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Ganesh chaturthi 2018: इस गणेश चतुर्थी इन तरीकों से सजाएं घर, थीम बेस्ड डेकोरेशन भी है ऑप्शन

Ganesh chaturthi 2018: विघ्नहर्ता भगवान गणेश कल यानी गुरुवार 13 सितंबर को आपके घर आने वाले हैं।

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 05:44 PM IST
विघ्नहर्ता भगवान गणेश कल यानी विघ्नहर्ता भगवान गणेश कल यानी

नई दिल्ली. Ganesh chaturthi decoration ideas: विघ्नहर्ता भगवान गणेश कल यानी गुरुवार 13 सितंबर को आपके घर आने वाले हैं। झांकियों और पंडालों में भी गणेश जी की स्थापना होती है। भक्तिमय वातावरण होता है। कोई भी आयुवर्ग हो, हर किसी को गणेश चतुर्थी का इंतजार रहता है। कई तरह की तैयारियां की जाती हैं। संगीत भी होता है और प्रसाद भी। सबसे जरूरी काम जो भक्त करते हैं वो है बप्पा के आगमन से पहले साज-सज्जा। खास तौर पर घर की जहां विनायक विराजमान होते हैं यानी उनकी स्थापना की जाती है। तो चलिए जानते हैं, इसी साज-सज्जा से जुड़ी कुछ बातें।

इको फ्रेंडली गणपति
- साधारण भाषा में समझें तो ऐसी गणेश प्रतिमा जिसको बनाने में मिट्टी और ऐसी चीजों को इस्तेमाल किया जाए तो पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाते हों। मूर्तियां बनाने के लिए काली मिट्टी का इस्तेमाल सबसे सही माना गया है और देश के नामी मूर्तिकार भी इसका इस्तेमाल करते हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल सही नहीं है। गणपति का सिंहासन और मूषक भी इसी मिट्टी से बनाए जा सकते हैं। इनको बनाने में आपकी रचनात्मकता का अहम रोल है।

थीम बेस्ड डेकोरेशन
- पिछले कुछ समय से थीम बेस्ड डेकोरेशन प्रचलन में है। खासतौर पर बच्चे इसे ज्यादा पसंद करते हैं। थर्मोकॉल शीट्स पर जंगल, कार्टून कैरेक्टर, नंदगांव या अक्वा थीम से जुड़े स्कैच बनाकर उनमें रंग भरा जा सकता है। फिर इन्हें शेप में काटकर अलग किया जा सकता और इसके जरिए जिस स्थान पर चाहें लगा सकते हैं। मान लीजिए अगर आपने थीम प्रकृति यानी नेचर रखी है तो फिर आप जंगल, नदी, तालाब और हरे-भरे पहाड़ दिखा सकते हैं।

लाइट सिलेक्शन और सावधानी
- लाइटिंग डेकोरेशन का एक अहम पहलू है। गणपति स्थापना में भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बाजार में कई तरह की लाइट्स मौजूद हैं और आप भी सजावट के लिए इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें आपकी कलर च्वॉइस होनी चाहिए लेकिन उसका कॉम्बिनेशन उस जगह से जरूर मैच करना चाहिए जहां आप गणपति की स्थापना कर रहे हैं। एक और अहम बात ये है कि लाइट्स को लगाते समय सावधानी रखें और व्यवस्था ऐसी हो जहां छोटे बच्चों की पहुंच से ये दूर हों।

फ्लोरल डेकोरेशन यानी फूलों से सजावट
- फूलों से सजावट की हमारी परंपरा सनातन काल से रही है। आज भी सबसे ज्यादा सजावट फूलों के जरिए ही की जाती है। रंग बिरंगे फूलों से आप भी सजावट कर सकते हैं। गुलदस्ते, गमले या फूलों की झालर बनाई जा सकती है। कुछ भक्त विनायक के लिए फूलों का डोलना यानी झूला भी बनाते हैं।