कल है शुक्र प्रदोष व्रत, यहां जाने व्रत का महत्व, कथा और पूजा विधि विस्तार से / कल है शुक्र प्रदोष व्रत, यहां जाने व्रत का महत्व, कथा और पूजा विधि विस्तार से

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2019, 04:33 PM IST

शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत से मिलती सुख-समृद्धि

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नई दिल्ली. सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन को सुख शांति से भरना चाहते हैं तो शिव को समर्पित प्रदोष व्रत से बेहतर और कुछ नहीं। खासतौर से अगर ये व्रत शुक्रवार को पड़े तो सोने पे सुहागा समझिए। जी हां...यूं तो प्रदोष व्रत का अपना काफी महत्व है लेकिन अगर ये व्रत शुक्रवार के दिन हो तो ये और भी फलदायी हो जाता है। आज वही शुक्र प्रदोष व्रत है। कहा जाता है कि शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख समृद्धि भर देता है। यही कारण है कि आज के प्रदोष व्रत का काफी खास माना जा रहा है। जो प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन आए उसे शुक्र प्रदोष व्रत या फिर भुगुवारा प्रदोष कहते हैं। ये दिन खासतौर से भगवान शिव की आराधना को ही समर्पित है। ये व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन यानि त्रयोदशी पर होता है। और इस दिन भगवान शिव के साथ साथ माता पार्वती की पूजा का भी विधान है। कहते हैं भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से पाप तो मिटते ही है साथ ही मोक्ष भी प्राप्त होता है। तो वही प्रदोष व्रत रखने से दो गायों को दान देने के बराबर पुण्य अर्जित हो सकता है। हफ्ते के किसी भी दिन प्रदोष व्रत हो सकता है और हर दिन का एक खास महत्व होता है। इस बार प्रदोष व्रत शुक्रवार को है और कहा जाता है कि शुक्र प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए होता है।

प्रदोष व्रत की कथा
कहा जाता है कि क नगर में तीन मित्र रहते थे – राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे।धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकि गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो ज़िद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद ति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई। यानि शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

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