मोदी को भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार बताया भाजपा प्रवक्ता ने, जानिए किस रुप में लिया / मोदी को भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार बताया भाजपा प्रवक्ता ने, जानिए किस रुप में लिया

dainikbhaskar.com

Oct 13, 2018, 01:59 PM IST

BJP Leader Said about modi: महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता अवधूत वाघ ने ट्वीट कर मोदी को भगवान विष्णु का अवतार बताया है।

Mharashtra BJP Leader Said Modi is 11th Avatar of Lord Vishnu Know About Kurma Avatar

महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता अवधूत वाघ ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘सम्मानीय प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार हैं। विपक्ष ने इस ट्विट का मजाक उड़ाया। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंधे ने कहा कि ये देवताओं का अपमान है। मुझे नहीं लगता कि इस टिप्पणी को ज्यादा महत्व देने की जरुरत है। उन्होने ये भी कहा कि यह टिप्पणी सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर संस्कृति के निम्नस्तर की झलक है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि अब इस बात की जांच करने की जरुरत है कि उनका (डिग्री) सर्टिफिकेट असली है या नहीं। ऐसी उनसे आशा नहीं थी।

मुख्य रुप से 10 ही हैं भगवान विष्णु के अवतार -

विभिन्न ग्रन्थों में अवतारों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कहीं आठ, दस, सोलह और कहीं चौबीस अवतार बताए गए हैं, लेकिन दस अवतार सभी जगह मान्य हैं। कल्कि अवतार जिसे दसवां स्थान मिला है, वह भविष्य में होने वाला है, लेकिन पुराणों में जिन चौबीस अवतारों का वर्णन है, उनकी गणना इस प्रकार से है- नारायण (विराट पुरुष), ब्रह्मा, सनक-सनन्दन-सनत्कुमार-सनातन, नर-नारायण, कपिल, दत्ताश्रेय, सुयश, हयग्रीव, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, हंस, धन्वतरि, वामन, परशुराम, मोहिनी, नृसिंह, वेदव्यास, राम, बलराम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि। इनमें ग्यारहवें नंबर पर कूर्म अवतार है। कूर्म यानी कछुआ। भगवान के इस अवतार की भी एक कथा है जो इस तरह है।

सुरासुराणामुदधिं मथ्नतां मन्दराचलम् दध्रे कमठरूपेण पृष्ठ एकादशे विभुः

जिस समय देवता और दैत्य समुद्रमंथन कर रहे थे, मंथन करते समय मंदराचल पर्वत रसातल तक जाने लगा था। तो उस समय भगवान विष्णु ने ग्यारहवां अवतार लिया और कच्छप (कछुए) का रूप लेकर मंदरांचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। उसके बाद समुद्र मंथन फिर शुरू हुआ और देव-दानवों ने समुद्र से अमृत और लक्ष्मी सहित 14 रत्नों प्राप्त किया। कूर्मपुराण में भगवान विष्णु ने अपने कच्छपावतार में ऋषियों से जीवन के चार लक्ष्यों (धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष) की वर्णन किया था। वहीं कच्छपावतार के बाद ही एकादशी का उपवास प्रचलित हुआ।

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