क्या है जम्मू-कश्मीर में बवाल पैदा करने वाला आर्टिकल 35 A; जानिए इसके बारे में सबकुछ / क्या है जम्मू-कश्मीर में बवाल पैदा करने वाला आर्टिकल 35 A; जानिए इसके बारे में सबकुछ

इस अनुच्छेद में ऐसा क्या है कि जम्मू-कश्मीर में इसको हटाने का इतना विरोध हो रहा है।

DainikBhaskar.com

Aug 06, 2018, 12:00 PM IST
इस अनुच्छेद में कुछ बातें ऐसी इस अनुच्छेद में कुछ बातें ऐसी

नई दिल्ली. जब भी जम्मू-कश्मीर को लेकर बात होती है तो इसके साथ आर्टिकल 35ए का जिक्र जरूर होता है। इसको लेकर समय-समय पर विवाद और हिंसा होते रहे हैं। राज्य की सियासी पार्टियों के लिए भी यह प्रिय मुद्दा है। सियासी पार्टियां और अलगाववादी केंद्र सरकार को धमकियां दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इस पर सुनवाई कर रहा है। सवाल ये है कि आखिर इस अनुच्छेद में ऐसा क्या है कि जम्मू-कश्मीर में इसको हटाने का इतना विरोध हो रहा है। अगर ये अनुच्छेद हटाया गया तो इसका क्या होगा या राज्य पर इसका क्या असर पड़ेगा? DainikBhaskar.com आपको इन अहम सवालों के जवाब दे रहा है।

सवाल: आखिर कब लाया गया था अनुच्छेद 35ए या Article 35A और उस वक्त किसकी सरकार थी?

जवाब: बात शुरू होती है 1954 से। केंद्र में जवाहर लाल नेहरू की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार थी। इसी सरकार की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इस अनुच्छेद को जम्मू-कश्मीर में लागू करने की संवैधानिक मंजूरी दी थी।

सवाल: कहां से शुरू होता है विवाद?
जवाब: 1927 में कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर की प्रशासनिक सेवाओं में पंजाब के लोगों को नियुक्त करने का विरोध किया। इसके बाद राज्य के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ विशेषाधिकार दिए। आजादी के बाद 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर काबिज शेख अबदुल्ला से एक समझौता किया। इसे ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें तय शर्तों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ खास सुविधाएं और स्थायी नागरिकता दी गई।

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सवाल: अनुच्छेद 35ए में क्या विशेष प्रावधान हैं?
जवाब: इस अनुच्छेद में कुछ बातें ऐसी हैं जो इसे देश के बाकी राज्यों से अलग बनाती हैं। मसलन, अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वो ये तय कर सकें कि राज्य का स्थायी निवासी कौन है। राज्य के स्थायी नागरिकों को कुछ खास अधिकार मिलते हैं। सारा विवाद इन्हीं अधिकारों को लेकर है। आर्टिकल 35ए के मुताबिक, सिर्फ वही व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर का स्थायी नागरिक है वो यहां जमीन खरीद सकता है, यहां स्थायी तौर पर रह सकता है, सरकारी नौकरी हासिल कर सकता है या स्कॉलरशिप का हकदार हो सकता है। साधारण भाषा में कहें तो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को देश के बाकी राज्यों से अलग विशेष सुविधाएं दी गईं हैं और इन्हें संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई है।

सवाल: अब ये मुद्दा क्यों उठा?
जवाब: We the Citizens नामक एक गैर-सरकारी संगठन ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें मांग की गई थी कि अनुच्छेद 35ए को हटा दिया जाए। एक याचिका में इस अनुच्छेद को लैंगिग भेदभाव के तौर पर पेश किया गया।

सवाल: मोदी सरकार का क्या नजरिया है?
जवाब: केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार अनुच्छेद 35ए के पक्ष में खड़ी नहीं दिखती। अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस मुद्दे पर देशव्यापी और व्यापक बहस की जरूरत है। पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अबदुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी अनुच्छेद को हटाने के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं।

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