक्टिंग के बारे में न तो मेरे परिवार को कोई जानकारी थी और न ही यह प्रोफेशन उन्हें पसंद था। वे मेरे एक्टिंग में करियर बनाने के फैसले पर खुश नहीं थे। मेरे पिता हमेशा कहते थे कि तुम रोज ऑफिस आकर अपना काम सीखते रहो। फिर भी एक्टिंग करनी है, तो इसे हॉबी के तौर पर करो, पर ऑफिस आना जरूरी है। मैं ऑफिस जाया करता था। लेकिन जब मेरा पहला सीरियल हातिम आया, तब पिताजी ने रियलाइज किया कि सिर्फ पैसा ही सबसे बड़ी चीज नहीं, पॉपुलैरिटी भी अहम होती है। अभी थोड़े वक्त पहले पैतृक शहर जोधपुर में हमारे माहेश्वरी समाज का एक कार्यक्रम था। वहां पर मुझे भी बुलाया गया था। पिताजी को साथ ले गया, वहां पहुंचने पर क्राउड अनकंट्रोल हो गया। यह मूवमेंट देखकर पिताजी बहुत प्राउड फील कर रहे थे। 

  4. पिताजी से सीखी एक-एक रुपए की अहमियत- शक्ति अरोरा

    मेरे पिताजी अंधेरी, मुंबई में गिफ्ट की शॉप चलाते थे। घर में कमाने वाले पापा अकेले थे, जबकि मम्मी, मैं और मुझसे बड़ी दो बहनों के खर्च का बोझ उनके कंधे पर था। फाइनेंशियल कंडीशन इतनी अच्छी नहीं थी। पापा के साथ मैंने काफी समय तक शॉप चलाई। पिताजी बड़े हार्डवर्किंग हैं। उनसे सीखा कि एक-एक रुपया कैसे कमाया जाता है, उसके लिए कितना श्रम करना पड़ता है, उसकी अहमियत क्या होती है। लाइफ में स्ट्रगल, उसे फेस करने के लिए कैसे डटे रहना चाहिए, ये सारी बातें पिताजी से सीखी। उनकी बातें इंस्पायर करती हैं। 

  5. पिताजी से सीखा कानून का पालन करना- शिविन नारंग

    मेरे पिताजी ने मुझे खुद गाड़ी चलाना सिखाया। वे चाहते तो मुझे ड्राइविंग स्कूल भेज कर ड्राइविंग सीखा सकते थे, लेकिन उन्होंने खुद सिखाया। इसके पीछे मकसद यह था कि सिग्नल का पालन करने, बाएं चलने, लोगों की जान की परवाह सहित छोटी-छोटी बातों को बड़ी बारीकी से वो मुझे समझा सकें। ताकि न कभी मेरी लाइफ में कोई प्रॉब्लम आए और न ही दूसरों को दिक्कत हो। इस तरह जीवन मूल्य से जुड़ी ऐसी तमाम बातें हैं, जो पिताजी ने सिखाई। यही वजह है कि आज न सिर्फ सड़क पर, बल्कि घर-बाहर सब जगह एक जिम्मेदारी का हमेशा अहसास बना रहता है।

  6. पापा की वजह से एक्टिंग का सपना हुआ पूरा- अवनीत कौर

    'अलादीन- नाम तो सुना होगा' में राजकुमारी यास्मिन का रोल करने वाली अवनीत बताती हैं- 'मैं जालंधर से हूं। मेरी फैमिली में कोई डॉक्टर है तो कोई प्रोफेसर है। किसी के दिमाग में भी नहीं था कि परिवार से कोई एक्टिंग कर सकता है। ऐसे में जब मैंने एक्टिंग में करिअर बनाने की बात कही, तब कई लोगो ने मना किया। लेकिन पापा लोगों की परवाह किए बगैर मुझे सात साल की उम्र में मुंबई लेकर आ गए। फिर तो पापा-मम्मी, मैं और मुझसे छोटा भाई यहीं शिफ्ट हो गए। यहां आकर पापा मुझे जगह-जगह ऑडिशन दिलाने ले गए। मेरे लिए उन्होंने काफी कठिनाइयां भी फेस की। पापा की वजह से ही यहां तक पहुंची हूं। पापा ही थे, जिनकी वजह से एक्टिंग करने का मेरा सपना पूरा हुआ। आज जब जालंधर जाती हूं, तब वही लोग प्राउड करते हैं, जो कल मना कर रहे थे।'

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