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मुंबई / कोई लोकल ट्रेन से तो कोई साइकिल से, सेट पर पहुंचने के लिए कुछ यूं सफर करते हैं टीवी स्टार्स

Dainik Bhaskar

Feb 09, 2019, 07:08 PM IST


रोहिताश गौड़ और राहुल सुधीर रोहिताश गौड़ और राहुल सुधीर
करण सूचक करण सूचक
अदनान खान अदनान खान
राहुल सुधीर राहुल सुधीर
रतन राजपूत रतन राजपूत
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रोहिताश गौड़ और राहुल सुधीररोहिताश गौड़ और राहुल सुधीर
करण सूचककरण सूचक
अदनान खानअदनान खान
राहुल सुधीरराहुल सुधीर
रतन राजपूतरतन राजपूत
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उमेश कुमार उपाध्याय/ टीवी डेस्क. मनोरंजन की चकाचौंध दुनिया में ज्यादातर स्टार्स घर से सेट पर जाने के लिए महंगी गाड़ियां लेकर निकलते हैं, लेकिन कुछ स्टार्स ऐसे भी हैं जो सेट पर पहुंचने के लिए साइकिल और लोकल ट्रेन का सहारा लेते हैं। आखिर दिखावे से दूर ये स्टार्स साइकिल और ट्रेन से सफर क्यों करते हैं? इस बारे में स्टार्स खुद कर रहे हैं खुलासा...

ऐसा होता है स्टार्स का सफर

  1. लोकल ट्रेन का सफर सबसे आसान होता है: रोहिताश गौड़

    ''मुझे लगता है मुंबई लोकल ट्रेन से सफर करना सबसे आसान होता है, क्योंकि सड़क पर ट्रैफिक काफी ज्यादा बढ़ गया है। मैं गोरेगांव में रहता हूं, जबकि ‘भाबीजी घर पर हैं’ का सेट मुंबई से सटे नायगांव में है। सेट पर जाने के लिए ज्यादातर लोकल ट्रेन से ही सफर करता हूं। ट्रेन में अलग-अलग तरह के लोग मिलते हैं, जिनकी कहानियां सुनकर सफर कब कट जाता है, पता ही नहीं चलता।''

  2. अब तो मैं सेट के आसपास ही रेंट पर घर ले लूंगी: रतन राजपूत

    जब मैं ‘संतोषी मां’ सीरियल कर रही थी, उस समय गोरेगांव पश्चिम में रहती थी और मेरा सेट नायगांव में लगा था। उस समय कई बार घर लौटते वक्त लोकल ट्रेन से या अपनी हेयर स्टाइलिश की स्कूटी से आती थी। हर इंसान अपनी कार में अकेला बैठा बोर हो जाता है इसलिए मैंने लंबे सफर की परेशानी को कम करने और आसान बनाने के लिए यह तरीका निकाला था।

  3. साइकिल से जाने पर समय की बचत और वर्कआउट दोनों होता है: करण सूचक

    मैं कांदिवली में रहता हूं, जबकि टीवी शो ‘मेरी हानिकारक बीवी’ का सेट मेरे घर से 10 से 12 किलोमीटर दूर गोरेगांव फीचर स्टूडियो में है। मुंबई में 10 किमी की दूरी भी सड़क से तय करने में एक घंटा लग जाता है। चूंकि 12 घंटे काम आैर आने-जाने में दो घंटा लग जाता है। ऐसे में वर्कआउट करने के लिए समय ही नहीं मिलता है। साइकिल से सफर करने से अपने आपको फिट रखने का मौका मिलता है। दूसरी बात यह है कि समय की भी बचत होती है। साइकिल से 40 मिनट में ही पहुंच जाता हूं।

  4. साइकिल चलाकर अपने बचपन में लौट जाता हूं: राहुल सुधीर

    हमारा सेट जयपुर में लगा है। यहां अलग-अलग लोकेशन पर शूटिंग चलती है। सुबह तो गाड़ी में आता हूं, लेकिन अलग-अलग लोकेशन पर पहुंचने के लिए साइकिल से जाता हूं। साइकिल चलाकर अपने बचपन में लौट जाता हूं, इससे थोड़ा मूड भी अच्छा हो जाता है। दरअसल कैमरा टीम के एक साथी साइकिल लेकर आते थे। उनसे ही मैंने साइकिल मांग ली। पहले भी सेट पर आने-जाने के लिए ट्रेन से ही सफर करता था।

  5. ट्रेन में सफर का मजा ही कुछ और होता है: अदनान खान

    मैं बांद्रा में रहता हूं और ‘इश्क सुभान अल्लाह’ का सेट मीरा रोड में है। सुबह घर से ट्रेन से आता और रात को ट्रेन से जाता था। ट्रेन में बैठकर आराम से सफर करने का मजा की कुछ और होता है। खिड़की से ताजी हवा और पेड़-पौधों का नजारा देखने को मिलता है।

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