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लैला मजनू मूवी रिव्यू: फ़िल्म में नए कलाकार बेहतर, खूबसूरत लोकेशन लेकिन डायरेक्शन कमजोर

अगर आप इसकी तुलना लैला मजनू की अमर प्रेम कथा से कर रहे हैं तो ऐसा नहीं है। फिल्म की कहानी नई है।

Dainik Bhaskar

Sep 07, 2018, 08:07 PM IST
शुरुआत में फिल्म काफी हल्की-फु शुरुआत में फिल्म काफी हल्की-फु

मुंबई. Laila Majnu Movie Review: 1976 में ऋषि कपूर और रंजीता की फिल्म आई थी लैला मजनू। इसका संगीत आज भी हर किसी को लुभाता है। करीब 50 साल बाद इसी शीर्षक से फिर एक फिल्म आई है। फिल्म का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर इम्तियाज अली के छोटे भाई साजिद अली ने किया है। म्यूजिक भी नए जमाने का है। अगर आप इसकी तुलना लैला मजनू की अमर प्रेम कथा से कर रहे हैं तो ऐसा नहीं है। फिल्म की कहानी नई है और इसमें वो फ्लेवर नहीं है जो लैला मजनू के दौर में नजर आता था, या यूं कहें कि जो पिछली लैला मजनू में था।

क्या है कहानी?
- फिल्म की कहानी को दो लाइनों में ही समझा जा सकता है। कश्मीर के दो परिवारों के बीच कारोबारी दुश्मनी और इन्हीं परिवारों के एक लड़के और लड़की के बीच प्यार। शुरुआत में फिल्म काफी हल्की-फुल्की और रोचक तरीके से आगे बढ़ती है। धीरे-धीरे गंभीरता आती है और फिर कुछ खून-खराबा। लीड रोल में दोनों कलाकार नए हैं। अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी। इसके अलावा मीर सरवर और सुमित कौल भी अहम रोल में हैं।

खूबसूरत लोकेशंस
- पूरी फिल्म पर नजर डालें तो आप कह सकते हैं कि कैमरावर्क इस फिल्म की यूएसपी है। कश्मीर की खूबसूरत वादियों को बेहतरीन तरीके से फिल्माया गया है। इसके अलावा संवाद भी काफी अच्छे हैं। अविनाश और मीर सरवर के साथ सुमित कौल की अदायगी आपको प्रभावित करेगी। तृप्ति पर्दे पर काफी खूबसूरत लगी हैं लेकिन उनको अभिनय में काफी सुधार करना होगा। संगीत अच्छा है लेकिन पर्दे पर यह ज्याद बेहतर नजर आता है। फिल्म की कहानी छोटी है लेकिन रोमांटिक फिल्म देखने के शौकीनों को यह पसंद आएगी।


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